- महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया है और वह वांटेड आरोपी है
- सौरभ चंद्राकर के पास से इंडोनेशिया में जारी किया गया अजंता मेंडिस नाम का फर्जी पासपोर्ट मिला है
- सीबीआई ने सौरभ चंद्राकर को रायपुर की अदालत में पेश किया जाएगा और उसके खिलाफ दो मामलों में चार्जशीट दाखिल है
भारत की गिरफ्त में आ चुका महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर का फर्जी पासपोर्ट सामने आ चुका है. अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट मामले में वांटेड सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया है. सौरभ चंद्राकर के पास से इंडोनेशिया में जारी फर्जी पासपोर्ट मिला है और इसी की मदद से उसने विदेश में छिपने की कोशिश की थी. कमाल की बात है कि यह पासपोर्ट अजंता मेंडिस के नाम पर जारी किया गया था. लेकिन यही फर्जी पासपोर्ट उसके लिए काल बन गया. इसी फर्जी पासपोर्ट की वजह से जुलाई में ओमान में सौरभ चंद्राकर को हिरासत में लिया गया था और अब उसे भारत लाया गया है.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, फर्जी पहचान के सहारे वह अपनी असली पहचान छिपाकर विदेश में रह रहा था.

महादेव ऐप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर का फर्जी पासपोर्ट (फोटो- NDTVद्वारा एक्सेस)
महादेव ऐप के सरगना सौरभ चंद्राकर को कोर्ट में पेश किया जाएगा
महादेव ऐप के सरगना सौरभ चंद्राकर को सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मुख्यालय से रायपुर की अदालत में पेश करने के लिए ले जाया गया. उसे एक दिन पहले ही ओमान से भारत लाया गया था. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि चंद्राकर की भारत वापसी से जांचकर्ताओं को कथित अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के बारे में और अधिक जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी. यह भी पता चल पाएगा कि 'प्रोटेक्शन मनी' यानी सुरक्षा के बदले ली जाने वाली रकम किसे मिली थी.
पूरा मामला समझिए
CBI ने छत्तीसगढ़ सरकार की मांग पर 'महादेव ऑनलाइन बुक' मामलों की जांच शुरू की थी. जांच से पता चला है कि 'महादेव ऑनलाइन बुक' देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक था, जिसे भारत के बाहर से चलाया जा रहा था. यह भारत भर में फैले 'पैनल' और फ्रेंचाइजी के एक नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेलों और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी की सुविधा देता था. इसके जरिए यूजर्स को जोड़ा जाता था और उनसे दांव की रकम वसूली जाती थी.
अवैध सट्टेबाजी से हुई कमाई को कई 'म्यूल' (दूसरे के नाम पर खोले गए) बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था, कई लेन-देन के जरिए इसकी परतें बनाई जाती थीं, और फिर हवाला चैनलों के माध्यम से इसे विदेश भेज दिया जाता था. जांच में यह भी सामने आया है कि इस कमाई का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों को 'प्रोटेक्शन मनी' के रूप में दिया जाता था, ताकि यह सिंडिकेट बिना किसी रुकावट के अपना काम जारी रख सके.
CBI ने 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988', भारतीय दंड संहिता (IPC) की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं, तथा 'छत्तीसगढ़ जुआ (निषेध) अधिनियम' के तहत चार्जशीट दाखिल की है. इन चार्जशीट में मुख्य आरोपियों में से एक नाम सौरभ चंद्राकर का भी है. ED ने भारत और विदेश में कई संपत्तियों को जब्त (अटैच) किया है.
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