राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को Gen-Z से संवाद के दौरान पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से हमेशा दुश्मनी संभव नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि कॉन्फ्लिक्ट के बाद संवाद जरूरी है. भागवत ने कहा कि कोई हमेशा दुश्मन नहीं होता.
चीन और पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए या नहीं? इस सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि कॉन्फ्लिक्ट के समय नहीं. आतंकी हमले के समय नहीं.
क्या कहा भागवत ने?
भागवत ने कहा, 'कॉन्फ्लिक्ट के समय ऐसा नहीं करना चाहिए. कॉन्फ्लिक्ट का मतलब है- सैन्य युद्ध या आतंकवाद. यह आतंकवाद सिर्फ कट्टरपंथी समूहों का आतंकवाद नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरी विचारधारा है. इसके पीछे एक नीति भी है- थाउजंड कट्स वाली नीति. इसलिए यह एक हिडन वॉर है और हमें इससे उसी तरह निपटना होगा.'
Mumbai, Maharashtra: When asked should civil societies maintain ties with students or regular civil society in Pakistan and China, invite them, and have conversations, RSS Chief Mohan Bhagwat says, "Not during times of conflict, I told you. Conflict is a military war or even… pic.twitter.com/ddGX9GXDpI
— IANS (@ians_india) August 6, 2026
पाकिस्तान से रिश्तों पर भागवत ने कहा कि पाकिस्तान 100 साल पहले भारत ही था. उन्होंने कहा कि युद्ध या आतंकी हमलों के समय सरकार का निर्देश मानें लेकिन हमेशा के लिए दुश्मनी संभव नहीं, इंसानियत सबसे ऊपर है.
उन्होंने कहा कि 100 साल से भी कम समय पहले पाकिस्तान भारत का ही हिस्सा था. रिश्ते तोड़े नहीं जा सकते. मिल-जुलकर रहने के लिए बातचीत जरूरी है. उन्होंने कहा कि रिश्ते तोड़े नहीं जा सकते, उन्हें कुछ समय के लिए रोका जा सकता है. हमेशा नफरत बनाए रखना संभव नहीं है.
भागवत ने कहा कि 'कॉन्फ्लिक्ट के समय, हमें वही करना होता है जो हमारी सरकार और सेना करती है। लेकिन इससे पहले से मौजूद रिश्ते नहीं टूटने चाहिए. आपने दो उदाहरण दिए हैं: पाकिस्तान और चीन. चीन के बारे में लोग कहते हैं कि 2,000 सालों से भारत ने हमें कुछ मूल्य दिए हैं, और पाकिस्तान भी 100 साल से भी कम समय पहले भारत का ही हिस्सा था. यह बात नहीं भूलनी चाहिए.'
Mumbai, Maharashtra: RSS Chief Mohan Bhagwat says, "In the times of conflict, we have to go with whatever our government, military does. But that should not sever the ties which are already there. You have given two examples: Pakistan and China. China, people say that for 2,000… pic.twitter.com/FLMqCcyasT
— IANS (@ians_india) August 6, 2026
उन्होंने कहा कि 'ये रिश्ते तोड़े नहीं जा सकते. टकराव रहने तक इन्हें कुछ समय के लिए रोका जा सकता है. लेकिन इसका समाधान क्या है? भारत का समाधान? भारतीय समाधान दूसरों को जीतना या खत्म करना नहीं है. यह उस सामंजस्यपूर्ण और समावेशी प्रक्रिया पर आधारित है जिसके लिए बातचीत की जरूरत होती है.'
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जेन-जी देशविरोधी नहीं हैंः भागवत
इस कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि यदि जेन जी विरोध-प्रदर्शन कर रही है तो उन्हें 'देशविरोधी' नहीं कहा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह देश की अपनी नई पीढ़ी है और उनके मुद्दों को संवाद के जरिए समझकर समाधान निकालने की जरूरत है.
भागवत ने कहा कि 'अगर जेन जी प्रदर्शन कर रही है तो इसका मतलब यह नहीं कि वे एंटी-नेशनल हैं. वे हमारे अपने लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं. मेरा मानना है कि जेन जी और जेन अल्फा मौजूदा पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं.'
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन भी सहमति बनाने का एक माध्यम है. विभिन्न विचारों के बीच संवाद से ही व्यापक सहमति बनती है. यदि किसी कारण से लोगों की बात नहीं सुनी जाती, तब आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है, लेकिन उसका उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार होना चाहिए.
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