- सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस में 22 आरोपियों को मुंबई की विशेष CBI अदालत ने दिसंबर 2018 में बरी किया था
- बॉम्बे हाईकोर्ट ने विशेष CBI अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपियों की बरी की अपीलें खारिज कर दीं
- सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी एनकाउंटर में मौत हुई थी
सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस में 22 आरोपियों को बरी किए जाने को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. यह अर्जी सोहराबुद्दीन शेख के छोटे भाई नायाबुद्दीन शेख ने दाखिल की है. 2005 में सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति का एनकाउंटर हो गया था. इस कांड तब से ही चर्चित रहा है और इसे लेकर सवाल उठते रहे हैं. याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें अदालत ने 22 आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया था. बरी किए गए 22 आरोपियों में गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के 21 पुलिसकर्मी शामिल हैं.
इस मामले में आरोप था कि 2005 में सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति को हैदराबाद से महाराष्ट्र जा रही बस से पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर अगवा किया था. इसके बाद सोहराबुद्दीन की अहमदाबाद के पास एक कथित एनकाउंटर में मौत हुई, जबकि उनकी पत्नी कौसर बी की तीन दिन बाद मौत हो गई. तुलसीराम प्रजापति को 2006 में गुजरात-राजस्थान सीमा पर एक अन्य कथित एनकाउंटर में मार दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच गुजरात CID से हटाकर CBI को सौंपने का निर्देश दिया था.
इसके साथ ही मुकदमे को गुजरात से मुंबई ट्रांसफर किया गया. तुलसीराम प्रजापति की कथित एनकाउंटर में मौत का मामला भी सोहराबुद्दीन मामले के साथ जोड़ दिया गया था. कुल 210 गवाहों में से 92 गवाह अपने बयान से मुकर गए थे. दिसंबर 2018 में मुंबई की विशेष CBI अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था. अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष सोहराबुद्दीन और अन्य की हत्या की साजिश को ठोस रूप से साबित करने में विफल रहा. फिर 2019 में विशेष CBI अदालत के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी. हाल में हाईकोर्ट ने इन अपीलों को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन का मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और परिस्थितियों की कड़ी में 'कई टूटे हुए लिंक' थे. अदालत ने माना कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि सोहराबुद्दीन और कौसर बी को पुलिस ने अगवा किया था या कथित फर्जी एनकाउंटर के पीछे कोई मकसद था. अदालत ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में गवाहों का मुकर जाना अपने आप में यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि मुकदमा सही तरीके से नहीं चलाया गया. इसके अलावा, कथित एनकाउंटर के पीछे किसी राजनेता-पुलिस गठजोड़ को साबित करने वाला भी कोई सबूत नहीं मिला. अब नायाबुद्दीन शेख ने बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
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