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This Article is From May 02, 2026

साढ़े तीन साल तक सिनेमाघरों में चली थी ये फिल्म, नेहरू और गांधी ने भी की थी तारीफ, बनी पहली हिंदी ब्लॉकबस्टर

रिलीज के बाद किस्मत का ऐसा जादू चला कि लोग महीनों नहीं. बल्कि सालों तक इसे देखते रहे. यही वजह है कि इसे हिंदी सिनेमा की पहली ब्लॉकबस्टर माना जाता है. जिसकी तारीफ महात्मा गांधी और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी की थी. 

साढ़े तीन साल तक सिनेमाघरों में चली थी ये फिल्म, नेहरू और गांधी ने भी की थी तारीफ, बनी पहली हिंदी ब्लॉकबस्टर
साढ़े तीन साल तक सिनेमाघरों में चली थी ये फिल्म

बॉलीवुड के इतिहास में कई फिल्में आईं और गईं, लेकिन कुछ ऐसी भी रहीं जिन्होंने वक्त को पीछे छोड़ दिया और सिने इतिहास में एक तारीख के तौर पर दर्ज हो गईं. 1943 में, जब दुनिया दूसरे वर्ल्ड वॉर की आग में झुलस रही थी और भारत आजादी की लड़ाई लड़ रहा था. उसी दौर में ऐसी ही एक फिल्म आई. जो सिर्फ एक एंटरटेनमेंट का जरिया नहीं थी बल्कि उस समय के माहौल पर बनी एक फिल्म थी. जिसके किरदार और कहानी हमेशा के लिए अमर भी हुए. रिलीज के बाद इस फिल्म का ऐसा जादू चला कि लोग महीनों नहीं. बल्कि सालों तक इसे देखते रहे. यही वजह है कि इसे हिंदी सिनेमा की पहली ब्लॉकबस्टर माना जाता है. जिसकी तारीफ महात्मा गांधी और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी की थी. 

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2 लाख का बजट, 1 करोड़ की कमाई

इस फिल्म का नाम था किस्मत. बॉम्बे टॉकीज के बैनर तले बनी ‘किस्मत' को ज्ञान मुखर्जी ने डायरेक्ट किया था. फिल्म का बजट महज 2 लाख रुपए बताया जाता है. लेकिन कमाई के मामले में इसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक. फिल्म ने करीब 1 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया. जो उस दौर में बेहद बड़ी रकम थी. अशोक कुमार और मुमताज शांति स्टारर ये फिल्म रिलीज के बाद लगातार साढ़े तीन साल तक सिनेमाघरों में चलती रही. कोलकाता के रॉक्सी सिनेमा में ये 187 हफ्तों तक लगी रही. एक ऐसा रिकॉर्ड, जो पूरे 32 सालों तक कोई फिल्म नहीं तोड़ पाई. इस फिल्म ने अशोक कुमार को हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार बना दिया.

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अलग कहानी और देशभक्ति ने जीता दिल

‘किस्मत' की कामयाबी के पीछे थी उस दौर के हिसाब से फिल्म की दमदार कहानी. और, उस कहानी के किरदारों को जस्टिफाई करने वाले कलाकार. उस दौर में जहां पारंपरिक कहानियां चलती थीं. वहीं इस फिल्म में एक एंटी-हीरो को दिखाया गया. जो दर्शकों के लिए बिल्कुल नया था. साथ ही फिल्म में एक अनमैरिड लड़की के प्रेग्नेंट होने जैसे संवेदनशील विषय को भी दिखाया गया. जो उस समय काफी साहसिक माना गया था. फिल्म का गाना ‘दूर हटो ऐ दुनिया वालों, हिंदुस्तान हमारा है' देशभक्ति का प्रतीक भी बन गया. ब्रिटिश शासन के दौरान इस गाने ने लोगों में जोश भर दिया. यही वजह रही कि फिल्म को न सिर्फ आम दर्शकों ने पसंद किया बल्कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने भी फिल्म की खुलकर तारीफ की. 

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