उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा का चुनाव होना है. उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी यह चुनाव मिलकर लड़ें. दोनों दलों ने इसके लिए किसी औपचारिक समझौते का ऐलान अभी तक नहीं किया है. कांग्रेस ने 175 से अधिक सीटों की सूची सपा को सौंपी है, जहां से वह चुनाव लड़ना चाहती है. वहीं सपा ने कांग्रेस से उन उम्मीदवारों की सूची मांग रही है, जो जीत सकने की स्थिति में हों. दोनों दलों में सीट बंटवारे को लेकर जोर-आजमाइश जारी है. इससे पहले दोनों दलों ने 2017 में गठबंधन करके चुनाव लड़ा था. लेकिन इस गठबंधन को कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली थी. आइए देखते हैं कि उत्तर प्रदेश के पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस और सपा का प्रदर्शन कैसा रहा है.
उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस का सफर
हम पिछले तीन विधानसभा चुनावों की बात करते हैं. सबसे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव की बात करते हैं. यह चुनाव बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सरकार में हुए थे. इस चुनाव में सपा और कांग्रेस में कोई समझौता नहीं हुआ था. इस चुनाव में सपा ने 403 में से 401 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा था. उसे 224 सीटों पर जीत मिली थी. उसे कुल वैध मतदान का 29.13 फीसद मत मिले थे. वहीं अगर इस चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन देखें तो उसने 355 सीटों पर चुनाव लड़ा था. उसे 28 सीटों पर सफलता मिली थी. वहीं अगर वोट फीसद देखें तो कांग्रेस को कुल 11.65 फीसद वोट मिले थे.
इस चुनाव के बाद सपा ने प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनाई थी.

सपा और कांग्रेस ने 2017 का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था, लेकिन यह गठबंधन जीत नहीं पाया था.
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इसके बाद 2017 के चुनाव के लिए सपा ने कांग्रेस से हाथ मिलाया था. समझौते के मुताबिक सपा को 298 और कांग्रेस को 105 सीटों पर चुनाव लड़ना था. लेकिन सपा ने 311 और कांग्रेस ने 114 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए थे. कुछ सीटों पर दोनों दलों में फ्रैंडली फाइट हुई थी. चुनाव परिणाम आया तो सपा 311 में से केवल 47 सीटें ही जीतने में कामयाब रही. उसे 21.82 फीसद वोट मिले. वहीं इस चुनाव में कांग्रेस 114 में से केवल सात सीटें ही जीत पाई थी. वह 29 सीटों पर अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई थी. कांग्रेस को 6.25 फीसदी वोट मिले थे. इस चुनाव के बाद ही बीजेपी ने पहली बार प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई.
साल 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस में कोई समझौता नहीं हुआ. इस चुनाव के लिए सपा ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और राष्ट्रीय लोकदल से हाथ मिलाया था.लेकिन कांग्रेस का किसी से समझौता नहीं हुआ. सपा ने 347 और कांग्रेस 399 सीटों पर चुनाव लड़ा. जब चुनाव परिणाम आया तो 111 सीटें जीतने में कामयाब रही. उसे कुल पड़े वोटों में से 32.06 फीसद वोट मिले. वहीं कांग्रेस के हिस्से में केवल दो सीटें ही आई थीं. उसका वोट भी घटकर 2.36 फीसद रह गया था. इस चुनाव के बाद बीजेपी ने प्रदेश में लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई.

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लोकसभा चुनावों में कैसा रहा है सपा-कांग्रेस का प्रदर्शन
पिछले करीब 10 सालों में लोकसभा के दो चुनाव भी हुए हैं. इनमें से 2019 के चुनाव के लिए दोनों दलों ने कोई समझौता नहीं किया था. सपा ने इस चुनाव के लिए बसपा से समझौता किया था. चुनाव नतीजों में सपा के हिस्से में पांच और बसपा के हिस्से में 10 सीटें आई थीं. वहीं कांग्रेस के हिस्से में केवल एक सीट ही आई थी. कांग्रेस ने 80 में से 67 सीटों पर चुनाव लड़ा था. उसे केवल एक रायबरेली सीट पर ही सफलता मिल पाई थी. इसी चुनाव में अमेठी में राहुल गांधी को हार का सामना करना पड़ा था. कांग्रेस को 6.36 फीसद वोट मिले थे. वहीं सपा पांच सीटें ही जीत पाई थी. उसे 18.11 फीसद वोट मिले थे.
इसके बाद सपा और कांग्रेस ने 2024 का चुनाव मिलकर लड़ा था. समाजवादी पार्टी ने 62 सीटों पर चुनाव लड़कर और 37 सीटों पर जीत दर्ज की. उसे 33.84 फीसद वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस ने 17 सीटों पर चुनाव लड़कर छह पर जीत दर्ज की थी. कांग्रेस को 9.53 फीसद वोट मिले थे.
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