- रामदेव ने हिंदू राष्ट्र पर दिए बयान में सभी भारतीयों को एक ही पूर्वज की संतान बताया और आलोचना का जवाब दिया
- रामदेव ने कहा कि हिंदू राष्ट्र के नाम पर डरने की जरूरत नहीं, राजनीतिक ध्रुवीकरण करने वाले ही इससे परेशान हैं
- कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और सपा के फखरुल हसन ने रामदेव के बयानों को संविधान के खिलाफ बताया
योग गुरु रामदेव के हिंदू राष्ट्र पर दिए गए बयानों से राजनीतिक बहस शुरू हो गई है. कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और समाजवादी पार्टी नेता फखरुल हसन चांद समेत कुछ मुस्लिम नेताओं ने उनके इन बयानों की आलोचना की. लखनऊ के इमाम ने कहा है कि मुसलमान डरते नहीं हैं. रामदेव ने अब, NDTV को दिए एक इंटरव्यू में अपने बयानों का बचाव करते हुए आलोचकों को जवाब दिया. उन्होंने कहा कि उनकी बात में कुछ भी गलत नहीं था.
रामदेव ने NDTV से कहा, "हम सभी एक ही पूर्वजों की संतान हैं. अगर आप बस इतना ही कहें, तो किसी को बुरा नहीं लगता. मैंने बस इतना कहा कि हम सभी एक ही पूर्वजों की संतान हैं. हमें अपने पूर्वजों का आभारी होना चाहिए और हमारा पवित्र चरित्र उनके चरित्र जैसा होना चाहिए. इसमें गलत क्या था?"
हिंदू राष्ट्र के नाम पर डरने की जरूरत नहीं
रामदेव ने आगे कहा कि मैंने ये भी कहा कि हिंदू राष्ट्र के नाम पर किसी को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारे पूर्वज एक ही हैं, हमारा DNA भी एक ही है. अब तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और इंडोनेशिया भी उनमें भारतीय DNA होने की बात कह रहे हैं, तो इसमें क्या बुराई है? उन्होंने कहा कि जहां तक बात एकता की है तो जो लोग राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए नफरत फैलाते हैं, जो धार्मिक आधार पर देश को बांटना चाहते हैं, उन्हीं धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों को इससे परेशानी हुई होगी.
रामदेव ने कहा कि इस देश की सच्चाई यही है कि हमारे पूर्वज एक ही हैं. भारत को महान बनाने के लिए सभी को मिलकर कोशिश और कड़ी मेहनत करनी होगी. तभी अलग-अलग जातियों, वर्गों और समुदायों के नाम पर धार्मिक आधार पर फैलाई गई नफरत खत्म होगी. देश तभी आगे बढ़ेगा. हम सभी भारत के 145 करोड़ लोग हैं.
रामदेव के बयान पर विवाद क्यों?
बता दें कि रामदेव ने इससे पहले कहा कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा से किसी को डरने की जरूरत नहीं है और भारत में मुसलमान और ईसाई खतरे में नहीं हैं, हमारे पूर्वज एक ही हैं. उन्होंने देवबंद का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2009 में मुझे वहां बुलाया गया था, और मैंने उनसे कहा था कि हमारे धर्म भले ही अलग हों, लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं. हिंदू राष्ट्र की अवधारणा से किसी को डरने की जरूरत नहीं. हमारे सभी पूर्वज सनातनी हिंदू थे. कुछ लोग पूछते हैं कि अगर हिंदू राष्ट्र बन गया तो मुसलमान कहां जाएंगे? उन्होंने कहा कि बस अपने पूर्वजों की परंपराओं का पालन करें. आप दाढ़ी रखें या न रखें, कोई भी कपड़े पहनें, लेकिन व्यवहार अपने पूर्वजों जैसा रखें.
कांग्रेस नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस की सोच संविधान पर आधारित है. उन्होंने सवाल किया कि अगर सभी सनातनी हैं या सबके पूर्वज एक ही हैं, तो समाज में बंटवारा करने की कोशिश क्यों की जा रही है. भारत का रास्ता संविधान तय करता है, जो हर धर्म और हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता है. इसलिए कोई भी बहस संविधान पर आधारित होनी चाहिए, उससे बाहर नहीं.
सपा नेता फखरुल हसन का तंज
वहीं सपा नेता फखरुल हसन चांद ने कहा कि रामदेव को लोगों का ध्यान देश के अहम मुद्दों से नहीं भटकाना चाहिए. बीजेपी ऐसे लोगों को आगे लाई है जो हिंदू राष्ट्र पर चर्चा करेंगे. देश अपने मुद्दों से नहीं भटकेगा. उन्होंने आगे कहा कि संविधान देश को किसी एक धर्म का राष्ट्र घोषित नहीं करता. यह सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है. यही वजह है कि जब भी हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर चर्चा होती है, तो अक्सर संविधान और उसकी मूल भावना का ज़िक्र किया जाता है.
रामदेव ने माना कि संविधान सर्वोपरि है, देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता सर्वोपरि है. इस देश में हमारे पूर्वज और उनका चरित्र सर्वोपरि है, और हम उन्हीं पूर्वजों की एकजुट संतानें हैं. एकता का यह विचार संविधान का विचार है; यह सर्वोपरि है, इसमें बिल्कुल भी कुछ गलत नहीं है. एकमात्र गलत बात यह है कि कुछ धार्मिक चरमपंथी और कुछ राजनीतिक लोग धर्म, जाति, वर्ग और समुदायों के नाम पर नफरत और दुश्मनी पैदा करना चाहते हैं. वे ही लोग नाराज होते हैं.
असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश
शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास ने कहा कि "हिंदू खतरे में हैं" जैसे दावे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं. उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर से चढ़ावा चोरी होने से जुड़े हालिया विवादों का जिक्र किया.
बता दें कि हिंदू राष्ट्र का विचार लंबे समय से राजनीतिक और वैचारिक बहस का विषय रहा है. एक पक्ष इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखता है, जबकि दूसरा पक्ष तर्क देता है कि भारत का लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचा, जो सभी धर्मों को समान अधिकार देता है, उसकी सबसे बड़ी ताकत है. इसलिए, जब भी इस मुद्दे पर कोई बड़ा बयान दिया जाता है, तो राजनीतिक दल, धार्मिक नेता और सामाजिक संगठन अपनी राय रखते हैं.
धार्मिक ध्रुवीकरण की कड़ी निंदा
रामदेव की टिप्पणियों के बाद, लखनऊ में मुस्लिम समुदाय के प्रमुख नेता इन घटनाक्रमों पर एकजुट दिखे. कुछ लोगों ने सरकार की हालिया कार्रवाइयों को लेकर समुदाय में बढ़ती चिंता का भी जिक्र किया. लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने अल्पसंख्यक समुदाय में किसी भी तरह के डर को खारिज करते हुए धार्मिक ध्रुवीकरण की कड़ी निंदा की.
उन्होंने सार्वजनिक हस्तियों से संयम बरतने की अपील की. उन्होंने कहा कि हमने हमेशा धर्म के आधार पर भेदभाव का विरोध किया है, और अगर हम अपने देश की स्थिति को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो हर किसी को अपने धर्म का पालन करना चाहिए, दूसरों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे धार्मिक बयान देने से बचना चाहिए.
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