पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी इतिहास बनाने की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है. पश्चिम बंगाल में आज 294 में से 293 सीटों पर मतगणना हो रही है. बहुमत का आंकड़ा 148 है और शुरुआती रुझानों में बीजेपी बड़ी आसानी से पूर्ण बहुमत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है. बीजेपी ने वर्ष 2011 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भी सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी थी लेकिन अंतिम परिणाम टीएमसी के पक्ष में और पार्टी ने 177 सीटें जीतकर अपनी सत्ता बचा ली. हालांकि इस चुनाव में बीजेपी प्रदेश में पहली बार मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई. बीजेपी ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए 77 सीटें जीतीं. लेकिन इस बार के चुनाव में बीजेपी तृणमूल कांग्रेस को आखिरकार सत्ता से बाहर करने के करीब है. आइए समझें कि इस बार वो 5 क्या बड़ी वजह रहीं जिन्होंने बीजेपी को बढ़त पाने में मदद की.
1 - सत्ता विरोधी लहर
तृणमूल कांग्रेस वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई थी. ममता बनर्जी ने वाम दलों के मजबूत किले को ध्वस्त कर इतिहास रच दिया था. लेकिन टीएमसी को सत्ता में रहते हुए 15 साल हो गए हैं. ऐसे में ममता सरकार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर पड़ रहा था.
2 - बीजेपी का बढ़ता जनाधार
बीजेपी पिछले 10 वर्षों में हाशिए की पार्टी की जगह एक मजबूत विरोधी पार्टी में बदलती गई. राज्य में 2016 के चुनाव में बीजेपी ने 10% वोट पाए थे. लेकिन 2021 के चुनाव मे उनके वोट बढ़कर 38% हो गए. पार्टी ने पिछले चुनाव में 77 सीटें जीती थीं. 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 39% वोट हासिल किए थे.

Photo Credit: IANS
3 - TMC के खिलाफ नाराजगी
ममता बनर्जी अभी भी पश्चिम बंगाल की एक लोकप्रिय नेता हैं लेकिन बीजेपी ने ममता सरकार को बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और गवर्नेंस के मुद्दे पर आक्रामक तरीके से घेरा. इससे ऐसे वोटर बीजेपी को लेकर आकर्षित हुए जो कुछ निश्चित तय नहीं कर पा रहे थे.
4 - भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा
तृणमूल सरकार को पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार के कई बड़े मामलों का सामना करना पड़ा है. इनमें स्कूल टीचर भर्ती घोटाला, राशन घोटा जैसे बड़े मामले हुए जिनकी जांच केंद्रीय एजेंसियों ने की. पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी जैसे पार्टी के कई बड़े नेताओं की गिरफ्तारी से पार्टी की छवि को झटका लगा और जनता में नाराजगी बढ़ी.
5 - महिला सुरक्षा का मुद्दा
आरजी कर हॉस्पिटल में महिला डॉक्टर के साथ रेप और संदेशखाली जैसे कई बड़े मुद्दों के जरिए विपक्ष ने टीएमसी को घेरा और प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया.

Photo Credit: PTI
6 - घुसपैठियों के खिलाफ वोट
पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा एक बहुत पुराना मुद्दा रहा है. विपक्ष ने इसे लेकर ममता बनर्जी पर कड़े प्रहार किए और आरोप लगाया कि उनकी सरकार घुसपैठियों से सहानुभूति रखती है और उनकी वजह से ही जीतती रही है. बीजेपी ने साथ ही वादा किया कि वह सत्ता में आई तो घुसपैठियों की समस्या को दूर कर देगी.
7 - SIR का फायदा मिला
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट संशोधन का SIR का अभियान चलाया गया जो एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी बन गया. इस बार इस अभियान के बाद लाखों वोटरों के नाम कट गए. इनमें ज्यादातर मुस्लिम वोटर थे जो टीएमसी के समर्थक माने जाते थे.
8 - हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण
इस बार पश्चिम बंगाल के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने हिंदू वोटरों को संगठित करने के लिए जमकर प्रयास किया. बीजेपी ने यह नैरेटिव चलाया कि टीएमसी मुसलमानों के साथ सहानुभूति रखती है और एकमात्र बीजेपी ही इसपर रोक लगा सकती है. बीजेपी की ओर से पीएम मोदी, अमित शाह और राज्य के प्रमुख बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी समेत तमाम बड़े नेता खुलकर इस तरह के दावे करते रहे कि टीएमसी मुसलमानों की समर्थक पार्टी है और ममता सरकार हिंदू वोटरों के साथ भेदभाव करती है.

Photo Credit: IANS
9 - ब्रांड मोदी का बड़ा असर
पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सामने नेतृत्व की बड़ी चुनौती रही थी. टीएमसी की ओर से ममता बनर्जी का राजनीतिक कद बहुत भारी पड़ता है क्योंकि वह पिछले कई दशकों से प्रदेश की राजनीति पर हावी रही हैं और महिलाओं के साथ मुस्लिम मतदाताओं के बीच भी उनकी लोकप्रियता रही है. लेकिन बीजेपी ने ममता बनर्जी की मजबूत छवि के सामने ब्रांड मोदी को खड़ा कर दिया जो चुनावों में बीजेपी के लिए तुरुप का पत्ता साबित होता रहा है. इस बार पश्चिम बंगाल में भी इसका प्रभाव दिखाई दिया.
10 - PM मोदी की गारंटी चली
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछली बार भी विधानसभा चुनाव में आक्रामकता से प्रचार किया था. इस बार भी बंगाल चुनाव में पीएम मोदी काफी सक्रिय रहे. अपनी रैलियों में तृणमूल सरकार पर लगातार हमले करने के साथ पीएम मोदी ने एक और जबरदस्त वादा किया. उन्होंने वादा किया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की डबल इंजन सरकार राज्य का कायापलट कर देगी. उन्होंने खास तौर पर महिला वोटरों को साधने का प्रयास किया और कहा कि सरकार बनते ही महिलाओं को हर महीने सीधे उनके बैंक खाते में 3,000 रुपये भेजे जाएंगे.
ये भी पढ़ें-: बंगाल में बीजेपी की जीत के 5 नायक जिन्होंने राज्य में ढहा दिया ममता बनर्जी का किला
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं