
खगोलविदों ने ब्रह्मांड की पहली मंदाकिनी के बनने की शुरुआत के समय यानी 12-13 अरब वर्ष पहले की हमारी आकाशगंगा के शुरुआती तारों के समूहों का पता लगाकर उन्हें ‘शक्ति' एवं ‘शिव' नाम दिया है. एक नए अनुसंधान से यह जानकारी मिली है. खगोल वैज्ञानिकों ने कहा कि अनुसंधान के निष्कर्ष से पता चलता है कि तारों के ये शुरुआती समूह आज के समय के बड़े शहरों के आकार के समान थे.
वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि आकाशगंगा छोटी मंदाकिनियों के विलय से बनी, जिससे तारों के बड़े समूहों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ था.
उन्होंने बताया कि जब मंदाकिनियों के बीच टक्कर हुई और वे आपस में मिल गईं, तो ज्यादातर तारों ने बहुत बुनियादी विशेषताएं बनाए रखीं और इसका सीधे तौर पर उनकी मूल मंदाकिनी की गति एवं दिशा से संबंध है.
अध्ययन की सह-लेखिका ख्याति मल्हान ने इन दो संरचनाओं को ‘शक्ति' और ‘शिव' नाम दिया. वैज्ञानिकों ने पाया कि एक समान तारे ‘शक्ति' और ‘शिव' का निर्माण करते हैं तथा दो विभिन्न मंदाकिनियों से आते हैं. उनकी कोणीय गति आकाशगंगा के बीच स्थित तारों की तुलना में अधिक है.
उन्होंने कहा कि इन सभी तारों में धातु की मात्रा कम है, जिससे संकेत मिलता है कि वे काफी समय पहले निर्मित हुए होंगे जबकि हाल में निर्मित तारों में भारी धातु के तत्व अधिक होते हैं.
अध्ययन के सह-लेखक हैंस-वाल्टर रिक्स ने कहा कि ‘शक्ति' और ‘शिव' आकाशगंगा के बीचोंबीच जुड़ने वाले तारों के दो प्रथम समूह रहे होंगे.
खगोलविदों ने अपने विश्लेषण के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एक उपग्रह द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटा का उपयोग किया.