इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद सोनिया गांधी के साथ ममता बनर्जी और राहुल गांधी की अभिषेक बनर्जी के साथ मुलाकात को लेकर अलग-अलग तरह की खबरें आने लगी थीं. कहा जाने लगा था कि तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी का विलय होगा.हालांकि अगले ही दिन कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने सार्वजनिक मंच से इस तरह की खबरों का खंडन कर दिया और ये कहा गया कि ये सब सिर्फ अफवाह है. मगर इसके बाद महाराष्ट्र से कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद पवार (NCP-S) गुट के बीच विलय की बातें भी होने लगी.
महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी का दौर जारी
ये चर्चा शुरू हुई सबसे पहले शिवसेना के सांसद संजय राउत के बयान से. राउत ने कहा कि शरद पवार को उन सभी दलों को इकट्ठा करना चाहिए जो कांग्रेस से टूट कर अलग हुए हैं. उसके बाद महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता नाना पटोले का बयान आया कि धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के बीच ऐसी भावना बन रही है कि उनको कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी में मिल जाना चाहिए, जिसमें तृणमूल कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी भी है. पटोले ने आगे कहा कि इस तरह का प्रस्ताव बहुत पहले शरद पवार की तरफ से आया था. मगर बात आगे नहीं बढ़ पाई.जब इस बारे में एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जब बारिश होगी तो छाता खोला जाएगा अभी मैं छाता क्यों खोलूं जब बारिश ही नहीं हो रही है.
अजित पवार की पार्टी का NCP (S) में होना था विलय
महाराष्ट्र के कुछ नेताओं से बातचीत करके यह लगता है कि आज नहीं तो कल शरद पवार को यह तय करना पड़ेगा कि उनको अपनी पार्टी का क्या करना है.शरद पवार की पार्टी के लोकसभा में 8 और राज्यसभा में 1 सांसद हैं जबकि महाराष्ट्र विधानसभा में उनके पास 10 विधायक हैं.शरद पवार की पार्टी का पहले अजित पवार की पार्टी में विलय होना था मगर अजित पवार के निधन के बाद यह मामला अटक गया और अब सुनेत्रा पवार किसी विलय के पक्ष में नहीं है.
जब कांग्रेस से अलग हो गए थे शरद पवार
दूसरी ओर शरद पवार और सोनिया गांधी के रिश्ते हमेशा से अच्छे रहे भले ही शरद पवार ने विदेशी मूल का सवाल उठा कर 1999 में कांग्रेस से अलग हो गए थे. मगर 2004 और 2009 में यूपीए सरकार में मंत्री रहे यही नहीं जिस साल शरद पवार कांग्रेस से अलग हुए. उसी साल महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी ने बीजेपी शिवसेना को रोकने के लिए मिलकर सरकार बनाई और विलास राव देशमुख मुख्यमंत्री बने थे.कहने का मतलब ये है कि कांग्रेस और शरद पवार कभी दूर थे ही नहीं,दोनों बीजेपी के खिलाफ ही लड़ते रहे. शरद पवार ने 50 साल से ऊपर के अपने राजनीतिक सफर में कभी बीजेपी से हाथ नहीं मिलाया. यहां तक कि बीजेपी को महाराष्ट्र में रोकने के लिए महाविकास आघाडी बना कर उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनवा दिया.
विपक्ष में केंद्र में फिर कांग्रेस बड़ी पार्टी
यही वजह है कि अब दोनों के एक होने की.जबकि ममता बनर्जी बीजेपी के साथ जा चुकी है केन्द्र में मंत्री भी रह चुकी है तो जगन मोहन रेड्डी की पार्टी लोकसभा और राज्यसभा में परोक्ष रूप से बीजेपी को सर्मथन देती रही है मगर शरद पवार की पार्टी ने ऐसा कभी नहीं किया यही वजह है कि कांग्रेस और पवार की पार्टी के एक होने को लेकर इतनी अटकलें चल रहीं हैं.फैसला शरद पवार और सुप्रिया सुले को करना है क्योंकि महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार अपने को असली एनसीपी कहती है और उनके पास सत्ता भी है.देखना होगा शरद पवार की एनसीपी अपनी छतरी कब खोलती है क्योंकि सुप्रिया सुले ने कहा है जब बारिश नहीं हो रही है तो अभी छतरी क्यों खोलूं.
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