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गांधी और वाजपेयी के AI अवतार... प्रधानमंत्री संग्रहालय में मिलेगा अनोखा अनुभव

दिल्ली के प्रधानमंत्री संग्रहालय में महात्मा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के AI आधारित 3D अवतार जल्द पेश किए जाएंगे, जो दर्शकों से बातचीत भी करेंगे।

गांधी और वाजपेयी के AI अवतार... प्रधानमंत्री संग्रहालय में मिलेगा अनोखा अनुभव
  • प्रधानमंत्री संग्रहालय में महात्मा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के AI आधारित 3D अवतार जल्द पेश किए जाएंगे
  • संग्रहालय में पहले वल्लभभाई पटेल और अब्दुल कलाम के AI अवतार दर्शकों को इंटरैक्टिव अनुभव प्रदान कर चुके हैं
  • AI आधारित होलोबॉक्स तकनीक से नेताओं के जीवन और विचारों को आधुनिक और इंटरैक्टिव तरीके से प्रस्तुत किया जाता है
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नई दिल्‍ली:

कैसा लगेगा, अगर आप महात्‍मा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी से 'रूबरू' हो पाएं? महात्‍मा गांधी आपसे बातें करें... ऐसा लगे कि वो आपके सामने ही खड़े हैं. दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय में आने वाले दिनों में दर्शकों को इतिहास से रूबरू कराने का एक नया और आधुनिक तरीका देखने को मिलेगा, जिसकी तैयारियां पूरी हो गई हैं. म्‍यूजियम में जल्द ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के AI बेस्‍ड  'हाइपर-रियलिस्टिक' 3D अवतार पेश किए जाएंगे, जिनसे दर्शक सीधे बातचीत भी कर सकेंगे. 

कब प्रोजेक्‍ट हो रहा पूरा

प्रधानमंत्री संग्रहालय के निदेशक अश्विनी लोहानी ने बताया कि यह प्रोजेक्‍ट लगभग पूरा होने की कगार पर है और इसे मई के अंत तक शुरू किए जाने की उम्‍मीद है. इससे पहले संग्रहालय में सरदार वल्लभभाई पटेल और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के AI अवतारों को दर्शकों से अच्छा रिस्‍पॉन्‍स मिला है. ऐसे में उम्‍मीद की जा रही है कि गांधी और वाजपेयी के AI अवतारों को भी लोग पसंद करेंगे. 

तकनीक से जुड़ता इतिहास

प्रधानमंत्री संग्रहालय में आधुनिक तकनीक के जरिए इतिहास को जीवंत बनाने की दिशा में लगातार काम हो रहा है. यहां AI बेस्‍ड ‘होलोबॉक्स' के जरिए नेताओं के जीवन और विचारों को इंटरैक्टिव तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है. साथ ही, दिव्‍यांग (दृष्टिबाधित) लोगों के लिए स्मार्ट ग्लास तकनीक विकसित की जा रही है, जो सामने मौजूद व्यक्ति या वस्तु का ऑडियो विवरण दे सकेगी.

हर रोज पहुंच रहे हजारों लोग 

संग्रहालय ने 14 अप्रैल को अपने चार साल पूरे किए. निदेशक के अनुसार, वर्ष 2025-26 में 6.4 लाख से अधिक लोग यहां आ चुके हैं और प्रतिदिन लगभग 1400-1500 आगंतुक पहुंच रहे हैं. यह संग्रहालय भारत के सभी प्रधानमंत्रियों की विरासत को संजोकर रखने वाला एक अनूठा संस्थान है. यहां आकर लोग तकनीक के जरिए इतिहास से रूबरू होते हैं. 

पुरानी विरासत और नई इमारत का संगम

यह संग्रहालय उस ऐतिहासिक इमारत में स्थित है, जो कभी जवाहरलाल नेहरू का निवास स्थान थी. इसके साथ ही 2022 में एक आधुनिक परिसर भी जोड़ा गया है, जहां सभी प्रधानमंत्रियों के जीवन और कार्यों को दर्शाने वाली गैलरी बनाई गई हैं. संग्रहालय में आने वाले लोग ‘वर्चुअल हेलीकॉप्टर राइड' का अनुभव भी ले सकते हैं, जिसमें अटल टनल और चेनाब ब्रिज जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को ऊपर से देखने का अनुभव मिलता है. इसके अलावा ‘सुरक्षा' गैलरी में भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत और अभियानों को प्रदर्शित किया गया है.

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हाल के महीनों में संग्रहालय परिसर में कैफेटेरिया और ‘फॉरेस्ट टेबल' नामक एक फाइन डाइनिंग रेस्टोरेंट भी शुरू किया गया है, जो आगंतुकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करता है. कुल मिलाकर, AI तकनीक के जरिए प्रधानमंत्री संग्रहालय अब इतिहास को केवल देखने ही नहीं, बल्कि महसूस करने और समझने का एक नया मंच बनता जा रहा है.

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