- जंतर-मंतर पर पेपर लीक के विरोध में छात्रों का आंदोलन जारी है और कई राज्यों से छात्र शामिल हुए हैं.
- प्रदर्शनकारी का कहना है मांग सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की है.
- स्थानीय लोग छात्रों को भोजन, पानी और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर आंदोलन में समर्थन प्रदान कर रहे हैं.
NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है. इस धरने में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र दिल्ली पहुंचे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग को लेकर है. उनका कहना है कि वे आंदोलन का हिस्सा बने हैं और अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं.
धरनास्थल पर छात्रों के लिए कई सामाजिक संगठन, स्थानीय लोग और आम नागरिक मदद के लिए आगे आ रहे हैं. कोई प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहा है तो कोई पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचा रहा है. कठिन मौसम और सीमित संसाधनों के बावजूद लोग मानवता की मिसाल पेश करते हुए छात्रों का हौसला बढ़ा रहे हैं. प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि इस समर्थन से उन्हें आंदोलन जारी रखने की ताकत मिल रही है और यह दिखाता है कि उनकी मांगों को समाज के विभिन्न वर्गों का भी समर्थन प्राप्त है.

गर्मी और भारी उमस के बीच जंतर-मंतर पर एक तिरपाल के नीचे करीब दो दर्जन छात्र बैठे हैं. इनमें गुजरात से आईं ट्विंकल, पुणे से आए प्रथमेश और मुरादाबाद के मयंक भी शामिल हैं. मयंक NEET की तैयारी कर रहे हैं. उनका कहना है कि उनके पिता भाजपा से जुड़े हैं और शुरुआत में उनके जंतर-मंतर आने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन वह खुद इस आंदोलन को मजबूती देने के लिए यहां पहुंचे हैं.
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत : छात्र
पुणे से आए प्रथमेश UPSC की तैयारी कर रहे हैं. उनका कहना है कि मामला केवल NEET का नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है. इसी वजह से उन्होंने आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया. वहीं गुजरात की ट्विंकल भी UPSC अभ्यर्थी हैं. वह कहती हैं कि एक छोटे से टेंट में गर्मी और उमस के बीच रहना आसान नहीं है, लेकिन छात्रों की आवाज़ बुलंद करने के लिए इस आंदोलन का हिस्सा बनकर उन्हें खुशी मिल रही है.
भोजन की व्यवस्था में स्थानीय लोग मदद कर रहे हैं : प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि भोजन की व्यवस्था में स्थानीय लोग और समर्थक मदद कर रहे हैं. कई लोग यहां खाना पहुंचा देते हैं, जिससे बड़ी परेशानी नहीं होती. हालांकि, उनका कहना है कि छात्रों को अपनी मांगों के लिए इस तरह की परिस्थितियों में संघर्ष करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए.

धरनास्थल पर दो बड़े डैशबोर्ड भी लगाए गए हैं, जहां छात्र अपनी मांगों को पर्चियों पर लिखकर चिपका रहे हैं. कोई तकनीकी प्रशिक्षण की मांग कर रहा है तो कोई शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की बात उठा रहा है.
इसी बीच बुराड़ी से आईं दो बहनें अपनी मां के साथ घर पर खाना बनाकर यहां प्रदर्शनकारियों के बीच बांट रही हैं. उन्होंने बताया, “हम अपनी मां के साथ मिलकर खाना बनाकर लाए हैं, ताकि यहां बैठे छात्रों की मदद कर सकें.”

जंतर-मंतर पर चल रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) और छात्रों के आंदोलन 31वें दिन में प्रवेश कर चुका है. प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं. CJP और सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर करने के लिए कोई बीच का रास्ता नहीं निकल पाया है. सूत्रों का कहना है कि CJP सरकारी प्रतिनिधि से मिलने के लिए किसी सरकारी आवास या दफ़्तर जाने को तैयार नहीं हैं.
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