- सीबीआई महादेव बेटिंग सिंडिकेट के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत वापस लायी है
- इस नेटवर्क ने भारत में हजारों बेटिंग पैनल चलाकर करोड़ों रुपये का लेन-देन और हवाला के जरिए पैसे विदेश भेजा था
- ईडी ने इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया है और करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं
दुबई में बैठकर भारत में हजारों बेटिंग पैनल चलाने, फर्जी बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन करने, हवाला से पैसा विदेश भेजने और कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों तक प्रोटेक्शन अमाउंट पहुंचाने के आरोपों से घिरे महादेव ऑनलाइन बुक बेटिंग सिंडिकेट के खिलाफ जांच में अब एक बड़ा मोड़ आया है. इस नेटवर्क के मुख्य प्रमोटर और ईडी के मामले में आरोपी नंबर एक सौरभ चंद्राकर को सीबीआई ने ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत वापस लाया है. सीबीआई की टीम उसे लेकर भारत पहुंची है, उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाना है. चंद्राकर दो सीबीआई मामलों और ईडी के एक मामले में वांटेड था.
महादेव ऑनलाइन बुक यानी MOB का नाम पिछले कुछ सालों में देश के सबसे बड़े कथित ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के रूप में सामने आया. शुरुआत छत्तीसगढ़ के भिलाई से हुई, लेकिन कारोबार का मुख्य केंद्र दुबई बन गया. जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क ने भारत के अलग-अलग राज्यों में हजारों पैनल और फ्रेंचाइजी के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, कार्ड गेम और दूसरे ऑनलाइन खेलों पर सट्टा लगवाया. वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए लोगों को बेटिंग में शामिल किया गया. इस कारोबार से होने वाली कमाई को बैंक खातों, फर्जी कंपनियों, हवाला और विदेशी निवेश के रास्ते इधर से उधर किया गया.
सीबीआई के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर दो सीबीआई मामलों में आरोपी है, जिनमें चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था. इसके बाद भारत की एजेंसियों ने ओमान से उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई. सीबीआई की विशेष टीम उसे भारत लेकर आई है. उसे मेडिकल जांच और ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया के बाद रायपुर ले जाकर विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाना है. सीबीआई ने इस मामले की जांच छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर अपने हाथ में ली थी, सीबीआई के बयान के मुताबिक, जांच में बेटिंग से हुई कमाई को म्यूल बैंक खातों के जरिए कई स्तरों पर घुमाकर हवाला से विदेश भेजने और कुछ रकम को कथित तौर पर संरक्षण के लिए इस्तेमाल करने की बात सामने आई है.
भिलाई से शुरू हुआ कारोबार, दुबई बना मुख्यालय
ईडी की जांच के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल भिलाई के रहने वाले हैं और महादेव ऑनलाइन बुक के मुख्य प्रमोटर हैं. दोनों ने मिलकर इस नेटवर्क को खड़ा किया. जांच एजेंसी का दावा है कि शुरुआती दौर में दोनों छोटे कारोबारी थे, लेकिन 2019-20 के आसपास बेटिंग के कारोबार में तेजी से विस्तार हुआ. कोरोना महामारी के दौरान जब लोग घरों में थे और ऑनलाइन गतिविधियां बढ़ रही थीं, तब इस नेटवर्क ने भी अपना दायरा तेजी से बढ़ाया. बाद में दोनों दुबई चले गए और वहीं से भारत में चल रहे नेटवर्क को नियंत्रित करने लगे.
ईडी के मुताबिक, दुबई में महादेव ऑनलाइन बुक का केंद्रीय मुख्यालय बनाया गया. वहां से वेबसाइट, ऐप, यूजर आईडी, सट्टे की रकम और अलग-अलग राज्यों में चल रहे पैनलों पर निगरानी रखी जाती थी. भारत में नेटवर्क चलाने का जोखिम फ्रेंचाइजी और पैनल संचालकों पर डाल दिया गया, जबकि सॉफ्टवेयर, यूजर, हिसाब-किताब और कमाई पर नियंत्रण दुबई में बैठे प्रमोटरों के पास रहा.

जांच में करीब 3,200 से ज्यादा पैनल और शाखाओं का पता चला. ये पैनल भारत और विदेशों में अलग-अलग सहयोगियों के जरिए चलाए जा रहे थे. ईडी के अनुसार, एक पैनल लेने के लिए संचालक को लगभग 15 से 20 लाख रुपये तक की शुरुआती रकम देनी पड़ती थी. इसके बाद उसे बैंक खाते, मोबाइल फोन, इंटरनेट कनेक्शन और काम करने वाले लोगों का इंतजाम करना होता था. मुख्यालय की तरफ से उसे मास्टर आईडी और लॉगिन क्रेडेंशियल दिए जाते थे. इनकी मदद से वह अपने ग्राहकों को बेटिंग के लिए आईडी उपलब्ध कराता था.
पैनल संचालक अपने नीचे सब-पैनल भी बना सकते थे. इस तरह एक पैनल के नीचे कई छोटे ऑपरेटर काम करने लगते थे. एक व्यक्ति के पास एक से ज्यादा पैनल होने की भी बात जांच में सामने आई. इस पूरे मॉडल में मुख्यालय को कमाई का बड़ा हिस्सा मिलता था. ईडी के मुताबिक, अलग-अलग व्यवस्थाओं में 70 से 80 प्रतिशत तक मुनाफा मुख्यालय को भेजा जाता था. कुछ पैनलों में ऑपरेटर और स्थानीय संचालक के बीच बाकी रकम का बंटवारा होता था.
ग्राहक कैसे फंसते थे और बेटिंग कैसे होती थी?
महादेव ऐप के नेटवर्क में ग्राहकों को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया, वेबसाइट, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम का इस्तेमाल किया जाता था. क्रिकेट मैच, फुटबॉल मुकाबलों और दूसरे खेल आयोजनों के दौरान लोगों को बेटिंग की तरफ आकर्षित किया जाता था. बड़े आयोजन, सेलिब्रिटी प्रमोशन, सोशल मीडिया विज्ञापन और अमीर लोगों जैसी जिंदगी दिखाने वाली तस्वीरों के जरिए इस कारोबार को लोकप्रिय बनाने की कोशिश की जाती थी.
जांच के मुताबिक, किसी वेबसाइट पर जाने वाले व्यक्ति को व्हाट्सऐप नंबर दिया जाता था. उस नंबर के जरिए उसे किसी पैनल ऑपरेटर तक पहुंचाया जाता था. शुरुआत में ग्राहक को कम से कम 100 रुपये जमा करने का विकल्प मिलता था. इसके बाद उसे एक यूजर आईडी और क्रेडिट दिए जाते थे. ग्राहक अपने खाते में रकम जमा करके क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, कार्ड गेम और दूसरे खेलों पर दांव लगाता था.

हर ग्राहक का हिसाब संबंधित पैनल के पास रहता था. ग्राहक को भुगतान भी पैनल संचालक के जरिए किया जाता था. जांच एजेंसी का आरोप है कि इस सिस्टम में बड़े दांव जीतने वाले ग्राहकों की आईडी ब्लॉक कर दी जाती थी या उनके भुगतान में बाधा डाली जाती थी. इस तरह ग्राहक को वास्तविक जीत की रकम मिलने से रोकने का भी तरीका अपनाया जाता था.
पैनल संचालक हर सप्ताह अपना हिसाब मुख्यालय को भेजते थे. सोमवार को साप्ताहिक हिसाब-किताब और भुगतान का सेटलमेंट होता था. जो पैनल अपनी देनदारी नहीं चुकाता था, उसकी आईडी या लॉगिन बंद कर दिया जाता था. मुख्यालय के पास सभी पैनलों की गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था थी. ईडी के मुताबिक, दुबई के मुख्य कॉल सेंटर में करीब एक हजार लोग अलग-अलग व्हाट्सऐप ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे थे. इसके अलावा वहां चेकर्स की टीम थी, जो करीब 12-12 घंटे की शिफ्ट में खातों, पैनलों और भुगतान की निगरानी करती थी.
इन कर्मचारियों में बड़ी संख्या छत्तीसगढ़ और भिलाई के युवाओं की बताई गई है. उन्हें दुबई में किराये की विला और दूसरी जगहों पर ठहराया जाता था. उनके रहने, खाने और रोजमर्रा के खर्च का हिसाब भी रखा जाता था. जांच में ऐसे दस्तावेजों और बिलों का जिक्र है जिनसे कर्मचारियों के खर्च और उनके ठहरने की व्यवस्था का पता चला.
90 हजार करोड़ रुपये तक के कारोबार का अनुमान
ईडी ने अपनी जांच में महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े दूसरे बेटिंग प्लेटफॉर्मों से होने वाले कथित कारोबार का बड़ा अनुमान लगाया है. एजेंसी के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक से करीब 75 हजार से 80 हजार करोड़ रुपये तक की बेटिंग गतिविधियों का अनुमान है. स्काईएक्सचेंज से लगभग 11 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये और लोटस 365 से करीब 2,400 करोड़ रुपये की गतिविधियों का अनुमान लगाया गया है. इस तरह महादेव और उससे जुड़े प्लेटफॉर्मों का कुल अनुमानित कारोबार करीब 88 हजार से 94 हजार करोड़ रुपये तक बताया गया है.
जांच में यह भी दावा किया गया है कि इस नेटवर्क से करीब 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये भारत से बाहर यूएई और दूसरे विदेशी ठिकानों तक पहुंचाए गए. ईडी ने इस मामले में कुल छह चार्जशीट दाखिल की हैं. इन शिकायतों में कुल 116 आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं. एजेंसी ने इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
बैंक खातों से लेकर हवाला तक, पैसे को छिपाने का तरीका
ईडी के मुताबिक, इस नेटवर्क में बेटिंग से होने वाली रकम सीधे प्रमोटरों के खाते में नहीं आती थी. इसके लिए बड़ी संख्या में बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया. इनमें कई खाते ऐसे लोगों के नाम पर खुलवाए गए जिनका बेटिंग कारोबार से कोई सीधा संबंध नहीं था. कुछ लोगों के बैंक खाते किराये पर लिए गए, कुछ को कमीशन देकर इस्तेमाल किया गया और कुछ मामलों में खाताधारकों को धोखे में रखकर उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया.
ऐसे खातों को जांच एजेंसियां म्यूल बैंक अकाउंट कहती हैं. इन खातों में ग्राहकों से जमा कराई गई रकम आती थी. इसके बाद एक खाते से दूसरे खाते में कई बार ट्रांसफर किया जाता था. रकम को अलग-अलग कंपनियों, कारोबारियों और फर्जी फर्मों के जरिए घुमाया जाता था, ताकि असली सोर्स और अंतिम लाभार्थी का पता लगाना मुश्किल हो जाए.
ईडी की जांच में मोबाइल फोन की दुकानों, छोटी कंपनियों और दूसरे कारोबारी प्रतिष्ठानों के जरिए भी नकदी को बैंकिंग सिस्टम में डालने का तरीका सामने आया. कुछ कारोबारी कथित तौर पर एक से दो प्रतिशत कमीशन लेकर नकदी के बदले बैंक में रकम जमा करवाते थे. एक मामले में हनी सिंह से जुड़े बैंक खाते में मई 2019 से नवंबर 2021 के बीच करीब 48 लाख रुपये के क्रेडिट का जिक्र है. जांच में उसके पिता के पेमेंट बैंक खाते के इस्तेमाल की बात भी सामने आई.

ईडी के मुताबिक, 2025 में नवी मुंबई में करीब 886 म्यूल बैंक खातों का पता चला, जिनमें लगभग 84 करोड़ रुपये के लेन-देन की जानकारी मिली. 2026 में रायपुर में 431 ऐसे खातों की पहचान की गई. इन खातों का इस्तेमाल बेटिंग से जुड़ी रकम को अलग-अलग जगह पहुंचाने के लिए किए जाने का आरोप है.
रकम को विदेश भेजने के लिए शुरुआत में बैंकिंग चैनलों और कंपनियों का भी इस्तेमाल हुआ. जांच में सागर डायमंड्स से जुड़े लेन-देन का उल्लेख है. जुलाई 2022 में एक ही दिन कई खातों के जरिए आरटीजीएस ट्रांसफर किए गए. ईडी का आरोप है कि बैंकिंग चैनलों पर जांच का दबाव बढ़ने के बाद 2023 से हवाला का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा.
हवाला के जरिए भारत में नकदी इकट्ठा की जाती थी और विदेश में उसी के बराबर रकम उपलब्ध करा दी जाती थी. इस प्रक्रिया में कई बिचौलियों और स्थानीय नेटवर्क की भूमिका सामने आई. ईडी के मुताबिक, दम्मानी बंधुओं ने हवाला के जरिए रकम पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे कथित तौर पर प्रति लाख रुपये पर करीब 100 रुपये कमीशन लेते थे. रकम के लेन-देन का हिसाब रखने वाले दस्तावेज रोजाना नष्ट करने की बात भी जांच में सामने आई.
ट्रैवल एजेंसी और होटल बुकिंग से भी पैसे का हिसाब
जांच एजेंसी के मुताबिक, बेटिंग की रकम को केवल बैंक खातों और हवाला के जरिए ही नहीं घुमाया गया, बल्कि ट्रैवल एजेंसियों और होटल बुकिंग के जरिए भी हिसाब बराबर किया गया. भोपाल की रैपिड ट्रैवल्स एजेंसी का नाम इस सिलसिले में सामने आया. ईडी का आरोप है कि एजेंसी के जरिए पैनल संचालकों से नकदी ली जाती थी और उसके बदले दुबई में बैठे प्रमोटरों की यात्रा और होटल बुकिंग का खर्च समायोजित किया जाता था.
