विज्ञापन

UGC के जिस सर्कुलर पर हुआ था विवाद, उसे RSS ने बताया-'असंतुलित'

इस सर्कुलर के लागू होने के बाद से ही सामान्य वर्ग के विभिन्न संगठनों ने इन नियमों पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. सामान्य वर्ग के संगठनों का तर्क है कि यूजीसी के नए नियमों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों के संरक्षण का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है.

UGC के जिस सर्कुलर पर हुआ था विवाद, उसे RSS ने बताया-'असंतुलित'
सुनील आम्बेकर ने कहा कि इस बात की ओर ध्यान दिलाए जाने पर सरकार और यूजीसी ने भी इसका संज्ञान लिया. (फोटो-एक्स हैंडल से)
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने यूजीसी के विवादित सर्कुलर को असंतुलित बताया और अपनी भूमिका स्पष्ट की है
  • यूजीसी ने जनवरी में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता बढ़ाने के लिए समता समिति गठन को अनिवार्य किया था
  • समता समिति में ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांगजन और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करना जरूरी बनाया गया था

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के जिस सर्कुलर पर विवाद हुआ था, उसे असंतुलित बता दिया है.  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर ने इंदौर में संगठन की एक वार्षिक बैठक से पहले कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. इस दौरान उनसे जब विवादित सर्कुलर पर सवाल किया गया तो आम्बेकर ने कहा कि संघ यूजीसी के सर्कुलर के बारे में अपनी भूमिका पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह ‘असंतुलित' था.

सुनील आम्बेकर ने आगे कहा,‘‘इस बात की ओर ध्यान दिलाए जाने पर सरकार और यूजीसी ने भी इसका संज्ञान लिया. अदालत ने भी इस (नियमावली) पर रोक लगा दी है. अभी यह मामला अदालत में विचाराधीन है. हालांकि, हमारा रुख यही है कि इस विषय में आगे जो भी हो, वह संतुलित होना चाहिए और इसका ध्यान सरकार को भी रखना चाहिए.'' उन्होंने आगे कहा कि किसी एक सर्कुलर से सामाजिक एकता दिग्भ्रमित नहीं होनी चाहिए और समाज को एकजुट बने रहना चाहिए.

कौन से सर्कुलर पर हुआ था विवाद

यूजीसी ने चालू वर्ष के जनवरी माह में एक सर्कुलर जारी कर देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विनियम-2026 को लागू किया था. इस नए विनियम के अंतर्गत शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह रोकने के लिए 'समता समिति' का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया. आयोग के प्रावधानों के अनुसार, इस समता समिति में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रतिनिधियों के अलावा दिव्यांगजन और महिलाओं को शामिल करना अनिवार्य बनाया गया.

इस सर्कुलर के लागू होने के बाद से ही सामान्य वर्ग के विभिन्न संगठनों ने इन नियमों पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. सामान्य वर्ग के संगठनों का तर्क है कि यूजीसी के नए नियमों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों के संरक्षण का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है. इसके अतिरिक्त, समता समिति के समक्ष झूठी शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध किसी प्रकार की दंडात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी कोई उल्लेख नहीं है. संगठनों का कहना है कि इन नियमों का अनुचित दुरुपयोग हो सकता है, जिससे शिक्षण संस्थानों का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है.

यह भी पढ़ें | नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाले परीक्षा सुधार कार्यबल का कार्यकाल जनवरी 2027 तक बढ़ा

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
UGC Equity Regulations 2026, RSS, Sunil Ambekar, Sunil Ambekar RSS, UGC
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com