मराठा योद्धा शिवाजी द्वारा इस्तेमाल किए गए 'वाघ-नख' (बाघ के पंजे) को लंदन से वापस लाया गया है और इसे शुक्रवार से महाराष्ट्र के सतारा जिले में प्रदर्शित किया जाएगा. बाघ के ये पंजे ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि माना जाता है कि इनका उपयोग शिवाजी ने 1659 में बीजापुर सल्तनत के जनरल अफजल खान के खिलाफ अपनी प्रसिद्ध लड़ाई के दौरान किया था. अब 'वाघ-नख' पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.
"बाघ के पंजे असली नहीं"
छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति शाहू महाराज पर अपने व्यापक रिसर्च के लिए जाने जाने वाले इंद्रजीत ने दावा किया है कि बाघ के पंजे असली नहीं हैं और महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस तरह के 'स्टंट' लोगों को 'बेवकूफ' बनाने के समान हैं. उन्होंने दावा किया कि असली बाघ के पंजे पहले से ही महाराष्ट्र के सतारा जिले में मौजूद हैं.
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पूर्व शिवसेना (यूबीटी) मंत्री आदित्य ठाकरे ने पहले पंजे की विश्वसनीयता के बारे में इसी तरह की चिंता जताई थी. शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भी संदेह व्यक्त किया है और जांच की मांग की है.
उन्होंने जोर देकर कहा, "असली होने का दावा करते हुए लाए गए पंजे हमें आश्वस्त नहीं कर रहे हैं. अब, इतिहासकार इंद्रजीत सावंत भी उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं.
आरोपों का जवाब देते हुए, महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा, "किसी ने भी यह दावा नहीं किया है कि लंदन से लाए जा रहे 'वाघ नख' या बाघ के पंजे का इस्तेमाल छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा किया गया था."
उन्होंने अत्यधिक खर्चों के दावों का भी खंडन किया और स्पष्ट किया कि यात्रा और समझौते की औपचारिकताओं पर कुल मिलाकर 14.08 लाख रुपये खर्च किए गए.
महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार के अनुसार, 'वाघ नख' प्राप्त हो गया है और इसे छत्रपति शिवाजी संग्रहालय (संग्रहालय) में प्रदर्शित किया जाएगा, जिसे आम लोग देख सकते हैं और इस पर गर्व कर सकते हैं. लंदन में विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय के साथ एक समझौते के अनुसार, बाघ के पंजे तीन साल तक महाराष्ट्र में रहेंगे.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं