- अयोध्या राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ संचालन और प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी ट्रस्ट के पास होती है.
- 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का गठन में कुल 15 सदस्य होते हैं.
- चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के 3 पद खाली हो गए है. जानिए इस पूरे ट्रस्ट व इसके सदस्यों को.
Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच सवालों के घेरे में वो ट्रस्ट है, जो अयोध्या राम मंदिर की पूरी व्यवस्था को देखता है. शुक्रवार को इस ट्रस्ट के दो अहम सदस्य महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इन दो सदस्यों के इस्तीफे के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों की घटकर अब 12 हो गई है. ये 12 सदस्य कौन हैं? अयोध्या राम मंदिर का संचालन देखने वाले 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का संचालन कैसे होता है? ट्रस्ट के सदस्यों में किसके पास क्या जिम्मेदारी है, आइए जानते हैं...
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
5 फरवरी 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या राम मंदिर के निर्माण और संचालन के लिए ट्रस्ट बनाने की जानकारी लोकसभा में दी थी. पीएम मोदी की घोषणा के अनुरुप ही 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का गठन हुआ. जिसमें कुल 15 सदस्य होते है.
अयोध्या राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी इस ट्रस्ट के पास होती है. यह बोर्ड एक 'कॉर्पोरेट गवर्निंग बॉडी' है, जहां प्रशासनिक, वित्तीय और धार्मिक जिम्मेदारियां अलग-अलग पदाधिकारियों में बंटी हैं.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तीन पद अभी खाली
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार अभी इस ट्रस्ट के कुल 14 सदस्य हैं. हालांकि इन 14 सदस्यों में हाल ही में इस्तीफा देने वाले चंपत राय और अनिल मिश्र भी शामिल है. यदि दोनों को हटा दिया जाए तो 15 सदस्यीय ट्रस्ट के तीन पद खाली हो चुके हैं. फरवरी 2025 में कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद ट्रस्ट में खाली हुए एक पद पर कृष्णमोहन को सदस्य बनाया गया था, लेकिन अयोध्या राजपरिवार के वंशज विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन से खाली हुआ पद अभी तक भरा नहीं गया है.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य.
Photo Credit: राम मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य
1. के. परासरन: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वेबसाइट पर ट्रस्ट मेंबर की लिस्ट में सबसे पहला नाम के. परासरन का ही है. के. परासरन सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम अधिवक्ता है, जिन्होंने अदालत में 'रामलला विराजमान' का पक्ष रखा था. ट्रस्ट की कानूनी रणनीतियों और संवैधानिक मामलों में इनका मार्गदर्शन अहम होता है. के. परासरन अभी 92 साल के हो चुके हैं. राम मंदिर के करीब 500 साल पुराने कानूने लड़ाई को समाप्त कराने में इनकी भूमिका अहम मानी जाती है.
2. जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वेबसाइट पर ट्रस्ट मेंबर की लिस्ट में दूसरा नाम स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज का है. वह बद्रीनाथ में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं. उनका पहले का नाम सोमनाथ द्विवेदी था और वह इलाहाबाद में श्री ज्योतिष संस्कृत महाविद्यालय में वेदांत विभाग के प्रमुख थे. लंबी मुकदमेबाजी के बाद स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज के नाम के आगे शंकराचार्य लगा. ज्योतिष पीठ के पीठाधीश्वर श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें शंकराचार्य की उपाधि दिए जाने का विरोध किया था.
3. जगद्गुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज (पेजावर मठ, उडुपी): स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज कर्नाटक के उडुपी में स्थित आठ 'अष्ट मठों' में से एक, श्री पेजावर अधोक्षज मठ के मौजूदा प्रमुख (मठाधीश) हैं. 1964 में जन्मे विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज उडुपी के पूर्णा प्रज्ञा इवनिंग कॉलेज से ग्रेजुएट हैं.
4. युगपुरुष परमानंद गिरी जी महाराज (हरिद्वार): युगपुरुष परमानंद गिरी जी महाराज एक आध्यात्मिक गुरु हैं, जिन्हें 'कर्म योगी' और 'ज्ञानी योगी' के तौर पर पहचाना जाता है. उन्हें 'युग पुरुष' और मौजूदा युग के विश्व गुरु के रूप में मान्यता मिली है. उन्होंने साल 2000 में संयुक्त राष्ट्र में आध्यात्मिक गुरुओं के 'वर्ल्ड मिलेनियम पीस समिट' को संबोधित किया था और 150 से ज़्यादा किताबें लिखी हैं.

