Sonam Wangchuk Hunger strike: सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल का 19 दिन हो गए हैं और उनकी तबीयत को लेकर काफी लोगों में चिंता है. दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इसमें दखल देते हुए दिल्ली सरकार को उनके स्वास्थ्य को लेकर हिदायत दी है. सोनम वांगचुक 'कॉकरोच जनता पार्टी' के उस आंदोलन का हिस्सा हैं, जो इस पार्टी ने नीट (NEET Exam) और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य धांधलियों को लेकर शुरू किया गया है. ये शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहते हैं और सोनम वांगचुक इसी को लेकर भूख हड़ताल पर हैं.
सोनम वांगचुक से मिलने क्यों नहीं गए राहुल गांधी?
राजनीतिक दल जिसमें समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना और आम आदमी पार्टी ने सोनम वांगचुक के इस भूख हड़ताल का समर्थन किया है और इन दलों के नेता जंतर मंतर पर जा भी चुके हैं. वामपंथी दल भी इस आंदोलन के समर्थन में खुल कर सामने आ चुकी है. मगर अब कांग्रेस से सवाल किया जा रहा है कि राहुल गांधी इस आंदोलन से दूर क्यों हैं? हालांकि, कांग्रेस नेता शशि थरूर जरूर एक खत सोनम वांगचुक को लिख चुके हैं, जिसमें उन्होंने शुरू में ही लिखा है कि वो ये खत एक सांसद या नेता के रूप में नहीं लिख रहे हैं, बल्कि आपके साथ जो हो रहा है उससे व्यथित हो कर लिख रहे हैं. शशि थरूर ने वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की है. जबकि कांग्रेस के संगठन महासचिव वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर लिखा है- 'हम उनकी पीड़ा और आक्रोश को साझा करते हैं जो वांगचुक महसूस करते हैं. हम उनसे अनशन समाप्त करने की अपील करते हैं. उनकी चिंताएं हमारी चिंताएं हैं और बाकी विपक्षी दलों की भी. आप आश्वस्त रहें, हम मोदी सरकार का विरोध जारी रखेंगे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते रहेंगे.'

कांग्रेस पार्टी को क्या डर!
कांग्रेस के नेता निजी बातचीत में कहते हैं कि राहुल गांधी पहले से ही छात्रों की लड़ाई लड़ते आए हैं और उन्होंने इसी विषय पर कोटा राजस्थान में छात्रों से संवाद भी किया है और अगला संवाद देहरादून में शुक्रवार को होने जा रहा है. इसके बाद प्रयागराज और पटना में भी इसी तरह का कार्यक्रम होगा. मगर कांग्रेस का असली डर पिछले बार जंतर मंतर पर हुए अन्ना आंदोलन की यादों से लेकर है. अन्ना आंदोलन से जली कांग्रेस इस जंतर मंतर आंदोलन पर भी फूंक-फूंककर प्रतिक्रिया दे रही है. कांग्रेस को लगता है कि इस आंदोलन से जो भी सरकार विरोधी माहौल बनेगा उसका फायदा कहीं क्रॉकरोच जनता पार्टी ना ले जाए.

सोनम वांगचुक पर कांग्रेस को नहीं भरोसा?
कांग्रेस के नेता मानते हैं कि इस आंदोलन के पीछे आम आदमी पार्टी है और ऐसे किसी अनशन में कांग्रेस को कोई शिरकत नहीं करनी चाहिए. कांग्रेस के नेता यह भी कहते हैं कि सोनम वांगचुक का इतिहास है कि वो कभी भी अपने रुख पर कायम नहीं रहे हैं. पहले वह मोदी सरकार की कई बार प्रशंसा भी कर चुके हैं. यही हाल क्रॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक का रहा है. वहीं जो लोग ये मानते हैं कि राहुल गांधी को जंतर मंतर जाना चाहिए उनका कहना है कि अब राहुल गांधी केवल कांग्रेस के नेता नहीं हैं और वे लोकसभा में नेता विपक्ष भी हैं. इसलिए उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे इस अनशन का साथ दें.
'कांग्रेस ने 10वें दिन तुड़वा दी थी अन्ना की भूख हड़ताल'
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार में कुछ तो संवेदनशीलता होनी चाहिए. पवन खेड़ा ने अन्ना हजारे के अंदोलन की याद दिलाते हुए कहा, 'हमारी सरकार में जब अन्ना हजारे जनलोकपाल बिल के लिए अनशन पर बैठे थे, तब चौथे दिन हमारे नेता उनसे मिलने पहुंच गए थे. हमने उनसे जनलोकपाल बिल का ड्राफ्ट बनाने के लिए कहा था और 10वें दिन अनशन तुड़वा दिया था. लेकिन आज सोनम वांगचुक को अनशन पर बैठे 10 दिन से ज्यादा हो गए हैं, सरकार में कोई पूछने वाला नहीं है.

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सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल को लेकर बहस तो चलती रहेगी, मगर कांग्रेस अब इन मुद्दों को लेकर सोमवार से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी में जुटी है, जिसमें उसके बाकी विपक्षी दलों का भी साथ मिल रहा है.
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