एजेंसी के रिकॉर्ड में कथित तौर पर 'MD Dubai' और 'MD Kenya' जैसे नामों से हिसाब दर्ज था. ईडी के मुताबिक, इस ट्रैवल कारोबार का सालाना टिकट कारोबार करीब 55 करोड़ रुपये था. जांच में एशिया की कुछ शेल कंपनियों को लगभग 300 करोड़ रुपये के फ्रेट भुगतान का भी उल्लेख है. एजेंसी को शक है कि इस तरह के लेन-देन का इस्तेमाल रकम के वास्तविक सोर्सऔर लाभार्थियों को छिपाने के लिए किया गया.
दुबई में लग्जरी विला, प्लॉट और अपार्टमेंट खरीदने के लिए भी बेटिंग से हुई कमाई का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है. कई संपत्तियां प्रमोटरों के सीधे नाम पर नहीं, बल्कि उनके सहयोगियों, रिश्तेदारों और कंपनियों के नाम पर खरीदी गईं. विदेशी कंपनियों के जरिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने के लिए एफपीआई का रास्ता भी अपनाया गया. ईडी का आरोप है कि कोलकाता में बनी कुछ शेल कंपनियों के जरिए भी शेयर बाजार में रकम लगाई गई.
200 करोड़ रुपये की शादी ने खोली नेटवर्क की परतें
सौरभ चंद्राकर की फरवरी 2023 में यूएई के रास अल खैमाह में हुई शादी इस पूरे मामले की जांच में एक अहम कड़ी बनी. ईडी के मुताबिक, इस शादी पर करीब 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए. परिवार के सदस्यों को नागपुर से यूएई ले जाने के लिए निजी विमान किराये पर लिए गए. शादी में सेलिब्रिटी कलाकारों को बुलाया गया और मुंबई से इवेंट मैनेजर, डांसर, डेकोरेटर तथा दूसरे आयोजकों को काम पर लगाया गया.
ईडी ने अपनी जांच में दावा किया कि शादी के आयोजन के लिए करीब 112 करोड़ रुपये हवाला के जरिए एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी तक पहुंचाए गए. होटल बुकिंग पर लगभग 42 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए. एजेंसी के मुताबिक, शादी के लिए अलग-अलग आयोजकों और सप्लायरों को भुगतान करने के लिए हवाला चैनलों का इस्तेमाल किया गया. इस मामले में इवेंट कंपनी आर-1 इवेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों की जांच की गई. एजेंसी ने आयोजकों के ठिकानों पर छापेमारी की और बाद में उनके बताए हवाला ऑपरेटरों के यहां भी कार्रवाई की. इन कार्रवाइयों में करीब 2.37 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की गई.
शादी के डिजिटल रिकॉर्ड, गेस्ट लिस्ट और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई. गेस्ट लिस्ट में अलग-अलग श्रेणियां जैसे टीम, बिजनेस और फ्रेंड्स बनाई गई थीं. ईडी को एक इवेंट कंपनी से शादी के खर्च की करीब 112.05 करोड़ रुपये की शीट और नकद भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड मिलने का दावा है. जांच में यह भी सामने आया कि शादी में आए लोगों और आयोजकों के भुगतान का हिसाब अलग-अलग माध्यमों से रखा गया था.
सितंबर 2022 में दुबई में एक बड़े आयोजन का भी जिक्र है. इसके बाद 18 सितंबर 2023 को दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में एक और बड़े कार्यक्रम की तैयारी की जा रही थी, लेकिन ईडी की कार्रवाई के बाद यह कार्यक्रम रद्द हो गया. जांच एजेंसी के मुताबिक, ऐसे आयोजनों का इस्तेमाल नेटवर्क की ब्रांडिंग, नए ग्राहकों और नए पैनल संचालकों को आकर्षित करने के लिए किया जाता था.
रवि उप्पल, सौरभ चंद्राकर का साथी और नेटवर्क का दूसरा बड़ा चेहरा
सौरभ चंद्राकर के साथ रवि उप्पल को इस नेटवर्क का मुख्य प्रमोटर और सह-नियंत्रक बताया गया है. ईडी के मुताबिक, दोनों दुबई में रहकर महादेव ऑनलाइन बुक का संचालन करते थे. रवि उप्पल पर आरोप है कि वह हवाला के जरिए करोड़ों रुपये भारत भेजने और अलग-अलग राज्यों में नेटवर्क चलाने वालों से संपर्क रखने का काम देखता था.
जांच में रवि उप्पल के जरिए दम्मानी बंधुओं तक रकम पहुंचाने और फिर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग लोगों को भुगतान किए जाने की बात सामने आई. एजेंसी का दावा है कि रवि उप्पल ने सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक संपर्कों तक पहुंच बनाने के लिए भी नेटवर्क तैयार किया था. उसके भाई रोहित और राहुल के नाम भी भारत में हवाला नेटवर्क से जुड़े होने के आरोपों में सामने आए हैं.
रवि उप्पल के खिलाफ भी इंटरपोल और प्रत्यर्पण से जुड़ी प्रक्रिया चली. ईडी ने जनवरी 2026 में उससे जुड़े करीब 21 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई की. वह फिलहाल दुबई में बताया गया है और उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अलग से चल रही है.
शुभम सोनी, विकास छपरिया और दूसरे सहयोगियों की भूमिका
ईडी की जांच शुभम सोनी उर्फ पिंटू को नेटवर्क के शीर्ष प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था से जुड़ा अहम व्यक्ति बताया गया है. आरोप है कि वह दुबई में रहकर नकदी पहुंचाने, भुगतान और दूसरे वित्तीय कामों को देखता था. जांच एजेंसी के मुताबिक, उसने नितीश दीवान को ट्रिनिटी सॉल्यूशंस एलएलसी नाम से कंपनी बनाने के निर्देश दिए थे. इस कंपनी का इस्तेमाल कर्मचारियों के वीजा और पैसे के लेन-देन से जुड़े कामों में किए जाने का आरोप है.
शुभम सोनी ने 2 नवंबर 2023 को ईडी को भेजे गए एक ईमेल में खुद को महादेव ऐप का प्रमोटर बताया था. ईडी के अनुसार, उसने इस ईमेल में दावा किया था कि बेटिंग पैनल सुचारू रूप से चलाने के लिए राजनीतिक पदाधिकारियों को नियमित रूप से कमीशन दिया जाता था. उसने करीब 508 करोड़ रुपये की कथित रकम तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पहुंचाने का दावा किया था और 'वर्मा जी' नाम के व्यक्ति को माध्यम बताया था. यह ईमेल और उससे जुड़े दस्तावेज जांच का हिस्सा हैं. इन दावों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि होना बाकी है.
विकास छपरिया को ईडी ने दुबई में नेटवर्क का वित्तीय प्रबंधक बताया है. वह पहले कोलकाता में कारोबार करता था और बाद में दुबई चला गया. एजेंसी का आरोप है कि वह हवाला के जरिए इवेंट आयोजकों और दूसरे सप्लायरों को भुगतान करता था. उसकी कंपनियों में परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट एलएलसी, टेकप्रो आईटी सॉल्यूशंस एलएलसी और एक्सिम जनरल ट्रेडिंग एफजेडसीओ के नाम सामने आए. ईडी ने सितंबर 2023 में उससे जुड़े करीब 236.3 करोड़ रुपये के सिक्योरिटीज फ्रीज किए थे और बैंक खातों में करीब 74.29 करोड़ रुपये अटैच किए जाने की कार्रवाई की थी. विकास छपरिया के पास भी वानुआतु का पासपोर्ट होने की बात जांच में सामने आई.
