विज्ञापन

भरत तिवारी एनकाउंटर में आरोपी SDPO की मुश्किलें बढ़ी, 19 साल पुराने केस भी अब खुलेंगे

मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के MIT कॉलेज के समीप का है. जहां 4 नवंबर 2007 की सुबह 4 बजे पुलिस से हुई मुठभेड़ में तीन युवकों की मौत हो गई थी. राजेश शर्मा थानेदार थे.

भरत तिवारी एनकाउंटर में आरोपी SDPO की मुश्किलें बढ़ी, 19 साल पुराने केस भी अब खुलेंगे
राजेश शर्मा की मुश्किलें बढ़ी (NDTV)
Bihar News:

आरा में भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में आरोपी बनाए गए एसडीपीओ राजेश शर्मा 19 वर्ष भी एक एनकाउंटर को लेकर सुर्खियों में थे. मुजफ्फरपुर में भी 19 साल पहले हुई मुठभेड़ में राजेश शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगे थे. जिसमें मृतक के परिवार वालों ने CID की जांच और चार्ज शीट पर सवाल खड़ा किया था. इसके साथ ही CID की जांच को लेकर साल 2013 में मुजफ्फपुर कोर्ट में सदर थाने के तत्कालीन थानेदार राजेश शर्मा सहित चार थाना प्रभारी और कई अन्य पुलिस कर्मी को आरोपी बनाते हुए मामला दर्ज कराया था. बताया जा रहा है कि उस केस में गवाही नहीं होने के कारण वह मामला न्यायालय में लंबित पड़ा हुआ था. लेकिन अब यह केस फिर से खुलने वाला है.

दरअसल, उस मामले को फिर से खोलने के लिए तथाकथित मुठभेड़ में मारे गए मनीष महिवाल की मां अनीता देवी ने मानवाधिकार आयोग के अधिवक्ता एस के झा के माध्यम से न्यायालय में आवेदन दिया है. जिसको न्यायालय ने सुनवाई करते हुए सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तिथि निर्धारित की है. बता दें, CID की जांच पर मानवाधिकार आयोग ने भी सवाल खड़े किये थे.

2007 का है पूरा मामला

यह पुराना मामला मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के MIT कॉलेज के समीप का है. जहां 4 नवंबर 2007 की सुबह 4 बजे पुलिस से हुई मुठभेड़ में तीन युवकों की मौत हो गई थी. इसमें सदर थाना क्षेत्र के लहलादपुर पताही निवासी मुकुल ठाकुर, काजी मोहम्मदपुर निवासी मनीष शर्मा और शिवहर जिले के धनकौल सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई थी. हालांकि यह मामला भी पूरी तरह संदिग्ध था.

Latest and Breaking News on NDTV

सड़क पर हुआ था एनकाउंटर

पुलिस के मुताबिक उस समय वाहन जांच के दौरान गाड़ी को रोकने पर तीन युवकों ने गोली से फायरिंग की थी. पुलिस का दावा था कि युवकों ने 22 राउंड फायरिंग की थी. इसके बाद आत्मरक्षा में गोली चलाकर तीन युवकों को मौत के घाट उतार दिया गया. पूरे मामले को मानवाधिकार आयोग द्वारा भी फर्जी एनकाउंटर बताया था. मनीष कुमार की मां ने भी बेटे के फर्जी एनकाउंटर का गंभीर आरोप लगाया था.

CID से जांच कराने की थी अनुशंसा 

बवाल बढ़ने के बाद पूरी घटना को लेकर DIG अरविंद पांडे ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी. वहीं जांच रिपोर्ट में सभी पुलिस कर्मी को क्लीन चिट दे दी गई. लेकिन मानवाधिकार आयोग ने इस जांच रिपोर्ट पर असंतोष जताया था. क्योंकि पुलिस अधिकारी और पुलिस वाहन के ड्राइवर के बयान में विरोधाभास था. जहां एक तरफ एनकाउंटर में शामिल पुलिस कर्मी ने बताया था कि वाहन जांच के दौरान वहां रोके जाने पर युवक ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी. जबकि पुलिस वाहन के चालक द्वारा बताया गया था कि पुलिस ने पीछा कर युवक पर गोली चलाया था. इसके साथ ही रिपोर्ट में युवकों के फिंगरप्रिंट और हैंड वॉश का सबूत नहीं मिला था.

मानवाधिकार आयोग इस पूरे एनकाउंटर को फर्जी करार दिया था और तत्कालीन सदर थानेदार राजेश कुमार शर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मियों को सभी मृतक के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजे की राशि देने का निर्देश दिया था.

वहीं  साल 2013 में मुजफ्फपुर कोर्ट में सदर थाने के तत्कालीन थानेदार राजेश शर्मा सहित चार थाना प्रभारी और कई अन्य पुलिस कर्मी को आरोपी बनाते हुए मामला दर्ज कराया था. जो अब तक लंबित है.

यह भी पढ़ेंः भरत तिवारी एनकाउंटर: आरोपी SDPO को मिला नया पद, परिवार ने कहा- हत्या के बदले प्रमोशन

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Bharat Tiwari Encounter Case, Rajesh Sharma, Bihar Police, Muzaffarpur News, Bihar News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com