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'92 गवाह मुकरे तो निष्पक्ष सुनवाई कैसे हुई?', सोहराबुद्दीन केस में बरी आरोपियों और CBI को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा 22 आरोपियों को बरी करने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने CBI और सभी बरी लोगों को नोटिस जारी किया है.

'92 गवाह मुकरे तो निष्पक्ष सुनवाई कैसे हुई?', सोहराबुद्दीन केस में बरी आरोपियों और CBI को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया था. (File Photo)
  • सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और बरी किए लोगों को नोटिस जारी किया है.
  • आरोप है कि 2005 में गैंगस्टर सोहराबुद्दीन और पत्नी कौसर बी को फर्जी एनकाउंटर में मारा गया.
  • CBI कोर्ट ने दिसंबर 2018 में सबूतों के अभाव में 22 आरोपियों को बरी किया था.
नई दिल्ली:

सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में 21 पुलिसकर्मियों सहित 22 आरोपियों को बरी करने के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई हुई. अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने CBI और हाई कोर्ट से बरी किए गए 22 आरोपियों को नोटिस जारी किया है. 28 अक्टूबर को इस मामले पर अगली सुनवाई होगी. सोहराबुद्दीन शेख के भाई रूबाबुद्दीन शेख ने बाम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

कोर्ट ने क्या कहा?

92 गवाहों के मुकरने पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. सीजेआई ने का, "वह कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों की जांच करना चाहते हैं. पूरे रिकॉर्ड को तलब नहीं किया जा रहा है, बल्कि संबंधित पक्ष 3-4 ऐसे गवाहों के बयान पेश करें, जिन्हें वे सबसे अहम मानते हैं. कोर्ट आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले की जांच करेगी. हालांकि, आदेश के एक हिस्से, विशेष रूप से पैराग्राम 43 की समीक्षा अदालत नहीं करेगी.

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने 92 गवाहों के मुकरने को गंभीर चिंता का विषय बताया. उन्होंने कहा कि यह भी विचारणीय है कि मामले में निष्पक्ष और न्यायपूर्ण सुनवाई हुई थी या नहीं.

CJI ने कहा कि अदालत इस मामले में सीमित रिकॉर्ड के आधार पर अहम पहलुओं की जांच करेगी और सभी दस्तावेजों को तलब करने की बजाय जरूरी गवाहों के बयानों पर ध्यान देगी.

पिछले साल हाई कोर्ट ने दिखाई थी हरी झंडी

7 मई 2026 को बाम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था. बाम्बे हाईकोर्ट कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा कुल 22 आरोपियों की रिहाई को सही ठहराया है. आरोप है कि साल 2005 में गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख और पत्नी कौसर बी को फर्जी एनकाउंटर मे पुलिस ने मार दिया था. CBI कोर्ट ने दिसंबर 2018 में सबूतो के अभाव मे आरोपियों को बरी कर दिया था.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि सोहराबुद्दीन शेख और कौसर बी का अपहरण गुजरात और राजस्थान पुलिस ने किया था, और वे फर्जी एनकाउंटर की साजिश का मकसद भी साबित नहीं कर पाए.

ये भी पढ़ें: सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस: 22 आरोपियों को बरी किए जाने को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, HC ने किया था इनकार

हाई कोर्ट ने कहा कि इस आधार पर यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि मुकदमे की सुनवाई ठीक से नहीं हो रही थी, भले ही अभियोजन पक्ष के 92 गवाह मुकर गए हों.

स्पेशल ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस मामला पेश नहीं कर पाया, जिससे यह लगे कि सोहराबुद्दीन और दूसरों की हत्या की कोई साजिश रची गई थी और इसमें मौजूदा आरोपियों की कोई भूमिका थी. अप्रैल 2019 में शेख के भाइयों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी.

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