मुस्कान और साहिल को आज मौत की सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने मुस्कान और साहिल पर सौरभ की हत्या के आरोपों को सही पाया और ये सजा सुनाई.
जब से ये केस सामने आया नीले ड्रम का मतलब बदल गया था. सोशल मीडिया से लेकर आम बातचीत में नीले ड्रम का सामान्य मतलब से अलग ही मतलब निकाला जाने लगा. सोशल मीडिया पर इसको लेकर मीम बने. कुछ खबरें भी आईं कि फलां ने अपनी पत्नी का उसके बॉयफ्रेंड से विवाह करा दिया क्योंकि उसे नीले ड्रम का डर सता रहा था. दुखद लेकिन ये नीला ड्रम हंसने हंसाने का टूल भी बन गया था.
बुधवार को जब कोर्ट ने मुस्कान और उसके कथित ब्रॉयफ्रेंड साहिल को फांसी की सजा सुनाई तो एक बार फिर कानून का इकबाल बुलंद हुआ और ये संदेश भी गया कि कानून अपने हिसाब से काम करेगा. इसमें देर सबेर होगी लेकिन इंसाफ मिलेगा जरूर. नीला ड्रम कोई हंसी मजाक की चीज नहीं हो सकती. अपराध का यही अंजाम होगा, जो मुस्कान का हुआ है.
उसके घर वालों ने त्याग दिया, बुरा करेंगे तो बुरा ही होगा. सौरभ राजपूत की हत्या के दो हफ्ते बाद जब खुलासा हुआ कि उसकी हत्या मुस्कान ने साहिल के साथ मिलकर की है, तो मुस्कान के माता-पिता ने यही कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी बेटी को सख्त से सख्त सजा मिले.

जिस दिन मुस्कान और साहिल गिरफ्तार हुए, उसी दिन NDTV ने रस्तोगी परिवार से बात की. मुस्कान की मां कविता रस्तोगी ने कहा था, 'उसने हमसे कहा- मम्मी हमने सौरभ को मार दिया है.'
उन्होंने बताया था कि सौरभ, मुस्कान के प्यार में अंधा था. हमारी बेटी ही 'समस्या' थी. रस्तोगी परिवार शुरू से ही सौरभ के परिवार के साथ था. उन्होंने कहा था, 'सौरभ के परिवार को न्याय मिलना चाहिए. सौरभ ने सबकुछ दांव पर लगा दिया था. अपने माता-पिता और करोड़ों की संपत्ति छोड़ दी थी और उसने उसे मरवा दिया. वह भी हमारा बेटा ही था.'
मुस्कान के माता-पिता ने उसी वक्त कहा था कि 'उसे फांसी की सजा होनी चाहिए. उसने जीने का अधिकार खो दिया है.'

19 मार्च 2025 से ही मुस्कान और साहिल जेल में बंद हैं. इस दौरान मुस्कान ने कई बार अपने माता-पिता और 7 साल की बेटी से मिलना चाहा. लेकिन माता-पिता ने उससे मुलाकात तक नहीं की.
इतना ही नहीं, बुधवार सुबह ही कोर्ट में मुस्कान के माता-पिता ने लिखित में कहा कि 'सौरभ बहुत अच्छा लड़का था. उसकी बेरहमी से हत्या हुई. अगर उनको फांसी की सजा हो तो हम विरोध नहीं करेंगे. हमारा अब इनसे कोई लेना-देना नहीं है.'
सौरभ की हत्या के लगभग डेढ़ साल बाद बुधवार को कोर्ट ने मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई. यह सिर्फ सजा नहीं है, बल्कि एक संदेश भी है. सौरभ राजपूत हत्याकांड के बाद 'नीला ड्रम' एक प्रतीक बन गया था, लेकिन हो सकता है कि यह सजा अब उस प्रतीक को ही बदल दे. अब 'नीला ड्रम' नहीं, बल्कि 'फांसी' इस हत्याकांड का प्रतीक बनना चाहिए. इस सजा से समाज को यह संदेश मिला है कि बुरा किया है तो बुरा ही होगा.
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