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Exclusive: शव ठिकाने लगाने से लेकर सरेंडर प्लान तक, रेणुकास्वामी मर्डर केस के आरोपी ने बताई पूरी कहानी

रेणुकास्वामी मर्डर केस में आरोपी प्रदोष एस. राव ने सरकारी गवाह बनने की मांग करते हुए अदालत में कई गंभीर दावे किए हैं.

Exclusive: शव ठिकाने लगाने से लेकर सरेंडर प्लान तक, रेणुकास्वामी मर्डर केस के आरोपी ने बताई पूरी कहानी
रेणुकास्वामी केस में आरोपी के सनसनीखेज दावे
NDTV
  • रेणुकास्वामी हत्या मामले में आरोपी प्रदोष ने सरकार का गवाह बनने की इच्छा जताई
  • प्रदोष ने दावा किया कि कन्नड़ अभिनेता दर्शन ने रेणुकास्वामी को रस्सी से पिटाई की
  • मामले को दबाने के लिए पैसे दिए और हत्या को पैसों के विवाद का मामला दिखाने की कोशिश की गई

रेणुकास्वामी मर्डर केस में बड़ा खुलासा हुआ है. NDTV को उस घटना का आंखों देखा हाल मिला है, जिसमें कन्नड़ अभिनेता दर्शन पर रेणुकास्वामी की हत्या का आरोप है. यह जानकारी आरोपी प्रदोष एस. राव से मिली है, जिसने सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की इच्छा जताई है और अदालत में दायर अपनी याचिका में उस दिन की घटनाओं का विस्तृत ब्योरा दिया है. NDTV को प्रदोष की गवाही और याचिका से जुड़ी पूरी जानकारी मिली है.

प्रदोष ने क्या-क्या दावे किए?

प्रदोष ने अपनी याचिका में दावा किया है कि दर्शन ने नायलॉन की रस्सी से रेणुकास्वामी की पिटाई की. दर्शन ने बार-बार रेणुकास्वामी की गर्दन और छाती पर लात मारी. वो कथित तौर पर रेणुकास्वामी की छाती पर खड़े हो गए और उसे दबाया. दर्शन ने रेणुकास्वामी का मोबाइल फोन देकर दूसरी महिलाओं को भेजे गए मैसेज चेक करने को कहा. उसे रेणुकास्वामी की मौत की जानकारी दर्शन के ड्राइवर लक्ष्मण से मिली.

इसके अलावा दर्शन ने कथित तौर पर धमकी दी कि अगर प्रदोष ने घटना के बाद की स्थिति संभालने में मदद नहीं की तो वह आत्महत्या कर लेंगे. मामले को दबाने के लिए नागराज को 5 लाख रुपये और विनय को 10 लाख रुपये दिए गए. हत्या को पैसों के विवाद का मामला दिखाने के लिए एक अलग कहानी तैयार की गई. कई लोगों को सरेंडर कर हत्या की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार किया गया.

शेड के अंदर क्या हुआ था?

याचिका के मुताबिक, 8 जून 2024 को प्रदोष सबसे पहले दर्शन के साथ राजराजेश्वरी नगर स्थित स्टोनी ब्रूक्स रेस्टोरेंट गया था. बाद में दर्शन ने उसे पवित्रा गौड़ा के घर चलने को कहा. वहां से समूह कथित तौर पर उस शेड में पहुंचा, जहां रेणुकास्वामी को रखा गया था.

प्रदोष का दावा है कि जब वे शेड में पहुंचे तो रेणुकास्वामी जमीन पर बैठा था और उसके आसपास कई लोग मौजूद थे. उसके अनुसार, दर्शन रेणुकास्वामी को उन संदेशों के लिए गालियां दे रहे थे, जो कथित तौर पर पवित्रा गौड़ा को भेजे गए थे.

मारपीट का आरोप

प्रदोष का कहना है कि दर्शन ने पहले रेणुकास्वामी को थप्पड़ मारा और फिर पवित्रा गौड़ा को बुलाकर उससे रेणुकास्वामी को चप्पल से मारने के लिए कहा. याचिका में दावा किया गया है कि इसके बाद कई लोगों ने रेणुकास्वामी को लकड़ी की लाठियों और नायलॉन की रस्सियों से पीटा. प्रदोष का आरोप है कि दर्शन ने भी नायलॉन की रस्सी लेकर रेणुकास्वामी पर कई बार हमला किया.

प्रदोष के मुताबिक, एक समय दर्शन ने रेणुकास्वामी का मोबाइल फोन उसे दिया और पूछा कि उसने कितनी महिलाओं को ऐसे संदेश भेजे थे. याचिका के अनुसार, प्रदोष ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सऐप खाते देखे. प्रदोष ने यह भी दावा किया है कि उसने बीच-बचाव करने की कोशिश की थी. उसका कहना है कि उसने दर्शन को चेतावनी दी थी कि लगातार मारपीट से रेणुकास्वामी की मौत हो सकती है.

'छाती पर खड़े हो गए थे दर्शन'

याचिका में सबसे गंभीर आरोप यह है कि दर्शन कथित तौर पर रेणुकास्वामी की छाती पर दोनों पैरों से खड़े हो गए और जोर से दबाव बनाया. प्रदोष का दावा है कि उसने दर्शन को वहां से हटाया और फिर से मारपीट न करने की गुजारिश की.

मौत के बाद क्या हुआ?

प्रदोष का कहना है कि कुछ समय बाद वह वहां से चला गया. बाद में दर्शन के ड्राइवर लक्ष्मण ने उसे बताया कि रेणुकास्वामी की मौत हो गई है. याचिका के अनुसार, जब उसने दर्शन को मौत की जानकारी दी तो दर्शन ने कथित तौर पर कहा कि अगर उसने स्थिति संभालने में मदद नहीं की तो वह खुद को गोली मार लेंगे.

सबूत मिटाने और कहानी गढ़ने का आरोप

प्रदोष ने याचिका में दावा किया है कि हत्या के बाद मामले को छिपाने की कोशिश की गई. उसका आरोप है कि कुछ लोगों के सरेंडर करने और हत्या की जिम्मेदारी लेने की योजना बनाई गई. उसने दावा किया कि बाद में दर्शन नकदी से भरा बैग लेकर आए और नागराज को 5 लाख रुपये और विनय को 10 लाख रुपये दिए गए. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि हत्या को चित्रदुर्ग के लोगों के साथ पैसों के विवाद का नतीजा साबित करने के लिए एक अलग कहानी तैयार की गई थी.

शव ठिकाने लगाने का भी दावा

प्रदोष ने दावा किया है कि रेणुकास्वामी के शव को ठिकाने लगाने की भी कोशिश की गई. उसके अनुसार, शव को एक सफेद स्कॉर्पियो में रखा गया और बाद में सुमनहल्ली इलाके के पास एक नाले के किनारे छोड़ दिया गया. उसका कहना है कि इसके बाद सरेंडर को लेकर बातचीत हुई और 10 जून को कई लोगों ने कामाक्षीपाल्या पुलिस थाने में सरेंडर किया, जबकि प्रदोष समेत कुछ अन्य लोगों को बाद में पुलिस ने बिदादी टोल गेट के पास पकड़ा.

सरकारी गवाह बनने की मांग

अपनी याचिका में प्रदोष ने कहा है कि उसे मामले में अपनी भूमिका पर पछतावा है और वह अपराध और अन्य आरोपियों के बारे में जो कुछ जानता है, उसका पूरा और सच्चा खुलासा करने को तैयार है. उसने बेंगलुरु सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट में दायर याचिका में CrPC की धारा 307 के तहत माफी देने और उसे सरकारी गवाह (अप्रूवर) के तौर पर गवाही देने की अनुमति देने की मांग की है.

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