अनिल कुमार अग्रवाल उर्फ अतुल अग्रवाल को सौरभ चंद्राकर के बेटिंग आईडी और कारोबार से जुड़ा सहयोगी बताया गया है. वह एक्सिम कंपनी में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी से जुड़ा था. ईडी की जांच में जून 2023 में वर्साचे होटल में हुई एक जन्मदिन पार्टी का जिक्र है, जिस पर करीब चार से साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च होने का आरोप है. यह खर्च भी नेटवर्क से जुड़े सहयोगियों के जरिए किए जाने की बात कही गई है.
स्काईएक्सचेंज और हरि शंकर तिबरेवाल का नेटवर्क
महादेव ऐप के साथ-साथ स्काईएक्सचेंज नाम का बेटिंग प्लेटफॉर्म भी जांच एजेंसियों के रडार पर आया. ईडी ने हरि शंकर तिबरेवाल को स्काईएक्सचेंज का मालिक और महादेव नेटवर्क का महत्वपूर्ण सहयोगी बताया है. तिबरेवाल को 'हरि स्काई' के नाम से भी जाना जाता है. उसका जन्म 2 जून 1978 को कोलकाता में हुआ था और वह दुबई के बिजनेस बे इलाके में रहता था. जांच के मुताबिक, उसके पास वानुआतु का पासपोर्ट भी था, जो 3 जुलाई 2020 को जारी किया गया था.
ईडी का आरोप है कि तिबरेवाल ने स्काईएक्सचेंज के जरिए बेटिंग कारोबार चलाया और इसके लिए मास्टर आईडी तथा कैश पॉइंट का नेटवर्क तैयार किया. उसके सहयोगियों में प्रशांत बागरी, संदीप मोदी और कमल किशोर राठी के नाम सामने आए. नितिन तिबरेवाल को भी इस नेटवर्क से जुड़ा बताया गया है. जांच एजेंसी के मुताबिक, स्काईएक्सचेंज के कारोबार से करीब दो करोड़ रुपये प्रति महीने तक की रकम नितिन तिबरेवाल से जुड़ी गतिविधियों में आती थी.
28 फरवरी 2024 को ईडी ने स्काईएक्सचेंज से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान लैपटॉप और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए. एजेंसी का दावा है कि लैपटॉप में एक सप्ताह का बेटिंग मुनाफा करीब 22.68 करोड़ रुपये दिखाया गया था. उसमें सुपर एडमिन आईडी और कारोबार के हिसाब से जुड़े रिकॉर्ड भी मिले. कोलकाता पुलिस के 24 सितंबर 2020 के एक मामले में भी स्काईएक्सचेंज और उससे जुड़े लोगों का उल्लेख हुआ था. ईडी के मुताबिक, सूरज चोखानी ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि दुबई से हरि शंकर तिबरेवाल इस नेटवर्क की निगरानी करता था.
स्काईएक्सचेंज से हुई कमाई को वैध दिखाने के लिए विदेशी कंपनियों और भारतीय शेयर बाजार का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है. जांच में जेनिथ मल्टी ट्रेडिंग डीएमसीसी, प्लस कमोडिटीज डीएमसीसी, इकोटेक जनरल ट्रेडिंग एलएलसी, कैटरफील्ड ग्लोबल डीएमसीसी, जेई इम्पेक्स डीएमसीसी और टैनो इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज फंड जैसी कंपनियों के नाम सामने आए. ईडी का दावा है कि इन कंपनियों के जरिए भारतीय कंपनियों में शेयर खरीद, प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट, वारंट और ब्लॉक डील में पैसा लगाया गया.
जांच में अमित साराओगी का बयान भी अहम बताया गया है. उसके मुताबिक, करीब 350 करोड़ रुपये की बैंक एंट्री लगभग 1.25 प्रतिशत कमीशन पर कराई गई. ईडी ने दावा किया कि हरि शंकर तिबरेवाल की विदेशी कंपनियों पर वास्तविक नियंत्रण साबित करने के लिए कंपनी के केवाईसी दस्तावेज, लाभकारी मालिकाना हक की घोषणाएं, कर्मचारियों के नाम पर बने निदेशक पद और चैट रिकॉर्ड जुटाए गए. जेनिथ और प्लस कमोडिटीज से जुड़े दस्तावेजों में तिबरेवाल को लाभकारी मालिक बताया गया. मॉरीशस के वित्तीय नियामक से मिली जानकारी और सेबी के जरिए भेजे गए पत्र का भी जांच में इस्तेमाल किया गया.
ईडी के मुताबिक, तिबरेवाल से जुड़ी कंपनियों के जरिए विकास गर्ग और एराया लाइफस्पेसेज तक करीब 766 करोड़ रुपये पहुंचे. ईजी ट्रिप प्लानर्स में भी करीब 60 करोड़ रुपये निवेश किए जाने का आरोप है. इस निवेश में कंपनी के प्रमोटर निशांत पिट्टी और दुबई में मौजूद अमरदीप शर्मा की भूमिका की जांच की गई. तिबरेवाल से जुड़ी संपत्तियों पर ईडी ने अलग-अलग चरणों में कार्रवाई की. दिसंबर 2024 में करीब 388 करोड़ रुपये, जून 2026 में लगभग 941 करोड़ रुपये और सितंबर 2026 में करीब 207 करोड़ रुपये की संपत्तियों से जुड़ी कार्रवाई का उल्लेख है. अक्टूबर 2026 में जेनिथ के 1.10 करोड़ शेयर, जिनकी कीमत लगभग 93 करोड़ रुपये बताई गई, फ्रीज किए गए.
विकास गर्ग और एबिक्स सौदे में 940 करोड़ रुपये का कथित निवेश
महादेव नेटवर्क की जांच का एक बड़ा हिस्सा विकास गर्ग और अमेरिकी कंपनी एबिक्स इंक के अधिग्रहण से भी जुड़ गया. विकास गर्ग, नंद किशोर गर्ग के बेटे हैं और 15 जून 1973 को जन्मे थे. उनका पता पश्चिम पंजाबी बाग, दिल्ली बताया गया है. वे विकास समूह की कई कंपनियों से जुड़े हैं. इनमें एराया लाइफस्पेसेज, विकास लाइफकेयर, विकास इकोटेक, टीमो प्रोडक्शंस और अद्विक कैपिटल शामिल हैं. 2024 में एबिक्स के पुनर्गठित बोर्ड में भी उनकी भूमिका सामने आई.
ईडी ने विकास गर्ग को 14 जुलाई 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून यानी पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था. उन्हें 24 जुलाई तक ईडी की हिरासत में रखा गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. ईडी की पांचवीं पूरक शिकायत, जो 10 सितंबर 2026 को दाखिल की गई, में उन्हें आरोपी नंबर 75 बनाया गया.