राम मंदिर में अन्य लोगों के साथ कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी जी महाराज.
5. स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज (कोषाध्यक्ष): ये ट्रस्ट के वित्तीय मामलों (फाइनेंस) के प्रमुख हैं. मंदिर को मिलने वाले दान, चढ़ावे का लेखा-जोखा और ट्रस्ट के बैंक खातों की पूरी निगरानी रखना इनकी मुख्य जिम्मेदारी है. इनका जन्म 1949 में महाराष्ट्र के एक गांव में हुआ था. पहले ये आचार्य किशोरजी मदनगोपाल व्यास के नाम से जाने जाते थे. शुरुआती पढ़ाई और फिलॉसफी में बैचलर डिग्री पूरी करने के बाद वे वेदों, उपनिषदों और प्राचीन भारत के दूसरे धर्मग्रंथों की गहरी पढ़ाई के लिए वाराणसी गए. 2006 में हरिद्वार में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि से 'परमहंस संन्यास' की दीक्षा लेने के बाद वे गोविंद देव गिरि महाराज के नाम से जाने जाने लगे.
6. डॉ. अनिल मिश्र: अयोध्या के प्रसिद्ध होम्योपैथिक डॉक्टर और आरएसएस के वरिष्ठ कार्यकर्ता है. राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बाद इन्होंने अपने इस्तीफे की पेशकश की है. पेशे से होम्योपैथिक डॉक्टर रहे मिश्रा ने 2019 में रिटायर होने से पहले सुल्तानपुर और गोंडा ज़िलों में होम्योपैथिक मेडिकल ऑफ़िसर के तौर पर काम किया. उनका RSS के साथ भी लंबे समय से जुड़ाव रहा है और वे ट्रस्ट के सीनियर सदस्य हैं.

7. कृष्णमोहनः यूपी के हरदोई जिले के रहने वाले कृष्ण मोहन महाराष्ट्र कैडर के रिटायर्ड इंडियन फॉरेस्ट सर्विस ऑफ़िसर हैं. नागपुर में पोस्टिंग के दौरान वे RSS से जुड़े और 2012 में रिटायरमेंट के बाद से ही समाज सेवा के कामों में लगे रहे. ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद, सितंबर 2025 में उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया. अभी राम मंदिर दान चोरी विवाद में कृष्णमोहन ने ही FIR दर्ज कराई है. जिसके बाद 8 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
कामेश्वर चौपाल: बिहार से दलित समुदाय के प्रतिनिधि, जिन्होंने 1989 के शिलान्यास में पहली ईंट रखी थी. हालांकि इनका निधन हो जाने के बाद से उनका पद खाली है. इनके निधन के बाद ही कृष्णमोहन को ट्रस्ट में शामिल किया गया था.
8. महंत नृत्य गोपाल दास (अध्यक्ष): ये ट्रस्ट के सर्वोच्च अध्यक्ष हैं. इनका मुख्य कार्य धार्मिक मार्गदर्शन, संतों से जुड़े निर्णय और ट्रस्ट के सभी नीतिगत फैसलों का नेतृत्व करना है. वह श्री राम जन्म भूमि न्यास और श्री कृष्ण जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष हैं. वह श्री मणिराम दास छावनी के छठे पीठाधीश्वर होने के साथ-साथ अयोध्या के सबसे बड़े मंदिर, श्री मणि राम दास की छावनी (छोटी छावनी) के आध्यात्मिक प्राधिकारी भी हैं. 1938 में बृजभूमि में जन्मे, उन्होंने 1953 में अयोध्या का रुख किया.

