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RSS का स्वयंसेवक होना जीवन भर की साधना, इसकी पूर्णता की कोई सीमा नहीं: मोहन भागवत

मोहन भागवत ने आरएसएस संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार के बारे में भी बात की. भागवत ने कहा कि डॉक्टर साहब ने उपदेश नहीं दिए, उदाहरण दिए. वह पूर्णता है.

RSS का स्वयंसेवक होना जीवन भर की साधना, इसकी पूर्णता की कोई सीमा नहीं: मोहन भागवत
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कार्यकर्ता होने को जीवन भर की साधना और निरंतरता बताया
  • भागवत ने कहा कि संघ के प्रचारकों का जीवन समझना तभी संभव है जब उन्हें प्रत्यक्ष देखा जाए और अनुभव किया जाए
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ कई संगठनों का संचालन करता है परंतु सब कुछ संघ द्वारा नियंत्रित नहीं होता
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में कहा कि RSS का कार्यकर्ता होना एक साधना है. उन्होंने कहा कि यह जीवन भर की साधना है और इसकी पूर्णता की कोई सीमा नहीं है. संघ के प्रचारकों के जीवन पर एक ऑडियो-वीडियो सीरीज को रिलीज किए जाने के दौरान उन्होंने यह बात कही. मोहन भागवत ने कहा कि हम सुंदर नाजुक फूल नहीं हैं, हम बनफूल हैं. उन्होंने कहा कि संघ के प्रचारकों के बारे में अच्छे जीवन तत्व पढ़ने को मिलते हैं, लेकिन उन्हें समझना तभी संभव है, जब उन्हें देखा जाए. उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों की सक्रियता नंबर दो का गुण है. पहला गुण है संघ का जीवन जीना. 

नागपुर में आयोजित कार्यक्रम से निकलते हुए मीडिया के लोगों ने उनसे राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर भी सवाल पूछा. इस पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कार में बैठने से पहले राम-राम बोलकर गए. उन्होंने इस दौरान संघ को लेकर एक बात कही कि ऐसा प्रचार होता है कि RSS बहुत सी चीजों को कंट्रोल करता है, लेकिन यह सही नहीं है.

उन्होंने कहा कि संघ के इतने संगठन, इतनी गतिविधियां हैं. लोगों को लगता है कि संघ ही चलाता या रिमोट कंट्रोल करता है. ऐसा है नहीं. ऐसे कार्य करने जो व्यक्ति चाहिए, उस व्यक्ति को गढ़ने का काम संघ का काम है. जहां स्वयंसेवक है, वहां संघ का काम दिखता है. स्वयंसेवक का परिवार जहां होता है, वहां संघ का जीवन देखने को मिलता है. डॉ हेडगेवार हुए तो ऐसे हुए और उन्होंने जो किया, वह ज्योत से ज्योत जलाने जैसी बात थी. आज भी संघ को समझते वो हैं जो संघ के अंदर कदम रखते हैं.

संघ प्रमुख ने कहा कि शाखा में आकर ध्वज प्रणाम किया तो स्वयंसेवक कहलाता है. लेकिन यह जीवन भर की साधना है. इसकी पूर्णता की सीमा नहीं है. डॉक्टर साहब को भी पूछते तो वो कहते अभी साधना कर रहा हूं. जो भारत को दुनिया में करना है वो कर सकने वाला भारत खड़ा करना है तो उस जीवन को अपनाना पड़ेगा, जिसकी शिक्षा दीक्षा लेनी होगी.  उन्होंने कहा कि समाज को मूल बात को लेकर खड़ा होना पड़ेगा. 

'हेडगेवार ने उपदेश नहीं दिए, उदाहरण प्रस्तुत किए'

मोहन भागवत ने आरएसएस संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार के बारे में भी बात की. भागवत ने कहा कि डॉक्टर साहब ने उपदेश नहीं दिए, उदाहरण दिए. वह पूर्णता है. उनका अनुकरण करते हुए अपनी क्षमता के अनुसार स्वयंसेवक कार्य करते हैं. कोई थक गया, कोई गिरता, किसी को ठोकर, कोई फिसल गया, लेकिन बाकी लोग टीका टिप्पणी नहीं करते. वह ठीक रहे यह देख कर आगे बढ़ते हैं क्योंकि आगे बढ़ते जाना है. उन्होंने कहा कि सक्रियता के कई उदाहरण है. मनुष्य बनाने का इतना कारगर उपाय और कहीं नहीं. दुनिया भर से लोग देखने आते हैं. पांचों द्वीपों के लोग आए. उन्होंने यही पूछा कि हमारे देश के युवाओं को ऐसा प्रशिक्षण देने की योजना हो सकती है क्या? 
 

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