सोचिए, आपके घुटनों में इतना दर्द हो कि आप अपने कुत्ते को घुमाने या अपनी पत्नी के साथ शाम की सैर पर जाने जैसी छोटी-छोटी खुशियों के लिए भी तरस जाएं. ब्रिटेन के रहने वाले जीन पॉल के साथ बिल्कुल ऐसा ही हो रहा था. वहां के मशहूर सरकारी हेल्थ सिस्टम NHS ने उन्हें बता दिया था कि घुटनों की सर्जरी के लिए उन्हें पूरे तीन साल का लंबा इंतजार करना होगा. सबसे बड़ी परेशानी ये थी कि उनके दोनों घुटनों का एक साथ ऑपरेशन करने का वहां कोई प्रावधान ही नहीं था. दर्द से तड़पते जीन पॉल के लिए 3 साल का इंतजार किसी सजा से कम नहीं था. ऐसे में उन्होंने रुख किया भारत का और घुटनों को सक्सेसफुल ऑपरेशन करवाकर अपने देश लौट गए.
भारत आने से पहले की मेहनत
भारत का ये सफर और ये सर्जरी इतनी आसान नहीं थी. जीन ने ठान लिया था कि उन्हें फिर से अपने पैरों पर दौड़ना है. सर्जरी के लिए मेडिकली फिट होने की खातिर उन्होंने महीनों पसीना बहाया और अपना 19 किलो वजन कम किया. इसके बाद 'द मेडिकल ट्रैवल कंपनी' के जरिए वो सीधे दिल्ली पहुंचे. यहां साकेत के मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टरों ने एक ही बार में उनके दोनों घुटने बदल दिए. ऑपरेशन के बाद वो दो हफ्तों तक एक खास रिहैब सेंटर में रहे, जहां रोजाना की फिजियोथेरेपी ने उनकी खोई हुई ताकत और पैरों की रवानी वापस लौटा दी.
इलाज का खर्च ब्रिटेन से बेहद कम
अब जरा उस बात पर आते हैं, जिसने दुनिया भर के लोगों का ध्यान खींचा है और जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है. वो है इलाज का खर्च. ब्रिटेन में इस पूरे इलाज का जो एस्टीमेट दिया गया था, वो करीब 40 हजार पाउंड (यानी लगभग 51.56 लाख रुपये) था. लेकिन भारत में ये पूरा काम सिर्फ 14 हजार पाउंड (करीब 18.05 लाख रुपये) में हो गया.
कमाल की बात तो ये है कि इस 18 लाख में सिर्फ सर्जरी की फीस नहीं थी, बल्कि इसमें ब्रिटेन से आने-जाने की फ्लाइट, उनके रहने-खाने का खर्च, मेडिकल इंश्योरेंस और पूरी देखभाल सब कुछ शामिल था. यानी ब्रिटेन के मुकाबले भारत में उनका खर्च 65 फीसदी कम रहा.
भारत में बेस्ट मेडिकल सिस्टम, दीवाने हुए विदेशी
आज जीन पॉल वापस अपने देश लौट चुके हैं और अपनी उसी पुरानी जिंदगी का लुत्फ उठा रहे हैं, जो घुटनों के दर्द ने उनसे छीन ली थी. जीन की ये कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है. आज भारत पूरी दुनिया के लिए इलाज का सबसे बड़ा और भरोसेमंद ठिकाना यानी 'मेडिकल टूरिज्म हब' बन चुका है.
भारत सरकार 167 देशों के नागरिकों को 'ई-मेडिकल वीजा' की सुविधा दे रही है, जिससे विदेशी मरीजों का यहां आना और भी आसान हो गया है. विदेशी मरीज सिर्फ इसलिए भारत नहीं खिंचे चले आ रहे, क्योंकि यहां इलाज सस्ता है. वो आ रहे हैं क्योंकि हमारे पास दुनिया के बेहतरीन स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं, वर्ल्ड-क्लास अस्पताल और इंफ्रास्ट्रक्चर है. सबसे बड़ी बात- मरीजों को अपनापन देकर उनके पैरों पर दोबारा खड़ा करने का वो जज्बा है, जो उन्हें कहीं और नहीं मिलता.
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