- गोविंद देव गिरी ने चंपत राय से उनके इस्तीफे के बाद मुलाकात कर उनकी सेहत की जानकारी ली
- गिरी ने बताया कि चंपत राय स्वस्थ और समाधान-केंद्रित हैं तथा उन्हें इस्तीफे को लेकर कोई संदेह नहीं है
- चंपत राय ने राम मंदिर चंदे की गिनती में एसबीआई की भूमिका पर सवाल उठाए थे और SIT जांच में सहयोग किया है
राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने चंपत राय से मुलाकात की है. ये मुलाकात चंपत राय का इस्तीफा मंजूर होने और उनकी लिखी सार्वजनिक चिट्ठी के बाद हुई है. गिरी ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों से कहा, "मैं कल मुख्य रूप से चंपत राय जी का हाल-चाल जानने के लिए उनसे मिला था. वे स्वस्थ हैं, समाधान-केंद्रित हैं और अपने इस्तीफे को लेकर उनके मन में कोई संदेह नहीं है."
चंपत राय-गोविंद गिरी में क्या बात हुई
गिरी का मानना है कि चंपत राय उनकी नजर में "बेदाग" हैं, लेकिन उन्होंने बहुत लंबे समय तक "गलत लोगों" पर भरोसा किया, जिससे कथित गबन का पता नहीं चल पाया. उन्होंने चंपत राय के पत्र के बाद उनसे मुलाकात की. गिरी ने बुधवार को राय के साथ हुई अपनी मुलाकात के बारे में मीडिया को बताया, "वह (चंपत) एक अनुभवी व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपना जीवन देश को समर्पित कर दिया है. वह नई (मंदिर प्रबंधन) व्यवस्था का पूरा समर्थन करते हैं और वह परेशान या गुस्सा नहीं हैं." यह मुलाकात जाहिर तौर पर कुछ घंटों तक चली थी. गिरी ने कहा, "मैं अयोध्या के साधु-संतों से भी मिला, जो मंदिर के नए मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किए जाने से सहमत और खुश हैं." गिरी ने कहा कि ट्रस्ट मंदिर प्रबंधन प्रणाली को बेहतर बनाने वाले बदलावों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, और सभी इससे सहमत थे.
एसबीआई की भूमिका पर उठाए सवाल
गोविंद गिरी 6 जुलाई को हुई श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक के बाद से ही यहां रह रहे हैं. इसी बैठक में राय और दूसरे ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर किया गया था. बैठक के एक दिन बाद, चंपत राय ने "राम भक्तों" को लिखे एक पत्र में कहा कि चंदे के कथित गबन की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वह अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देंगे. एक चिट्ठी के साथ-साथ, SIT को उनके द्वारा सौंपा गया एक कथित बयान भी सामने आया, जिसमें उन्होंने राम मंदिर के लिए दान की गिनती की प्रक्रिया में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की भूमिका पर सवाल उठाए.
ये तीन लोग चुनेंगे ट्रस्ट का सीईओ
चंपत राय की जगह पूर्व IFS अधिकारी और ट्रस्टी कृष्ण मोहन को लाया गया है. SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद उन्होंने आठ लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया. ट्रस्ट ने CEO चुनने के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी भी बनाई है. इस पैनल में रिटायर्ड जज प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और ट्रस्टी सुरेश हवारे शामिल हैं. ट्रस्ट इन उपायों और अन्य कदमों पर चर्चा करने के लिए अगली बार 22 जुलाई को बैठक करेगा. यह बैठक उस योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद उन कमियों को दूर करना है जिनकी वजह से कथित तौर पर दान की चोरी हुई थी.
अब तक क्या हुआ
अयोध्या के राम मंदिर में दान की गिनती में कथित अनियमितताओं का पता चलने के बाद जून के पहले सप्ताह में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया. ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. SIT को गबन के शुरुआती सबूत मिले, जिसके बाद FIR दर्ज की गई और मंदिर में दान की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया. आगे की जांच चल रही है.
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