जांच एजेंसी का आरोप है कि विकास गर्ग और हरि शंकर तिबरेवाल के बीच वित्तीय संबंध थे. तिबरेवाल से नियंत्रित विदेशी कंपनियों के जरिए एराया और विकास समूह तक रकम पहुंचाई गई. ईडी के मुताबिक, करीब 765.77 करोड़ रुपये विदेशी कंपनियों से अलग-अलग निवेश माध्यमों जैसे क्यूआईपी, एफपीआई, एफडीआई और बॉन्ड के जरिए आए. इसके अलावा करीब 175 करोड़ रुपये की बैंक एंट्री कथित तौर पर अमित साराओगी से जुड़े शेल खातों और सुनील भंडारी की कंपनियों के जरिए हुई. इस तरह विकास गर्ग, उनके परिवार और उनसे जुड़ी संस्थाओं के खातों तक कुल करीब 940.77 करोड़ रुपये पहुंचने का आरोप है.
इस जांच का दूसरा अहम हिस्सा अमेरिकी कंपनी एबिक्स इंक का अधिग्रहण है. एबिक्स इंक अमेरिका में दिवालिया प्रक्रिया यानी चैप्टर 11 से गुजर रही थी. 2024 में एराया लाइफस्पेसेज, विकास लाइफकेयर, रॉबिन रैना और वितस्ता सॉफ्टवेयर इंडिया के बीच एक कंसोर्टियम बनाया गया. 24 मई 2024 को हुए समझौते के तहत एबिक्स के अधिग्रहण के लिए करीब 200 मिलियन डॉलर की नेट कैश बोली की बात सामने आई. जून 2024 में अमेरिका में नीलामी की प्रक्रिया हुई.
ईडी ने 5 जून 2026 को इस मामले में करीब 941 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया. इसमें लगभग 893 करोड़ रुपये की एराया की एबिक्स में हिस्सेदारी और बाकी रकम में दिल्ली के फ्लैट, गोवा के सालिगांव स्थित मकान, नैनीताल की संपत्ति और समूह की दूसरी इकाइयों से जुड़ी संपत्तियां शामिल बताई गईं. ईडी का आरोप है कि अटैचमेंट के बाद विकास गर्ग ने अमेरिका के जॉन्स क्रीक, जॉर्जिया स्थित एबिक्स मुख्यालय को बेचने की कोशिश की. यह मुख्यालय 1 एबिक्स वे के पते पर है. एजेंसी ने अदालत में संपत्ति को बेचकर उसे जांच से दूर करने की कोशिश का आरोप लगाया है. इन आरोपों और अटैचमेंट पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक और वैधानिक प्रक्रिया में होना है.
महादेव से जुड़े दूसरे बेटिंग प्लेटफॉर्म
ईडी की जांच केवल महादेव ऑनलाइन बुक तक सीमित नहीं रही. एजेंसी के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े लोगों ने दूसरे बेटिंग प्लेटफॉर्मों में भी हिस्सेदारी और नियंत्रण हासिल किया. रेड्डी अन्ना को 2020 में अपने नेटवर्क में शामिल किए जाने और फेयरप्ले में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी होने की बात जांच में सामने आई. लोटस365 से जुड़े गिरिश तलरेजा और रतन लाल जैन उर्फ अमन के नाम भी सामने आए. ईडी के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर का इन प्लेटफॉर्मों से भी संबंध था.
सौरभ के भाई गितेश चंद्राकर पर महादेव के साथ अन्ना रेड्डी, लेजर बुक और अंबानी बुक जैसे प्लेटफॉर्मों की गतिविधियों में मदद करने का आरोप है. जांच एजेंसी का कहना है कि महादेव की वेबसाइटों को 5 नवंबर 2023 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने ब्लॉक किया था, लेकिन नेटवर्क ने नए डोमेन और दूसरे ब्रांड नामों से काम जारी रखा. पुराने पैनल, बैंक खाते और ऑपरेटर नए नामों के साथ इस्तेमाल किए जाते रहे. 2025 और 2026 में लोटस, रेड्डी अन्ना और फेयरप्ले से जुड़े नए मामलों की जांच भी इसी वजह से आगे बढ़ी. ईडी इसे लगातार जारी रहने वाला अपराध मानती है.
14 गिरफ्तारियां, किसकी क्या भूमिका?
ईडी ने अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें स्थानीय स्तर पर नेटवर्क चलाने वाले, हवाला ऑपरेटर, पुलिसकर्मी, वित्तीय प्रबंधक और बेटिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े लोग शामिल हैं.
सबसे पहले 22 अगस्त 2023 को चंद्रभूषण वर्मा और सतीश चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया. चंद्रभूषण वर्मा आरोपी नंबर चार था और उस पर नेटवर्क के लिए पुलिस तथा प्रशासनिक संपर्क बनाने का आरोप है. सतीश चंद्राकर आरोपी नंबर पांच था और उसके पास चार बेटिंग पैनल होने की बात सामने आई. दोनों को बाद में 23 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली.
23 अगस्त 2023 को अनिल कुमार दम्मानी और सुनील कुमार दम्मानी गिरफ्तार किए गए. दोनों पर हवाला के जरिए रकम पहुंचाने का आरोप है. अनिल दम्मानी को 23 अक्टूबर 2024 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से और सुनील दम्मानी को 3 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली.
3 नवंबर 2023 को भीम सिंह यादव और आसिम दास को गिरफ्तार किया गया. भीम सिंह यादव पुलिस कांस्टेबल था और उस पर नागपुर से नकदी लाने तथा नेटवर्क के लोगों के बीच रकम पहुंचाने का आरोप है. उसे 25 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली. आसिम दास पर दुबई से भारत लाकर नकदी पहुंचाने का आरोप था. उसके पास से करीब 5.39 करोड़ रुपये की नकदी मिलने की बात सामने आई. उसे 15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली.
12 जनवरी 2024 को नितिन तिबरेवाल और अमित अग्रवाल गिरफ्तार किए गए. नितिन पर स्काईएक्सचेंज और वित्तीय लेन-देन में भूमिका का आरोप है. उसे 23 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली. अमित अग्रवाल पर जमीन और संपत्ति में कथित तौर पर बेटिंग की रकम लगाने का आरोप है. उसे 28 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली.
15 फरवरी 2024 को नितीश दीवान गिरफ्तार हुआ. उसे दुबई में नेटवर्क का मैनेजर बताया गया है. उस पर कर्मचारियों के वीजा, कंपनी और पैसे से जुड़े काम देखने का आरोप है. उसे 23 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली.
2 मार्च 2024 को गिरिश तलरेजा गिरफ्तार हुआ. उसका नाम लोटस365 से जुड़ा है. उसे 28 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली. 3 मार्च 2024 को सूरज चोखानी गिरफ्तार हुआ. उस पर शेल कंपनियों और वित्तीय लेन-देन के जरिए रकम को छिपाने का आरोप है. उसे 23 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली.
6 दिसंबर 2024 को गोविंद कुमार केडिया को गिरफ्तार किया गया. उस पर करीब 43 करोड़ रुपये के निवेश और शेयर खरीद से जुड़े लेन-देन का आरोप है. उसे 7 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली. 24 जनवरी 2025 को संदीप फोगला गिरफ्तार हुआ. उस पर स्काईएक्सचेंज की आईडी और बैंक खातों में करीब 9.25 करोड़ रुपये की एंट्री से जुड़े आरोप हैं. उसे भी 7 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली.
