- ठाणे में सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले के मामले में रमेश म्हात्रे ने पुलिस स्टेशन में सरेंडर किया
- बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना पार्षद की जमानत रद्द करते हुए उन्हें पुलिस के सामने आत्मसमर्पण का आदेश दिया था
- कोर्ट ने निचली अदालत के रमेश म्हात्रे के आपराधिक रिकॉर्ड को नजरअंदाज करने पर नाराजगी जताई
ठाणे जिले में सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत रद्द करने के बाद शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे रविवार को पुलिस स्टेशन में सरेंडर करने पहुंचे. इस दौरान एनडीटीवी ने उनसे तीखे सवाल पूछे. हालांकि म्हात्रे सवालों से बचते रहे और बस इतना ही कहा कि इस मामले में काफी कुछ हो चुका है अब रहने दो.
घटना को लेकर एनडीटीवी के बार-बार सवाल पूछने पर भी उन्होंने और कोई जवाब नहीं दिया.
रमेश म्हात्रे का डॉक्टरों के साथ मारपीट करने का वीडियो वायरल होने के बाद बॉम्बे हाइकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था और निचली अदालत से मिली जमानत पर शनिवार को रोक लगा दी थी. कोर्ट ने उन्हें रविवार शाम तक पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था और ऐसा नहीं करने पर उनकी अचल संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती थी.

ठाणे जिले की एक अदालत ने 14 जुलाई को कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) के सदस्य रमेश म्हात्रे को जमानत दी थी. हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि निचली अदालत ने इस बात पर भी ध्यान नहीं दिया कि पहले म्हात्रे के खिलाफ मारपीट के 18 मामले दर्ज किए गए थे, हालांकि इनमें से 17 मामलों में वह बरी हो चुके हैं. पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है.
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