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This Article is From Jul 25, 2025

सुप्रीम कोर्ट ने केरल को राज्यपाल के खिलाफ याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने में देरी को लेकर राज्यपाल के खिलाफ केरल सरकार की याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दे दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने केरल को राज्यपाल के खिलाफ याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दी
केरल सरकार को राज्यपाल द्वारा विधेयकों को रोके रखने के खिलाफ याचिका वापस लेने की अनुमति दी
  • सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को राज्यपाल द्वारा विधेयकों को रोके रखने के खिलाफ याचिका वापस लेने की अनुमति दी.
  • केरल सरकार ने कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल मामले का फैसला उस पर भी लागू होता है इसलिए याचिका वापस कर रही है.
  • केंद्र ने राष्ट्रपति के संदर्भ के साथ बड़ी पीठ को भेजने की मांग करते हुए याचिका वापस लेने का विरोध किया है.
नई दिल्‍ली:

सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को राज्यपाल द्वारा विधेयकों को रोके रखने के खिलाफ याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी है. केरल सरकार का कहना है कि उसे याचिका वापस लेने का अधिकार है, क्योंकि राज्यपालों और राष्ट्रपति द्वारा देरी के खिलाफ तमिलनाडु का फैसला उस पर भी लागू होता है. केंद्र ने केरल सरकार का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले को राष्ट्रपति के संदर्भ के साथ-साथ एक बड़ी पीठ को भेजा जाना चाहिए. 

केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल ने तर्क दिया कि केरल सरकार के मामले की सुनवाई राष्ट्रपति के संदर्भ पर निर्णय लेने के लिए गठित एक विशेष पीठ द्वारा की जानी चाहिए. अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने याचिका वापस लेने का विरोध किया और तर्क दिया कि तमिलनाडु के राज्यपाल के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला केरल के मामले पर लागू नहीं होगा. 

वहीं, केरल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के.के. वेणुगोपाल ने यह कहते हुए याचिका वापस लेने की मांग की कि तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में हाल ही में पारित निर्णय के मद्देनजर यह मुद्दा निरर्थक हो गया है. 

पिछली सुनवाई में क्‍या हुआ था?

  • पिछली सुनवाई में, अटॉर्नी जनरल वेंकटरमानी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केरल सरकार की दलीलों का विरोध किया और न्यायालय से आग्रह किया कि विधेयकों को मंज़ूरी देने के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति के पास भेजे जाने वाले संदर्भ पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतज़ार किया जाए.
  • एसजी मेहता ने पिछली सुनवाई में कहा था कि केरल सरकार की याचिका को भी राष्ट्रपति के संदर्भ के साथ भेजा जा सकता है.
  • इसे अजीब बताते हुए, वेणुगोपाल ने पूछा था कि उनकी याचिका का विरोध कैसे किया जा सकता है. 'राज्य द्वारा याचिका वापस लेने में हिचकिचाहट क्यों है? इसके पीछे कोई तर्क तो होगा ही.'
  • - तब पीठ ने टिप्पणी की, 'हम यह स्पष्ट कर देंगे कि इसे वापस लेने पर कोई आपत्ति नहीं हो सकती.' इसके बाद मामले की सुनवाई 25 जुलाई के लिए स्थगित कर दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में केरल के तत्कालीन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर दो साल तक कोई फैसला न लेने पर नाराजगी व्यक्त की थी. खान वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं. शीर्ष अदालत ने पिछले साल 26 जुलाई को विपक्ष शासित केरल की उस याचिका पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी नहीं दी गई.

केरल सरकार ने आरोप लगाया कि खान ने कुछ विधेयक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे थे और उन्हें अभी तक मंजूरी नहीं मिली है. याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए, शीर्ष अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और केरल के राज्यपाल के सचिवों को नोटिस जारी किए. राज्य ने कहा था कि उसकी याचिका राज्यपाल द्वारा सात विधेयकों को राष्ट्रपति के पास भेजने से संबंधित है, जिन पर उन्हें स्वयं विचार करना था. केरल सरकार ने कहा था कि सातों विधेयकों में से किसी का भी केंद्र-राज्य संबंधों से कोई लेना-देना नहीं है.

लेखक के बारे में
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नूपुर डोगरा
Legal Correspondent
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