विज्ञापन

रामदेव के 'हिंदू राष्ट्र' बयान पर मुस्लिम समाज से आईं कई प्रतिक्रियाएं, जानें क्या है पूरा मामला

बाबा रामदेव ने कहा कि 'हिंदू राष्ट्र' से मुसलमानों और ईसाइयों को डरने की जरूरत नहीं क्योंकि सभी के पूर्वज एक हैं. मुस्लिम समुदाय की तरफ से कई प्रतिक्रियाएं आईं. पढ़ें पूरा मामला क्या है.

रामदेव के 'हिंदू राष्ट्र' बयान पर मुस्लिम समाज से आईं कई प्रतिक्रियाएं, जानें क्या है पूरा मामला
बाबा रामदेव
NDTV
  • बाबा रामदेव ने कहा कि 'हिंदू राष्ट्र' से मुसलमानों और ईसाइयों को डरने की जरूरत नहीं है.
  • सलमान खुर्शीद ने कहा कि संविधान सभी धर्मों और नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है, इसलिए वही सर्वोपरि है.
  • बाबा रामदेव के इस बयान पर मुस्लिम समाज से कई प्रतिक्रियाएं आई हैं और यह बहस फिर तेज हो गई है.

योग गुरु बाबा रामदेव के 'हिंदू राष्ट्र' को लेकर दिए गए बयान पर देश में एक बार फिर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है. कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद समेत मुस्लिम समाज के कई जाने माने शख्सियतों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, सपा नेता फखरूर हसन चांद ने उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. वहीं लखनऊ के इमाम ने तो यह भी स्पष्ट किया कि मुसलमान डरे हुए नहीं हैं. चलिए जानते हैं पूरा मामला क्या है और इस पर किस-किस तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं.

बाबा रामदेव ने क्या कहा?

बाबा रामदेव ने कहा था कि हिंदू राष्ट्र की अवधारण से किसी को डरने की जरूरत नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में मुसलमानों और ईसाइयों को कोई खतरा नहीं है. ये भी कहा कि 'हमारे पूर्वज एक ही हैं'

रामदेव बोले, "हमारे हरिद्वार के पास देवबंद है. मुझे 2009 में वहां बुलाया गया था, और मैंने उनसे कहा था कि हमारे धर्म अलग हो सकते हैं लेकिन पूर्वज एक ही हैं. हिंदू राष्ट्र की अवधारणा से किसी को डरने की जरूरत नहीं है. हम सभी के पूर्वज सनातनी हिंदू थे. कुछ लोग पूछते हैं कि हिंदू राष्ट्र बन गया तो मुसलमान कहां जाएंगे? बस अपने पूर्वजों की परंपराओं को अपनाएं. आप दाढ़ी रखें या न रखें, कोई भी कपड़ा पहने पर आचरण अपने पूर्वजों की तरह का बनाएं." 

ये भी पढ़ें: व्यक्ति को मार सकते हो विचारों को नहीं... खामेनेई की मौत पर बोले बाबा रामदेव, बताया क्यों कर रहे ईरान का समर्थन

Add image caption here

सलमान खुर्शीद
Photo Credit: NDTV

सलमान खुर्शीद ने क्या जवाब दिया?

इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस की सोच संविधान पर आधारित है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सभी लोग सनातनी थे या सभी के पूर्वज एक जैसे थे, तो फिर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश क्यों की जा रही है?

सलमान खुर्शीद ने पूछा, "अगर सभी लोगों के पूर्वज और सबकी जड़ें एक ही हैं, तो फिर समाज में दरार पैदा करने की जरूरत ही क्या है?"
उन्होंने कहा कि भारत का रास्ता संविधान तय करता है और उसी में हर धर्म और हर नागरिक के अधिकार सुरक्षित हैं. 

पूर्व कानून मंत्री खुर्शीद बोले, "भारत का संविधान हर नागरिक की आस्था, धर्म और विचारों की रक्षा करता है. इसलिए किसी भी बहस का आधार संविधान होना चाहिए, उससे बाहर नहीं.

वहीं सपा नेता फखरूर हसन चांद ने कहा, "मैं बाबा रामदेव जैसे लोगों को सलाह देता हूं कि वे देश के अहम मुद्दों से जनता का ध्यान न भटकाएं. बीजेपी ऐसे लोगों को आगे लाई है जो हिंदू राष्ट्र पर चर्चा करेंगे... देश अपने मुद्दों से नहीं भटकेगा."

Add image caption here

भारत का संविधान

संविधान का जिक्र क्यों हो रहा है?

भारत का संविधान देश को किसी एक धर्म का राष्ट्र घोषित नहीं करता. संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी भी देता है. यही वजह है कि जब हिंदू राष्ट्र जैसी अवधारणा पर चर्चा होती है, तब अक्सर संविधान और उसकी मूल भावना का जिक्र सामने आता है.

शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास ने क्या कहा?

शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि भारत बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान से चलता है. उनके मुताबिक मुसलमान केवल अल्लाह से डरते हैं और किसी अन्य से नहीं.

उन्होंने यह भी कहा कि 'हिंदू खतरे में हैं' जैसे दावे वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश हैं. साथ ही उन्होंने अयोध्या ट्रस्ट से जुड़े हालिया विवादों का भी जिक्र करते हुए कहा कि लोगों का भरोसा प्रभावित हुआ है.

'हिंदू राष्ट्र' का मुद्दा बार-बार क्यों उठता है?

'हिंदू राष्ट्र' लंबे समय से राजनीतिक और वैचारिक बहस का विषय रहा है. एक पक्ष इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखता है, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि भारत का लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचा सभी धर्मों के लिए समान है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. इसी वजह से जब भी इस मुद्दे पर कोई बड़ा बयान आता है, तो राजनीतिक दल, धार्मिक नेता और सामाजिक संगठन अपनी-अपनी राय रखते हैं.

इस बार बहस की शुरुआत बाबा रामदेव के 'हिंदू राष्ट्र' वाले बयान से हुई. इसके जवाब में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने संविधान को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि अगर सभी लोगों की जड़ें एक जैसी हैं, तो समाज में विभाजन पैदा करने का सवाल ही नहीं उठता. वहीं शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास ने भी संविधान को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया. फिलहाल यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और वैचारिक चर्चा का केंद्र बन गया है.

और कहां से आई प्रतिक्रिया?

लखनऊ में मुस्लिम समुदाय के प्रमुख लोगों ने इस घटनाक्रम पर एकता की बात कही, हालांकि कुछ लोगों ने हाल की सरकारी कार्रवाइयों को लेकर समुदाय में बढ़ती चिंता का भी जिक्र किया.

लखनऊ ईदगाह के इमाम, मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने अल्पसंख्यक समुदाय में किसी भी तरह के डर की बात को खारिज किया और धार्मिक ध्रुवीकरण का कड़ा विरोध किया. उन्होंने सार्वजनिक हस्तियों से संयम बरतने की अपील की.

ईदगाह के इमाम ने कहा, "मुसलमान न तो डरे हुए हैं और न ही भयभीत हैं क्योंकि वे अल्लाह की इबादत करते हैं, और सच्चाई यह है कि सभी इंसानों के पूर्वज एक ही हैं." 

उन्होंने कहा, "हमने हमेशा धर्म के आधार पर भेदभाव का विरोध किया है, और अगर हमें अपने देश की स्थिति को बेहतर बनाना है, तो सभी को अपने धर्म का पालन करना चाहिए, दूसरों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे धार्मिक बयान देने से बचना चाहिए."

Latest and Breaking News on NDTV

मौलाना महली
Photo Credit: ANI

उत्तराखंड के नीतिगत फैसलों पर चिंता

मौलाना महली ने पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में लिए गए नीतिगत फैसलों पर भी गंभीर चिंता जताई और कहा कि इनसे समुदाय को परेशानी हुई है. 

उन्होंने कहा, "उत्तराखंड में मस्जिदों को गिराने और मदरसा बोर्ड को खत्म करने की गति से मुसलमानों को काफी परेशानी और तकलीफ हो रही है."

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना यासूब अब्बास ने मिलजुलकर रहने का संदेश देते हुए इंसानी भाईचारे की जरूरत पर सहमति जताते हुए कहा कि प्यार और एकता ही ध्रुवीकरण का एकमात्र इलाज है.

मौलाना अब्बास ने कहा, "यह सही है कि हम सभी इंसान हैं. अगर सभी इंसान एकता, भाईचारे और प्यार से रहें, तो देश में नफरत का माहौल खत्म हो जाएगा और नई दोस्ती पनपेगी."

अयोध्या राम मंदिर में चंदे के कथित गबन को लेकर चल रहे विवाद पर बात करते हुए, फखरुल हसन चांद ने मंदिर प्रशासन की न्यायिक पवित्रता पर जोर दिया.

उन्होंने कहा, "राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर किया गया था. समिति के सदस्यों का चयन भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर किया गया था. सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण है." उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पारदर्शिता न्यायिक आदेशों के अनुरूप होनी चाहिए.

ये भी पढ़ें: 'हिंदू राष्ट्र से डरें नहीं मुसलमान, दाढ़ी रखें, मूंछ कटाएं लेकिन...', बोले योगगुरु रामदेव

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Baba Ramdev, Hindu Rashtra Debate India, Hindu Rashtra, Salman Khursheed
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com