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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाई गई, कैबिनेट की मंजूरी के बाद जारी हुआ अध्यादेश

सुप्रीम कोर्ट में जजों को लेकर मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने सु्प्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ा दी गई है. अब देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाई गई, कैबिनेट की मंजूरी के बाद जारी हुआ अध्यादेश
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  • मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाई, मुख्य न्यायाधीश सहित कुल जज हुए 38
  • अध्यादेश राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद तुरंत प्रभाव से लागू हो गया
  • सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में कुल 33 जजों के पद स्वीकृत हैं जिनमें से दो पद फिलहाल खाली पड़े हैं
नई दिल्ली:

मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अधिकतम जजों की संख्या में इजाफा करने का फैसला किया है.इसके लिए कल देर रात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद एक अध्यादेश ( Ordinance ) जारी किया गया है.संसद के मॉनसून सत्र में इस बारे में एक बिल पारित किया जाएगा जो अध्यादेश की जगह लेगा.अध्यादेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है.

चीफ जस्टिस को मिलाकर कुल जज हुए 38

संविधान के अनुच्छेद 123 ( 1 ) के तहत जारी किए गए अध्यादेश में सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या को वर्तमान के 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान किया गया है.इस संख्या में मुख्य न्यायाधीश शामिल नहीं होते हैं यानि व्यवहारिक रूप में ये संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी. अध्यादेश के जरिए Supreme Court ( Number of Judges ) Act 1956 में संशोधन किया गया है.

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अभी दो पद हैं खाली 

हालांकि फ़िलहाल स्वीकृत 33 जजों में दो पद खाली पड़े हैं.समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाए जाने की मांग होती रहती है, ताकि मुकदमों को समय से निपटाने में मदद मिल सके.आखिरी बार 2019 में ये संख्या बढ़ाई गई थी जब मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 कर दिया गया था.1950 में जब सुप्रीम कोर्ट का गठन किया गया था, तब संख्या केवल 8 थी.पहली बार 1956 में संसद में कानून बनाकर इस संख्या में बढ़ोत्तरी की गई और इसे 11 कर दिया गया.

संविधान के मुताबिक अगर संसद का सत्र नहीं चल रहा हो तो अध्यादेश के जरिए कोई कानून बनाया जा सकता है.शर्त ये है कि किसी अध्यादेश की मियाद केवल 6 महीने होती है.6 महीने के भीतर अध्यादेश पर संसद की मंजूरी लेनी पड़ती है, जिसके बाद वो स्थाई कानून बन जाता है.संसद की मंजूरी नहीं मिल पाने पर कोई अध्यादेश स्वतः ही निरस्त हो जाता है.

सुप्रीम कोर्ट के नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड ( NJDG ) के डैशबोर्ड के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की कुल संख्या 93617 है. जिनमें 39.67 फीसदी मामले ऐसे हैं जो एक साल से कम समय से लंबित हैं. लंबित मामलों में कुल 72883 मामले दीवानी ( civil ) जबकि 20734 मामले फौजदारी ( criminal ) के हैं.

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