9. चंपत राय (महासचिव): ये ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की तरह काम करते हैं. भूमि अधिग्रहण, दैनिक प्रशासनिक कार्य, मीडिया ब्रीफिंग और कानूनी व्यवस्था देखना इनकी मुख्य जिम्मेदारी है. राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े विवाद की जांच के बीच इन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है. चंपत राय उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के ASM डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफ़ेसर रहे हैं. राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत से ही इस आंदोलन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे. राम मंदिर आंदोलन के दौरान अलग-अलग जेलों में डेढ़ साल बिताने के बाद उन्होंने एकेडमिक्स (अध्यापन) से इस्तीफ़ा दे दिया और अपना समय विश्व हिंदू परिषद (VHP) को समर्पित कर दिया. वे अभी विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष भी हैं.
10. महंत दिनेन्द्र दास जी महाराज: वे अयोध्या के निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो राम मंदिर मामले में पक्षकारों में से एक था. उनसे पहले महंत भास्कर दास इस पद पर थे, जिनका 2017 में निधन हो गया.
11. प्रशांत लोखंडे: AGMUT कैडर के 2001 बैच के IAS अधिकारी लोखंडे, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के नए चेयरपर्सन हैं, जिन्हें इस साल की शुरुआत में नियुक्त किया गया था. इससे पहले, लोखंडे गृह मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे थे. वे ट्रस्ट में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि और पदेन सदस्य हैं.
12. संजय प्रसाद: बिहार कैडर के 1995 बैच के IAS अधिकारी प्रसाद, अभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं. वह ट्रस्ट में UP सरकार के प्रतिनिधि और पदेन सदस्य हैं.
13. शंशाक त्रिपाठी: उत्तर प्रदेश के 2016 बैच के IAS अधिकारी त्रिपाठी ने IIT कानपुर से पढ़ाई की है. वे अभी अयोध्या में कलेक्टर हैं और पिछले साल जनवरी से इस साल अप्रैल तक बाराबंकी में DM और कलेक्टर रह चुके हैं. उन्होंने 2022 से 2025 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्पेशल सेक्रेटरी के तौर पर भी काम किया है. अयोध्या जिलाधिकारी होने के नाते शंशाक त्रिपाठी इस ट्रस्ट में शामिल हैं.

14. नृपेन्द्र मिश्रा (भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष): भारत के पूर्व प्रधान सचिव नृपेन्द्र मिश्रा राम मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख हैं. मंदिर के तकनीकी पहलुओं, निर्माण कार्य की गति, डिजाइन और निर्माण से जुड़े सभी कार्यों की देखरेख इन्हीं के जिम्मे है. उत्तर प्रदेश कैडर के 1967 बैच के इस IAS अधिकारी ने 2014 से 2019 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव के तौर पर काम किया. वे मुलायम सिंह यादव के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उनके प्रधान सचिव थे और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (TRAI) के प्रमुख भी रह चुके हैं. उन्हें 2021 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था. वे ट्रस्ट के पदेन सदस्य हैं.
15. विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र: अयोध्या राजवंश परिवार के वंशज विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का 2025 में निधन हो गया. उसके बाद से उनकी जगह ट्रस्ट में अभी खाली ही है. निधन से पहले तक वो अयोध्या के मौजूदा राजा के रूप में चर्चित थे. अयोध्या के लोग उन्हें राजा साहब कहा करते थे. विमलेंद्र मिश्र अयोध्या रामायण मेला संरक्षक समिति के सदस्य और समाजसेवी हैं. मोदी सरकार ने उन्हें राम मंदिर का ट्रस्टी नियुक्त किया था.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 11 सदस्यों के पास वोटिंग का अधिकार होता है, जबकि सरकारी अधिकारियों के पास वोटिंग का अधिकार नहीं होता.

रिक्त पदों को भरने का अधिकार ट्रस्टियों कोः आलोक कुमार
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार से जब राम मंदिर ट्रस्ट के रिक्त पदों को भरने से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह ट्रस्टियों के अधिकार क्षेत्र में आता है. उन्होंने कहा, “ट्रस्ट डीड के अनुसार रिक्त पदों को भरने का अधिकार ट्रस्टियों को है. यह उनका निर्णय है, हमारा नहीं.'
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