- पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने इस्तीफा सौंप दिया है
- कांग्रेस आलाकमान ने नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए विजय इंदर सिंगला, परगट सिंह और सुखविंदर रंधावा के नाम सुझाए हैं
- विजय सिंगला को शहरी हिंदू मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है जबकि परगट सिंह और सुखविंदर रंधावा जट सिख समुदाय से
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से जारी विवाद और गतिरोध के बीच पार्टी ने नेतृत्व परिवर्तन में बदलाव करने का फैसला लिया है. सूत्रों के अनुसार, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने अपना इस्तीफ पार्टी हाई कमांड को सौंप दिया है. हाई कमांड की ओर से अगले 24-48 घंटे में नए पंजाब प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान किया जा सकता है. पंजाब प्रदेश अध्यक्ष की रेस में विजय इंदर सिंगला, परगट सिंह, सुखविंदर रंधावा शामिल हैं. हालांकि, पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा.
सूत्रों ने बताया कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मंत्री और सांसद विजय इंदर सिंगला इस पद के लिए सबसे आगे बताए जा रहे हैं. कांग्रेस आलाकमान ने वडिंग को पद से हटाने के अपने फैसले से अवगत करा दिया है, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की. कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य सिंगला को एक जुलाई को पार्टी के चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था.
तीन नाम के पीछे का क्या समीकरण?
विजय इंदर सिंगला (हिंदू अग्रवाल / बनिया) : ये पंजाब के शहरी हिंदू मतदाता वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो विशेष रूप से मालवा क्षेत्र के शहरी क्षेत्रों में प्रभाव रखते है.
परगट सिंह: जट सिख हैं. पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और नेता हैं. ये पंजाब के प्रमुख सामाजिक-राजनीतिक वर्ग जट सिख समुदाय से आते हैं.
सुखविंदर सिंह रंधावा: जट सिख हैं, रंधावा भी. वर्तमान में राजस्थान के प्रभारी और पंजाब से सांसद हैं. ये भी पंजाब के प्रभावशाली जट सिख समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और माझा क्षेत्र में मजीठा/गुरदासपुर इलाके से आते हैं.
बदली पंजाब की तस्वीर की इनसाइड स्टोरी
पंजाब कांग्रेस में पिछले कई महीनों से प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग को लेकर विरोधी खेमे की प्रतिक्रियाएं और मतभेद जारी थे. पार्टी के अंदर से बात निकल कर सार्वजनिक तौर पर देखने को कई बार मिली. राजा वडिंग के विरोधी खेमे के नेता चरणजीत सिंह चन्नी और रंधावा लगातार उनको हटाने की मांग कर रहे थे. इसी बीच कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश के हालत को देखते हुए सबसे पहले पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल को बदला और जिम्मेदारी सचिन पायलट को दी गई. सचिन पायलट ने दिल्ली में सभी नेताओं से अलग-अलग बैठक कीं और रिपोर्ट को दिल्ली नेतृत्व को सौंप दिया.
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कांग्रेस के उच्च सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में राजा वाडिंग के कामकाज और खेमेबाजी का जिक्र भी किया गया था. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस में जारी विवाद और नाराजगी दूर करने का निर्देश दिया था. सचिन पायलट ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक अपने दौरे में पार्टी के हर नेता से फीडबैक लिया था और इसकी जानकारी कांग्रेस आलाकमान को दी थी. इस पूरी रिपोर्ट के बाद नेतृव ने बदलाव को हरी झंडी दिखाई और अब प्रदेश अध्यक्ष किसी और व्यक्ति को बनाने का निर्णय लिया गया.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की रेस में विजय इंदर सिंगला, परगट सिंह, सुखविंदर रंधावा सबसे आगे बताए जा रहे हैं. उसके पीछे पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई अलग-अलग समुदायों के समीकरण को साधना एक रणनीति का हिस्सा है. दरअसल, पार्टी नेतृत्व को पंजाब में जारी सियासी संकट की लंबे समय से जानकारी थी. पंजाब चुनाव से ठीक पहले आपसी लड़ाई और गतिरोध से पार्टी को पंजाब में नुकसान हो रहा है, इसलिए नेतृव ने बदलाव करने का निर्णय लिया है. बताया जा रहा है कि अगले 24-48 घंटों में नए प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान संभव है.
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