आखिरी गिरफ्तारी 14 जुलाई 2026 को विकास गर्ग की हुई. उस पर करीब 940 करोड़ रुपये की रकम और एबिक्स अधिग्रहण से जुड़े लेन-देन में भूमिका का आरोप है. वह न्यायिक हिरासत में है.
चंद्रभूषण वर्मा और दम्मानी बंधुओं पर क्या आरोप?
ईडी की जांच में चंद्रभूषण वर्मा को नेटवर्क का मुख्य स्थानीय संपर्क अधिकारी बताया गया है. वह पुलिस विभाग में एएसआई था. एजेंसी का आरोप है कि उसने करीब ढाई साल में रवि उप्पल से लगभग 81 करोड़ रुपये इकट्ठा किए. इस रकम को अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने की बात कही गई. जांच के मुताबिक, वह अपने हिस्से की रकम को चावल के कारोबार और रिश्तेदारों से जुड़ी फर्मों के जरिए निवेश करता था.
सतीश चंद्राकर के पास चार बेटिंग पैनल थे. जांच एजेंसी के अनुसार, उसके पैनलों में कमाई का बंटवारा इस तरह होता था कि करीब 80 प्रतिशत हिस्सा पैनल मालिकों को, 15 प्रतिशत ऑपरेटर को और पांच प्रतिशत सतीश को मिलता था. उसके बयान में चार पैनलों और स्थानीय नेटवर्क की जानकारी दर्ज की गई है.
अनिल और सुनील दम्मानी पर हवाला के जरिए रकम पहुंचाने का आरोप है. दोनों रायपुर में श्री आभूषण ज्वेलर्स से जुड़े थे. ईडी के मुताबिक, उन्हें दो से तीन साल में करीब 60 से 65 करोड़ रुपये मिले. वे प्रति लाख रुपये पर लगभग 100 रुपये कमीशन लेते थे. जांच एजेंसी का दावा है कि लेन-देन का हिसाब रखने वाले दस्तावेज रोजाना नष्ट कर दिए जाते थे.
भीम सिंह यादव पर नागपुर से नकदी इकट्ठा करने और उसे दूसरे लोगों तक पहुंचाने का आरोप है. आसिम दास के मामले में ईडी ने दावा किया कि वह दुबई से भारत आया था. 2 नवंबर 2023 को रायपुर के ट्राइटन होटल के कमरे, एक वाहन और भिलाई स्थित घर से कुल मिलाकर करीब 5.39 करोड़ रुपये जब्त किए गए. एजेंसी के मुताबिक, आसिम को शुभम सोनी ने दुबई बुलाया था और भारत लौटकर नकदी पहुंचाने का निर्देश दिया था. उसके फोन से मिले वॉयस मैसेज और दूसरे डिजिटल सबूत भी जांच का हिस्सा बने.
राजनीतिक संरक्षण के आरोप और भूपेश बघेल का नाम
महादेव बेटिंग ऐप मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा छत्तीसगढ़ में कथित राजनीतिक संरक्षण से जुड़ा है. ईडी ने आरोप लगाया है कि इतने बड़े नेटवर्क को बिना राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के चलाना संभव नहीं था. एजेंसी के मुताबिक, बेटिंग नेटवर्क के लोग पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई को रोकने के लिए कथित तौर पर 'लायजनिंग मनी' देते थे.
ईडी ने 1 मार्च 2024 को पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत अपनी जांच से जुड़े निष्कर्ष राज्य की एजेंसी को भेजे थे. इसके बाद 4 मार्च 2024 को रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की. इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, बेटिंग नेटवर्क के प्रमोटरों और दूसरे लोगों के नाम शामिल किए गए. बाद में सीबीआई ने 18 दिसंबर 2024 को मामला दर्ज किया. सीबीआई ने 26 मार्च 2025 को भूपेश बघेल के घर की तलाशी भी ली. 24 जून 2026 को सीबीआई ने आसिम दास और पांच अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक व्यक्तियों से जुड़ी जांच आगे जारी रखी. ईडी ने 14 अगस्त 2026 को सीबीआई की एफआईआर के आधार पर अपनी आगे की जांच शुरू की.
ईडी की चार्जशीट में सतीश चंद्राकर के बयान का उल्लेख है. उसके मुताबिक, 2020 के बाद उसने चंद्रभूषण वर्मा के जरिए पुलिस से महादेव आईडी रखने वाले दो लोगों के खिलाफ छापेमारी करवाई थी. इसके बाद रवि उप्पल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा से मुलाकात की. आरोप है कि इस मुलाकात के बाद कार्रवाई रोकने की कोशिश हुई और रवि उप्पल ने सतीश को चार पैनल दिए.
ईडी के मुताबिक, रवि उप्पल से दम्मानी बंधुओं तक हर महीने हवाला की रकम पहुंचती थी. इसके बाद चंद्रभूषण वर्मा और दूसरे संपर्कों के जरिए रकम अलग-अलग लोगों तक पहुंचाई जाती थी. जांच में विनोद वर्मा के घर पर 23 अगस्त 2023 को हुई तलाशी का भी उल्लेख है. वहां से करीब 2.55 लाख रुपये नकद और 16.22 लाख रुपये की ज्वेलरी मिलने की बात कही गई.
सतीश चंद्राकर ने 22 अगस्त 2023 के बयान में कथित तौर पर 81 करोड़ रुपये के बंटवारे का एक हिसाब दिया था. उसके अनुसार, 20 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री निवास, 15 करोड़ रुपये विनोद वर्मा के बेटे के कारोबार, 36 करोड़ रुपये पुलिस अधिकारियों और 10 करोड़ रुपये कानून लागू कराने वाली एजेंसियों के नाम पर दिए जाने की बात कही गई. उसने यह भी दावा किया कि रवि उप्पल ने उसे बताया था कि मुख्यमंत्री निवास के नाम पर विनोद वर्मा को 65 करोड़ रुपये दिए गए. ये सभी बातें जांच एजेंसी द्वारा दर्ज बयानों पर आधारित आरोप हैं. इनकी सत्यता और किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का फैसला अदालत में होना है.
आसिम दास की गिरफ्तारी और चुनाव से पहले नकदी का मामला
2 नवंबर 2023 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से कुछ दिन पहले आसिम दास की गिरफ्तारी ने मामले को राजनीतिक रूप से और संवेदनशील बना दिया. ईडी ने रायपुर के ट्राइटन होटल के कमरे नंबर 311, एक वाहन और भिलाई स्थित घर से करीब 5.39 करोड़ रुपये जब्त किए थे.
ईडी के मुताबिक, आसिम दास ने 3 नवंबर 2023 को दिए बयान में बताया था कि शुभम सोनी ने उसे 25 अक्टूबर 2023 को दुबई बुलाया था. वहां उसे भारत लौटकर नकदी पहुंचाने के निर्देश दिए गए. 2 नवंबर को वह भारत लौटा. उसके लिए गाड़ी और होटल की बुकिंग की गई थी. करीब दोपहर 2 बजकर 15 मिनट पर पांच बैग गाड़ी में रखे गए और उसे आगे की डिलीवरी का इंतजार करने के लिए कहा गया.
ईडी ने दावा किया कि आसिम दास के फोन से एक वॉयस मैसेज मिला, जिसमें भारत में आठ से दस करोड़ रुपये लेकर 'बघेल' तक पहुंचाने की बात कही गई थी. एजेंसी ने कहा कि आसिम ने आवाज को शुभम सोनी की आवाज के रूप में पहचाना. इसी मामले में शुभम सोनी ने 2 नवंबर 2023 को ईडी को ईमेल भेजकर खुद को महादेव ऐप का प्रमोटर बताया और राजनीतिक पदाधिकारियों को कथित भुगतान का दावा किया. उसके ईमेल के साथ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से जुड़ा प्रमाणपत्र भी दिया गया था.
इस मामले में चंद्रभूषण वर्मा और सतीश चंद्राकर के बाद में दिए गए बयानों में अपने पहले बयानों को लेकर दबाव का दावा भी सामने आया. दोनों ने दिसंबर 2023 में कहा कि जेल जाने के बाद उन्हें दूसरे भवन में ले जाकर हाथ से रिट्रैक्शन आवेदन लिखवाए गए और उन पर ऊपर से आदेश होने की बात कही गई. आसिम दास ने भी 12 दिसंबर 2023 को अपने बयान में कहा कि एक व्यक्ति और वकील के प्रभाव में आकर उसने पहले से तैयार दस्तावेज को हाथ से लिखा था. ईडी ने इन बयानों और उनके रिट्रैक्शन दोनों को जांच का हिस्सा बनाया है. ऐसे बयानों की विश्वसनीयता और परिस्थितियों का निर्धारण अदालत करेगी.
ईडी की छापेमारी,190 ठिकानों पर कार्रवाई
महादेव नेटवर्क की जांच में ईडी ने अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार सहित कई राज्यों में करीब 190 ठिकानों पर तलाशी ली. इन कार्रवाइयों में नकदी, सोना, ज्वेलरी, बैंक बैलेंस, शेयर और डिमैट खातों से जुड़ी संपत्तियां जब्त या फ्रीज की गईं. एजेंसी के मुताबिक, कुल जब्त और फ्रीज की गई रकम करीब 2,014 करोड़ रुपये तक पहुंची.
21 अगस्त से 3 सितंबर 2023 के बीच 21 ठिकानों पर तलाशी हुई. इनमें नेटवर्क के स्थानीय संपर्कों, पैनल संचालकों, हवाला ऑपरेटरों, परिवार के सदस्यों और इवेंट कंपनियों से जुड़े लोग शामिल थे. 7 से 21 सितंबर 2023 के बीच 30 जगहों पर कार्रवाई की गई. इसमें दुबई में नकदी, शादी के आयोजकों, शेयर बाजार में निवेश करने वालों और दूसरे वित्तीय सहयोगियों से जुड़े ठिकाने शामिल थे. 8 सितंबर 2023 को मुंबई के मलाड में एक आंगड़िया के यहां भी तलाशी हुई.
3 से 17 अक्टूबर 2023 के बीच 25 पैनल संचालकों के ठिकानों पर छापे पड़े. 2 और 3 नवंबर 2023 को रायपुर और भिलाई में सात ठिकानों पर कार्रवाई हुई, जिनमें कथित नकदी पहुंचाने वालों और स्थानीय संपर्कों को निशाना बनाया गया. 28 और 29 फरवरी 2024 को स्काईएक्सचेंज और एफपीआई से जुड़े 20 ठिकानों पर तलाशी हुई. दिसंबर 2024 में स्काईएक्सचेंज और शेयर बाजार के ऑपरेटरों के सात ठिकानों पर कार्रवाई की गई.
16 अप्रैल और 10 मई 2025 को करीब 55 सूचीबद्ध कंपनियों और बाजार मध्यस्थों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी हुई. 2 जुलाई 2025 को चार ठिकानों पर फॉलो-अप कार्रवाई की गई. 13 मार्च 2026 को एक और फॉलो-अप तलाशी हुई. 30 मई 2026 को आठ बेटिंग ऐप प्रमोटरों और रेमिटेंस नेटवर्क से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की गई. 14 और 30 जुलाई 2026 को विकास गर्ग और उनकी कंपनियों से जुड़े पांच ठिकानों पर तलाशी ली गई.
अगस्त 2023 में चंद्राकर और रवि उप्पल के ज्ञात घरों पर भी तलाशी की गई थी, लेकिन दोनों वहां मौजूद नहीं मिले. भिलाई स्थित घर, ऑर्बिक फूड्स नाम की जूस फैक्ट्री और चंद्राकर के ससुराल पक्ष से जुड़े ठिकानों की भी जांच की गई.
सितंबर 2023 में 39 ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान करीब 417 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज किए जाने का दावा किया गया. इसमें लगभग 236.3 करोड़ रुपये की सिक्योरिटीज, गोविंद केडिया के डिमैट खातों में करीब 160 करोड़ रुपये, 2.37 करोड़ रुपये नकद और लगभग 13 करोड़ रुपये के सोने का उल्लेख है. 8 सितंबर 2023 को मुंबई के मलाड में एक आंगड़िया के यहां से 28.85 लाख रुपये जब्त किए गए. 16 अक्टूबर 2023 को पैनल ऑपरेटरों से करीब 59.5 लाख रुपये नकद मिलने की बात सामने आई. 2 नवंबर 2023 को आसिम दास के मामले में 5.39 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई.
ईडी की जांच में फरवरी 2024 में स्काईएक्सचेंज से जुड़े लैपटॉप और डिजिटल दस्तावेजों का महत्व सामने आया. अप्रैल और मई 2025 में शेयर बाजार और सूचीबद्ध कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच हुई. 30 मई 2026 को बेटिंग ऐप प्रमोटर के यहां से करीब 30 लाख रुपये नकद मिलने और बाद में 1.20 करोड़ रुपये सरेंडर किए जाने की बात भी जांच रिकॉर्ड में है. 30 जुलाई 2026 को विकास लाइफकेयर से जुड़े बोर्ड मिनट्स और कंपनी सचिव के बयान की जांच की गई.
दो हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच, बाजार मूल्य करीब 3,500 करोड़
ईडी ने महादेव बेटिंग नेटवर्क से जुड़े मामलों में अब तक 11 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए हैं. इनकी ऑर्डर वैल्यू 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है. एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों का मौजूदा फेयर मार्केट वैल्यू करीब 3,500 करोड़ रुपये तक है. इसमें लगभग 1,800 करोड़ रुपये की विदेशी संपत्तियां और करीब 1,700 करोड़ रुपये की भारतीय संपत्तियां शामिल बताई गई हैं. सात अटैचमेंट आदेशों की पुष्टि भी हो चुकी है.
