कांग्रेस सांसद शशि थरूर और उनके बेटे ईशान थरूर के बीच एक्स पर बूमर्स को लेकर नई बहस छिड़ गई है. शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर का कहना है कि व्हाट्सएप पर 'बूमर्स' यानी पुरानी पीढ़ी के लोगों पर बैन लगा देना चाहिए. इस पर शशि थरूर ने जवाब देते हुए कहा कि भारतीय लोगों हर पीढ़ी बूमर्स की कैटेगरी में आती है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला कानून पास किया है और ऐसा करने वाला वह यूरोपियन यूनियन का पहला देश बन गया है.
इस मामले पर Zoho के चीफ साइंटिस्ट श्रीधर बेम्बु ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "भारत को भी छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगानी चाहिए. मेरा मानना है कि छोटे बच्चों को असली किताबें पढ़नी चाहिए, धूप में मिट्टी के साथ खेलना चाहिए और सोशल मीडिया से दूर रहना चाहिए."

श्रीधर की पोस्ट को रीशेयर करते हुए ईशान थरूर ने इसमें अपनी तरफ से एक और ओपिनियन जोड़ दिया. उन्होंने लिखा, "मैं मानता हूं कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया पर बिल्कुल नहीं होना चाहिए. लेकिन कुछ और करने से पहले, भारत को व्हाट्सएप पर 'बूमर्स' यानी पुरानी पीढ़ी के लोगों पर रोक लगाने की जरूरत है."

बेटे ईशान की इस बात का जवाब देते हुए शशि थरूर ने कहा, "मेरे बेटे, हमारे बच्चे पैदा करने के तरीकों को देखते हुए पश्चिम के उलट, भारतीयों की हर पीढ़ी, तुम्हारी पीढ़ी भी, बेबी बूमर्स की कैटेगरी में आती है."
Given our reproductive patterns, my son, unlike in the West, every generation of Indians, including yours, qualifies as [baby]Boomers! https://t.co/wpCgTXHsMb
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) July 26, 2026
सोशल मीडिया पर एक के बाद एक किए गए पोस्ट के बाद इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई और यूजर्स कमेंट बॉक्स में लोग अपनी राय दे रहे हैं.
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फ्रांस का नया कानून क्या है?
फ्रांस की संसद ने जनवरी 2027 से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाले कानून को मंज़ूरी दे दी है. ऐसा करने वाला वह पहला यूरोपीय देश बन गया है, जिसने युवाओं को इन प्लेफॉर्म से दूर रखने का फैसला किया है.
इस कानून के तहत फ्रांस में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए हर किसी को अपनी उम्र वेरिफाई करनी होगी. यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है, जब UK और EU भी बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर चिंताओं के चलते अपने-अपने नियम बना रहे हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस कदम का स्वागत किया है. उन्होंने अपने दफ्तर के दस साल पूरे होने पर इसे लागू करने का वादा किया था.
हालांकि, कुछ लोगों ने इस कानून के व्यावहारिक होने पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि उम्र की जांच करने वाले ऑनलाइन टूल असरदार और सुरक्षित हैं. मंगलवार को फ्रांस की सीनेट और नेशनल असेंबली, दोनों ने इस प्रतिबंध को मंजूरी दे दी. वहीं, दूसरी तरफ वामपंथी खेमे के कुछ लोगों ने इसकी आलोचना की थी.
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