- भारत में 2024 में मृत्यु दर प्रति हजार आबादी पर 6.4 बनी हुई है, जो प्री-कोविड स्तर से अधिक है
- 2024 की रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों की मृत्यु दर 7.1 और महिलाओं की मृत्यु दर 5.6 प्रति हजार आबादी है
- 2024 में जन्म दर में थोड़ी कमी आई है, क्रूड बर्थ रेट घटकर 18.3 प्रति हजार आबादी रह गई है
भारत में अब भी मृत्यु दर उतनी ही बनी हुई है, जितनी एक साल पहले थे. भारत में अब भी मृत्यु दर प्रति हजार आबादी पर 6.4 बनी हुई है. यानी, हर एक हजार लोगों में से 6.4 की मौत हो जा रही है. ये आंकड़े 2024 के हैं. 2023 में भी मृत्यु दर 6.4 ही थी. ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में मृत्यु दर अभी भी प्री-कोविड स्तर के ऊपर बनी हुई है. कोविड से पहले 2019 और 2020 में मृत्यु दर 6.0 थी.
ये सारी जानकारी केंद्र सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की 2024 की रिपोर्ट में सामने आए हैं, जिसे हाल ही में जारी किया गया है. इस रिपोर्ट में जन्म और मृत्यु दर को लेकर आंकड़े सामने आते हैं.
ये रिपोर्ट बताती है कि 2024 में भारत में पुरुषों की मृत्यु दर 7.1 और महिलाओं की 5.6 है. इससे ये भी पता चलता है कि शहरों की तुलना में गांवों में मृत्यु दर अब भी ज्यादा हैं. गांवों में प्रति हजार आबादी पर मृत्यु दर 6.8 और गांवों में 5.6 है.

और कितने बच्चे पैदा हो रहे हैं?
2024 की SRS रिपोर्ट से पता चलता है कि जन्म दर में थोड़ी सी कमी आई है. भारत में क्रूड बर्थ रेट यानी प्रति हजार आबादी पर जन्म की संख्या 2024 में 2023 की तुलना में थोड़ी कम है. 2023 में बर्थ रेड 18.4 थी जो 2024 में थोड़ी कम होकर 18.3 हो गई. शहरी इलाकों में यह 14.9 से घटकर 14.7 और ग्रामीण इलाकों में 20.3 से घटकर 20.2 हो गई.
जन्म के समय सेक्स रेशियो यानी लिंग अनुपात में भी मामूली सुधार हुआ है. लिंग अनुपात का मतलब है कि हर एक हजार लड़कों पर कितनी लड़कियों का जन्म हो रहा है. 2022-24 के बीच लिंग अनुपात हर एक हजार लड़कों पर 918 हो गया. 2020-22 के बीच ये 914 था. इसका मतलब हुआ कि 2022-24 के बीच अगर एक हजार लड़कों का जन्म हुआ तो 918 लड़कियों भी पैदा हुईं. ग्रामीण इलाकों में लिंग अनुपात हर हजार लड़कों पर 914 और शहरों में 928 रहा.

हालांकि, क्रूड बर्थ रेट में थोड़ी गिरावट आई है. क्रूड बर्थ रेट से पता चलता है कि हर 1000 लोगों पर कितनों का जन्म हो रहा है? 2024 में हर एक हजार लोगों पर क्रूड बर्थ रेट 18.3 थी. इसका मतलब हुआ कि हर 1000 लोगों पर 18.3 बच्चों का जन्म हो रहा है. गांवों में ये 20.2 और शहरों में 14.7 है.
सबसे ज्यादा क्रूड बर्थ रेट बिहार में है. बिहार में हर 1000 लोगों पर बर्थ रेट 26.8 है. यानी, बिहार में 1000 लोगों पर 26 या 27 बच्चों का जन्म हो रहा है. दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है, जहां ये 23.5 है. जबकि, राजस्थान में ये 22.8 और मध्य प्रदेश में 22.5 है.
2019 में भारत में क्रूड बर्थ रेट 19.7 थी. ये दिखाता है कि अब पैदा होने वाले बच्चों की संख्या कम हो रही है.
इसकी एक वजह यह है कि अब टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) में गिरावट आ रही है. TFR से पता चलता है कि एक महिला अपनी जिंदगी में औसतन कितने बच्चों को जन्म दे रही है. 2012-14 में फर्टिलिटी रेट 2.3 था, जबकि 2022-24 में ये घटकर 1.9 पर आ गया. मतलब 10 साल पहले तक एक महिला 2 से 3 बच्चों को जन्म दे रही थी. लेकिन अब ज्यादातर महिलाएं 1 या 2 ही बच्चा कर रही हैं.

लेकिन एक चिंता वाली बात ये है कि अब भी भारत में हर साल पैदा होने वाले 1000 बच्चों में से 25 की मौत 1 साल के भीतर ही हो जाती है. इसे इन्फैंट मोर्टेलिटी रेट या शिशु मृत्यु दर कहते हैं. 2024 में भारत में शिशु मृत्यु दर हर एक हजार जन्म पर 25.4 है. गांवों में ये 28.5 और शहरों में 17.4 है.
सबसे ज्यादा शिशु मृत्यु दर छत्तीसगढ़ में है, जहां पैदा होने वाले हर 1000 बच्चों में से 36 की मौत सालभर में ही हो जाती है. दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है, जहां 35 बच्चों की मौत 1 साल में हो जाती है.
हालांकि, अच्छी बात है कि शिशु मृत्यु दर में 10 साल में जबरदस्त सुधार भी हुआ है. 2012-14 की तुलना में 2022-24 में शिशु मृत्यु दर में 37.4% की कमी आई है.
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