दुबई में 22 अचल संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई की गई. इनमें से 12 संपत्तियां सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों से जुड़ी बताई गई हैं, जिनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,500 करोड़ रुपये है. मार्च 2026 में ईडी ने दुबई की 18 और दिल्ली की दो अचल संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया था. इन संपत्तियों का फेयर मार्केट वैल्यू करीब 1,700 करोड़ रुपये बताया गया. इनमें दुबई हिल्स एस्टेट, बिजनेस बे, एसएलएस होटल एंड रेजिडेंस और बुर्ज खलीफा में स्थित अपार्टमेंट शामिल थे. ये संपत्तियां चंद्राकर, विकास छपरिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन तिबरेवाल और सुरेंद्र बागरी जैसे सहयोगियों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर होने का आरोप है.
जनवरी 2026 में विकास छपरिया, परफेक्ट प्लान और एक्सिम से जुड़ी करीब 92 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई. इसी महीने रवि उप्पल और पैनल नेटवर्क से जुड़ी करीब 21 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई. गोविंद केडिया से जुड़े 10.250 किलोग्राम सोने की कीमत करीब 15 करोड़ रुपये बताई गई. दिसंबर 2024 में पैनल संचालकों, तलरेजा और तिबरेवाल से जुड़ी करीब 388 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया गया था. नवंबर 2023 में छपरिया और अतुल अरोड़ा से जुड़ी दुबई की करीब 99 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई थी.
सौरभ चंद्राकर की विदेश में संपत्ति और पासपोर्ट का मामला
ईडी की जांच के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर ने दुबई में कंपनियों और संपत्तियों के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत की थी. एक निवेश कंपनी के रिकॉर्ड में उसे शुरुआती शेयरधारक और निदेशक बताया गया. कंपनी की एक विला को उसका निवास भी घोषित किया गया था. एजेंसी का आरोप है कि उसने भारतीय पासपोर्ट रहते हुए 6 मई 2022 को वानुआतु का पासपोर्ट हासिल किया. बाद में उसने भारतीय नागरिकता छोड़ने का दावा किया, जिसे ईडी ने गलत बताया. भारतीय पासपोर्ट रद्द किए जाने और वानुआतु पासपोर्ट रद्द कराने की मांग से जुड़ी कार्रवाई भी की गई.
ईडी ने सौरभ चंद्राकर को पीएमएलए की धारा 50 के तहत 2 और 4 सितंबर 2023 को पूछताछ के लिए समन जारी किए थे, लेकिन वह पेश नहीं हुआ. 4 सितंबर 2023 को उसके खिलाफ खुला गैर-जमानती वारंट जारी हुआ. 20 अक्टूबर 2023 को दाखिल पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में उसे आरोपी नंबर एक बनाया गया. 8 नवंबर 2023 को इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया. नवंबर 2023 में उसके सहयोगियों के नाम पर दुबई में खरीदी गई संपत्तियों को अटैच किया गया. जनवरी 2024 में अदालत ने ईडी की शिकायत पर संज्ञान लिया.
अक्टूबर 2024 में यूएई को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ी. 6 नवंबर 2024 को उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराने के लिए आवेदन दाखिल किया गया. मार्च 2026 में दुबई और दिल्ली की संपत्तियों पर करीब 1,700 करोड़ रुपये के अटैचमेंट की कार्रवाई हुई. 18 जून 2026 को ओमान में उसे हिरासत में लिया गया. इसके बाद 8 जुलाई 2026 को मस्कट स्थित भारतीय दूतावास के जरिए ओमान के विदेश मंत्रालय को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा गया
वानुआतु पासपोर्ट और दुबई में बसे प्रमोटर
जांच में एक समान बात यह भी सामने आई कि महादेव नेटवर्क के कई प्रमुख लोगों के पास वानुआतु का पासपोर्ट था. इनमें सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, विकास छपरिया और हरि शंकर तिबरेवाल के नाम शामिल हैं. ईडी का आरोप है कि इन लोगों ने विदेशी नागरिकता या पासपोर्ट का इस्तेमाल भारत की जांच और कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए किया. एजेंसी ने इन पासपोर्टों और विदेश में बनाई गई कंपनियों के दस्तावेजों की जांच की.
दुबई में कई संपत्तियां सहयोगियों, रिश्तेदारों और कंपनियों के नाम पर खरीदी गईं. ईडी ने इन संपत्तियों के वास्तविक लाभकारी मालिकों का पता लगाने के लिए कंपनी केवाईसी, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल चैट, कर्मचारियों के बयान और यात्रा दस्तावेजों का सहारा लिया. जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोगों को केवल कागजों पर कंपनियों का निदेशक दिखाया गया था, जबकि वास्तविक नियंत्रण दुबई में बैठे प्रमोटरों के पास था.
ईडी ने इस मामले में केवल बैंक रिकॉर्ड या नकदी पर भरोसा नहीं किया. जांच एजेंसी ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, ईमेल, व्हाट्सऐप चैट, टेलीग्राम ग्रुप, कंपनी के दस्तावेज, यात्रा रिकॉर्ड, होटल बिल और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े रिकॉर्ड भी जुटाए. शादी की गेस्ट लिस्ट और खर्च की शीट, रैपिड ट्रैवल्स के लेजर, दुबई की विला के किराना बिल, स्काईएक्सचेंज का एक सप्ताह का मुनाफा दिखाने वाले लैपटॉप रिकॉर्ड और आसिम दास के फोन से मिले वॉयस मैसेज जांच के महत्वपूर्ण हिस्से बताए गए हैं.
शुभम सोनी का ईमेल, चंद्रभूषण वर्मा और सतीश चंद्राकर के बयान, आसिम दास का बयान और अलग-अलग कंपनियों के बैंक रिकॉर्ड के जरिए एजेंसी ने नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की. ईडी का कहना है कि जांच में सामने आए सबूतों से यह पता चलता है कि नेटवर्क केवल एक ऐप या वेबसाइट तक सीमित नहीं था, बल्कि उसके साथ पैनल ऑपरेटर, हवाला कारोबारी, ट्रैवल एजेंट, इवेंट मैनेजर, विदेशी कंपनियां और शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोग जुड़े हुए थे.
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने उससे पूछताछ करने का बड़ा मौका है. ईडी की शिकायत में उसे मुख्य प्रमोटर और लाभार्थी बताया गया है. सीबीआई के दो मामलों में भी वह आरोपी है. अब उससे बेटिंग नेटवर्क के संचालन, दुबई मुख्यालय, पैनल फ्रेंचाइजी, म्यूल बैंक खातों, हवाला चैनलों और विदेश में खरीदी गई संपत्तियों के बारे में पूछताछ हो सकती है.
जांच का एक बड़ा सवाल यह भी है कि नेटवर्क से हुई कमाई का अंतिम लाभ किस-किस को मिला. किसने कितनी रकम ली, किसके खाते में पैसा गया, किसने कंपनियां बनाईं और किसने कथित तौर पर सरकारी संरक्षण दिलाने में भूमिका निभाई.इन सवालों के जवाब जांच एजेंसियों को दस्तावेजों और बयानों के आधार पर अदालत में साबित करने होंगे.
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