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नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाले परीक्षा सुधार कार्यबल का कार्यकाल जनवरी 2027 तक बढ़ा

प्रधान के इस्तीफे के एक दिन बाद मोदी ने परीक्षा प्रणाली को ‘लीक-प्रूफ’ बनाने के लिए सुधारों का सुझाव देने के वास्ते इस उच्च-स्तरीय कार्यबल के गठन की घोषणा की, जिसकी अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को सौंपी गई.

नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाले परीक्षा सुधार कार्यबल का कार्यकाल जनवरी 2027 तक बढ़ा
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले कार्यबल ने के राधाकृष्णन से भी सलाह ली है. (फोटो-एनडीटीवी)
  • केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले परीक्षा सुधार कार्यबल का कार्यकाल जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया है
  • कार्यबल ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, विशेषज्ञों और संस्थाओं से 50,000 से अधिक सुझाव एकत्रित किए हैं
  • पीएम मोदी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद परीक्षा प्रणाली सुधार के लिए छह सदस्यीय कार्यबल का गठन किया था

केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधारों पर काम कर रहे नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले कार्यबल का कार्यकाल जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया है. सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के भारी विरोध-प्रदर्शन के बीच 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के एक दिन बाद छह सदस्यीय उच्चस्तरीय कार्यबल के गठन की घोषणा थी.

अब तक इस कार्यबल ने क्या किया

इस कार्यबल को छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, विषय विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं से 50,000 से अधिक सुझाव हासिल हुए. सूत्रों के मुताबिक, “हितधारकों के साथ परामर्श जारी है. सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा भी दाखिल किया है, जिसमें कार्यबल की ओर से अब तक हासिल की गई प्रगति का ब्योरा दिया गया है. कार्यबल को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए अब जनवरी 2027 तक का समय दे दिया गया है.”  उसने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष के राधाकृष्णन से भी सलाह ली है, जिन्होंने 2024 में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से गठित एक समिति की अध्यक्षता की थी.

दिल्ली में प्रदर्शन नहीं होते तो अब तक लागू हो जाता

जून 2024 में गठित राधाकृष्णन समिति ने उसी साल अक्टूबर में अपनी सिफारिशें सौंपीं. इसके बाद केंद्र सरकार ने इन सिफारिशों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक ‘उच्च-स्तरीय संचालन समिति' (एचपीएससी) बनाई, जिसके प्रमुख भी राधाकृष्णन ही थे. शिक्षा मंत्रालय उन सुझावों को लागू करने की प्रक्रिया में ही था कि इसी साल मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट का प्रश्नपत्र फिर से लीक हो गया, जिससे एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया. इसके चलते बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए और आखिरकार प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.

प्रधान के इस्तीफे के एक दिन बाद मोदी ने परीक्षा प्रणाली को ‘लीक-प्रूफ' बनाने के लिए सुधारों का सुझाव देने के वास्ते एक उच्च-स्तरीय कार्यबल के गठन की घोषणा की, जिसकी अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को सौंपी गई. नीलेकणि के अलावा कार्यबल के अन्य सदस्यों में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस सोमनाथ, आसूचना ब्यूरो (आईबी) के पूर्व निदेशक तपन डेका, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) चेन्नई के निदेशक वी कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और आपूर्ति शृंखला विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं.

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