विज्ञापन

खुद को बताया था सुप्रीम कोर्ट का जज, महाठग सुकेश चंद्रशेखर दोषी करार, कल सुनाया जाएगा फैसला

महाठग सुकेश चंद्रशेखर को पहली बार कोर्ट किसी मामले में सजा सुनाएगा. सुकेश ने सुप्रीम कोर्ट के जज बनकर एक दूसरे जज को प्रभावित करने की कोशिश की थी.

खुद को बताया था सुप्रीम कोर्ट का जज, महाठग सुकेश चंद्रशेखर दोषी करार, कल सुनाया जाएगा फैसला
सुकेश चंद्रशेखर को गुरुवार को सुनाई जाएगी सजा
नई दिल्ली:

दिल्ली की एक अदालत ने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर को 2017 में भ्रष्टाचार के एक मामले में जमानत के लिए खुद को सुप्रीम कोर्ट का एक जज बताकर एक विशेष न्यायाधीश को प्रभावित करने का दोषी ठहराया है तथा इस हरकत को न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और मर्यादा का ‘सीधा अपमान' बताया है.

मुख्य न्यायिक जज हर्षिता मिश्रा ने चंद्रशेखर को बीएनएस की धाराओं - 170 (खुद को सरकारी कर्मचारी के रूप में पेश करना), 189 (सरकारी कर्मचारी को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना) और 507 (गुमनाम संदेश के जरिए आपराधिक धमकी देना) के तहत दोषी ठहराया है. अदालत 27 अगस्त को चंद्रशेखर को सजा सुनाएगी.

अदालत 27 अगस्त को सुनाई जाएगी सजा

अदालत ने 20 अगस्त को अपने आदेश में कहा, ‘‘यह मामला भविष्य के लिए इस बात की याद दिलाता रहेगा कि कानून की गरिमा किसी व्यक्ति की आवाज में नहीं होती—चाहे वह टेलीफ़ोन पर कितनी ही प्रभुत्ववादी क्यों न लगे—बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया की ईमानदारी में निहित होती है.'' यह मामला 28 अप्रैल, 2017 को किये गये एक फोन से जुड़ा है, जब चंद्रशेखर भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस हिरासत में था.

अभियोजन पक्ष के अनुसार, चंद्रशेखर ने पुलिस आरक्षी मंजीत का मोबाइल फोन हासिल किया और उससे पूनम चौधरी के आधिकारिक लैंडलाइन और मोबाइल फोन पर संपर्क किया, पूनम चौधरी उस समय ‘ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम' से जुड़े मामलों की विशेष न्यायाधीश थीं.

पहले बना न्यायाधीश का निजी सचिव फिर न्यायाधीश

अदालत ने कहा कि चंद्रशेखर ने पहले शीर्ष अदालत के तत्कालीन एक न्यायाधीश के निजी सचिव और बाद में खुद न्यायाधीश बनकर बात की. आरोप है कि उसने न्यायमूर्ति चौधरी को जल्द से जल्द जमानत देने के लिए मनाने की कोशिश की और ऐसा न करने पर उन्हें करियर से जुड़े बुरे नतीजों की धमकी दी.

अदालत ने कहा,‘‘अदालत कक्ष में तो दरवाजे से ही प्रवेश किया जा सकता है तथा न्याय तक पहुंचने के लिए किसी की जगह लेने, डराने-धमकाने या बनावटी प्रभुत्व का इस्तेमाल करने जैसे ‘पिछले दरवाजे' का सहारा नहीं लिया जा सकता. आरोपी ने न्यायिक प्रक्रिया में ठीक इसी तरह पिछले दरवाजे से घुसने की कोशिश की थी. सबूतों ने उस दरवाज़े को बंद कर दिया है.''

धोखाधड़ी के आम मामलों से अलग 

न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला धोखाधड़ी या किसी और का रूप धरने के आम मामलों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि इसमें देश की सबसे बड़ी अदालत के अधिकार का इस्तेमाल करके किसी दूसरे न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने और इस तरह न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करने की कोशिश की गई थी. अदालत ने दिल्ली पुलिस को आरक्षी मंजीत की भूमिका की दोबारा जांच करने का भी निर्देश दिया. इसमें यह भी शामिल है कि चंद्रशेखर को उसका मोबाइल फोन कैसे मिल गया, क्या फोन लॉक था, उसका पासवर्ड किसे पता था और फोन के कथित इस्तेमाल की जानकारी तुरंत क्यों नहीं दी गई.

यह भी पढ़ें- 'बार-बार क्‍यों लग रहे अवैध वसूली के आरोप', इलाहाबाद HC ने यूपी बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार मामले में अपनाया सख्त रुख

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Sukesh Chandrasekar, SC Judge, Who Is Sukesh Chandrasekhar
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com