- श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में आज चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफे पर चर्चा होगी.
- ट्रस्ट के कुल 15 सदस्यों में से दस मतदान योग्य हैं, जिसमें दो तिहाई बहुमत से फैसले लिए जाते हैं.
- ट्रस्ट के नियमों में किसी स्थायी सदस्य को हटाने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं, इस्तीफा ही एकमात्र विकल्प है.
Ram Mandir Trust Meeting: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के विवाद के बीच आज श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बहुप्रतीक्षित बैठक दोपहर तीन बजे होगी. बैठक के एजेंडे में सबसे पहले महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के त्यागपत्र पर विचार होगा. इसके साथ ही राम मंदिर के दान-पात्रों से प्राप्त राशि की गणना के संबंध में SIT की अंतरिम रिपोर्ट भी ट्रस्ट के समक्ष रखी जाएगी. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार, दोनों से स्वतंत्र संस्था है. ट्रस्ट के सभी निर्णय स्थायी ट्रस्टी ही आंतरिक रूप से लेते हैं. ट्रस्ट RTI Act के दायरे में नहीं आता क्योंकि यह न तो सरकारी वित्तीय सहायता लेता है और न ही किसी सरकारी प्रशासनिक नियंत्रण में है.
चंपत राय, अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर सबकी नजर
बैठक में महामंत्री चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर चर्चा होगी. आज इस्तीफा स्वीकार होगा या नहीं, ये स्पष्ट नहीं है. दरअसल ट्रस्ट की बाय-लॉज के मुताबिक किसी सदस्य को हटने के लिए कम से कम एक महीना पहले ट्रस्ट को सूचना देनी होती है. उसके बाद ट्रस्ट उस पर सदस्यों से इस्तीफे का कारण पूछकर उस पर फैसला लेता है.
Ayodhya, Uttar Pradesh: On the Ram Mandir Trust meeting, Arya Sant Varun Das Maharaj says, "The entire world and the people of the country are watching the Ram Janmabhoomi Trust meeting, which is scheduled to be held at 3 p.m. But it is being heard that many members are not… pic.twitter.com/xEHqW5pU8k
— IANS (@ians_india) July 6, 2026
एक महीने पहले नोटिस, फिर दो तिहाई बहुमत
अगर किसी सदस्य को हटाना हो तो उस सदस्य को एक महीने का नोटिस देकर उन पर वोटिंग करके दो तिहाई बहुमत से हटाया जा सकता है. कहा जा रहा है कि आज चंपत राय और अनिल मिश्रा से इस्तीफे को लेकर बातचीत की जाए उसके बाद बाकी बातें तय होंगी.
आज की बैठक में होने वाली वोटिंग का गणित समझें
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दान चोरी विवाद के बाद नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दिया है. दोनों इस्तीफे के बावजूद ट्रस्ट की बैठक में शामिल होने और मतदान के पात्र हैं. ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें 4 पदेन (Ex-officio) सदस्य बिना मतदान अधिकार के हैं और एक सदस्य का निधन हो चुका है.
ऐसे में प्रभावी रूप से 10 मतदान योग्य सदस्य हैं, जिनमें कम से कम 6 सदस्यों की सहमति किसी बड़े फैसले के लिए आवश्यक होगी. केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधि ट्रस्ट के सदस्य जरूर हैं, लेकिन उन्हें मतदान या निर्णय लेने का अधिकार नहीं है.
वर्तमान व्यवस्था में किसी भी ट्रस्टी को हटाने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है. ऐसे में इस्तीफा ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है. बैठक में ट्रस्ट की वर्तमान संरचना में व्यापक बदलाव की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है. जो सदस्य बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ सकेंगे.
सुप्रीम कोर्ट से फैसले से बना ट्रस्ट, दिल्ली में दफ्तर
ट्रस्ट का गठन नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फरवरी 2020 में किया गया था. ट्रस्ट की पंजीकृत कार्यालय का पता वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरण का दिल्ली स्थित आवास है. आज ट्रस्ट की अहम बैठक होगी, जिसमें महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा.

हर तीन महीने पर होती है बैठक
ट्रस्ट की बैठक हर तीन महीने में होती है. पिछली बैठक 21 मार्च को रामनवमी की तैयारियों को लेकर हुई थी. जनवरी 2021 से मंदिर निर्माण कार्य की निगरानी गोपाल नागरकट्टे (राव) कर रहे हैं, जो ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य हैं. ट्रस्ट के पहले अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी बनाए गए थे.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सदस्य
- महंत नृत्य गोपाल दासः ट्रस्ट के अध्यक्ष और राम मंदिर आंदोलन के सबसे वरिष्ठ संतों में से एक हैं. वे इस समय अस्वस्थ हैं और अस्पताल में भर्ती हैं, जिसके कारण उनके आज की बैठक में शामिल होने की संभावना कम है.
