पश्चिम बंगाल में कमल खिलने के बाद बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश के बीजेपी कार्यकर्ताओं में 'जश्न' सा माहौल है. रूझानों के मुताबिक, बीजेपी को 200 के करीब सीटें मिलती दिख रही हैं. जबकि टीएमसी 100 से भी कम सिमटों पर सिमट गई है. पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों में बंगाल के परिणाम भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद खास है. साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने जबरदस्त चुनाव प्रचार किया था, लेकिन बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई. इस बार हार के अंतर को पाटने के लिए बीजेपी ने खास रणनीति बनाई. ना सिर्फ बंगाल के नेता, बल्कि हिंदी पट्टी के नेताओं के सहारे भी चुनावी अभियान को गति दी.
झालमुड़ी से लेकर बोटिंग तक, मोदी का ग्राउंड कनेक्ट
बंगाल को साधने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 रैलियां और तीन रोड शो किए. टीएमसी के 'बंगाल अस्मिता' वाले नैरेटिव के बीच पीएम मोदी ने 'झालमुड़ी' और हुगली नदी में बोटिंग के जरिए कोशिश की. चुनाव प्रचार के बीच आस्था के प्रमुख केंद्रों पर भी पहुंचे. कोलकाता के सबसे पुराने मंदिर थंथानिया कालीबाड़ी, मतुआ ठाकुरबाड़ी, दक्षिणेश्वर काली मंदिर और बेलूर मठ में भी मत्था टेका.

बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी. (फाइल फोटो)
TMC को किले में सेंधमारी के लिए अमित शाह का फॉर्मूला
बीजेपी ने 'परिवर्तन यात्रा' तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ ना केवल एक बड़ा जनसंपर्क अभियान छेड़ा, बल्कि एंटी इनकंबेंसी का माहौल तैयार भी किया. भारतीय जनता पार्टी ने भ्रष्टाचार, घुसपैठ और कुशासन के मुद्दों पर ममता सरकार को घेरते हुए राज्य में सत्ता परिवर्तन की अपील की. केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी में 5,000 किमी लंबी यात्रा राज्य के कोने-कोने तक पहुंची. खास बात यह रही कि इस अभियान का पूरा मैनेजमेंट केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथों में था. चुनावी वॉर रूम और कंट्रोल रूम को संभालने के साथ ही हर जनसभा और रोड़ शो के बाद खुद फीडबैक भी जुटा रहे थे.
सुनील बंसल-भूपेंद्र यादव की जोड़ी ने खेला कर दिया!
बीजेपी की इस जीत में पर्दे के पीछे के भी 2 नायक हैं- सुनील बंसल और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव. टीएमसी से मुकाबले के लिए हिंदी पट्टी वाले इन नेताओं को खास जिम्मेदारी दी गई थी. दोनों नेताओं ने मंडल स्तर पर जाकर रणनीति बनाने के साथ अंदरुनी मतभेद सुलझाने का भी काम किया. बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल से लेकर वोटरों का दिल जीतने तक, इस जोड़ी ने जमीन पर बखूबी काम किया.

सुनील बंसल और भूूपेंद्र यादव को बूथ स्तर तक पार्टी की मजबूती का जिम्मा दिया गया.
ममता के करीबी रहे इस नेता ने सत्ता गिरा दी!
कभी ममता बनर्जी के नज़दीकी रहे सुवेंदु अधिकारी बीजेपी के लिए अहम किरदार साबित हुए. सुवेंदु अधिकारी के जरिए बीजेपी ने नंदीग्राम के साथ ही कोलकाता की भवानीपुर सीट पर भी सीधी चुनौती दी. इसका असर पूरे बंगाल चुनाव पर साफ तौर पर दिखा.
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