- चंपत रायः वीएचपी के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के महासचिव हैं. अगस्त 2020 में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से वे ही ट्रस्ट के दैनिक कामकाज और प्रशासनिक फैसलों के मुख्य कर्ताधर्ता रहे हैं.
- अनिल मिश्राः अयोध्या के जाने-माने होम्योपैथिक डॉक्टर और ट्रस्ट के मूल सदस्यों में से एक हैं, जो मंदिर के प्रशासनिक मामलों की देखरेख कर रहे हैं.
- गोविंद गिरि महाराजः पुणे के आध्यात्मिक गुरु हैं, जो ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के रूप में वित्तीय मामलों को संभालते हैं.
- स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीः प्रयागराज के ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं.
- स्वामी विश्वप्रशन्नतीर्थ जी महाराजः कर्नाटक के उडुपी के पेजावर मठ के 33वें प्रमुख हैं.
- युगपुरुष परमानंद गिरि महाराजः हरिद्वार के प्रमुख आध्यात्मिक संत हैं.
- महंत दिनेंद्र दासः अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ संत हैं, जो मूल विवाद में प्रमुख पक्षकार थे.
- कृष्ण मोहनः दलित नेता कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद इस पद पर आरएसएस कार्यकर्ता कृष्ण मोहन को शामिल किया गया था.
- के पारासरन: सुप्रीम कोर्ट के वकील
- पूर्व IAS अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं. ट्रस्ट में विभिन्न धार्मिक संतों, अयोध्या राजपरिवार के प्रतिनिधि, चिकित्सक और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है.
- दिवंगत कामेश्वर चौपाल के स्थान पर कृष्ण मोहन को ट्रस्ट में शामिल किया गया, जबकि विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद उनकी सीट अभी रिक्त है. आमंत्रित सदस्य अपनी राय दे सकते हैं, लेकिन उन्हें मतदान या प्रशासनिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं.
ट्रस्ट में किसे होता है वोटिंग का राइट
ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक, किसी भी फैसले पर मतदान का अधिकार सिर्फ स्थायी ट्रस्टियों को ही है. पदेन सदस्य केंद्र और राज्य सरकार के प्रशासनिक प्रतिनिधि शामिल होते हैं. उनके पास वोट देने का अधिकार नहीं है. यह व्यवस्था ट्रस्ट का पूरा नियंत्रण पूरी तरह से इसके स्थायी सदस्यों के हाथों में सौंपती है. किसी नए ट्रस्टी को शामिल करना हो या ट्रस्ट के कामकाज में कोई बड़ा बदलाव, इसके लिए स्थायी ट्रस्टियों के बहुमत की मंजूरी अनिवार्य है.
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स्थायी ट्रस्टी को हटाने का कोई सीधा प्रावधान नहीं
ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, इसके नियमों में किसी स्थायी ट्रस्टी को हटाने का कोई सीधा प्रावधान नहीं है. इसका मतलब यह है कि यदि चंपत राय महासचिव का पद छोड़ देते हैं और अनिल मिश्रा अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग हो जाते हैं तो भी वे ट्रस्ट के स्थायी सदस्य बने रहेंगे जब तक कि वे खुद ट्रस्ट की सदस्यता से इस्तीफा न दे दें.
विशेष आमंत्रित सदस्य भी होते हैं शामिल
बैठक में कुछ विशेष आमंत्रित सदस्य भी शामिल होते हैं जो चर्चाओं में तो भाग ले सकते हैं लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता. इनमें आरएसएस और वीएचपी के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश भैयाजी जोशी और दिनेश चंद्र शामिल हैं. इनके अलावा कर्नाटक से वीएचपी के वरिष्ठ नेता गोपाल नागरकट्टे भी एक प्रमुख आमंत्रित सदस्य हैं, जो जनवरी 2021 से मंदिर के निर्माण और सिविल कार्यों की निगरानी कर रहे हैं
आज की बैठक के प्रमुख एजेंडे
महासचिव चंपत राय एवं ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र पर विचार
दान-पात्रों से प्राप्त राशि की गणना पर SIT की अंतरिम रिपोर्ट की जानकारी
मंदिर प्रबंधन की आगामी व्यवस्थाओं पर विचार
रिक्त पदों पर चयन के लिए नामों पर विचार
अध्यक्ष की अनुमति से अन्य आवश्यक विषयों पर निर्णय
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