- अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT जांच में जुटी है. अब तक मामले में 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
- राम मंदिर ट्रस्ट में कितने सदस्य हैं और किसकी क्या भूमिका है. यह जानना भी जरूरी है.
- राम मंदिर ट्रस्ट में15 सदस्य हैं. ट्रस्ट में अध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष और सदस्य शामिल हैं
अयोध्या के राम मंदिर में कुछ लोगों द्वारा चढ़ावा चोरी किए जाने के आरोप हैं. इस मामले में यूपी सरकार की तरफ से गठित SIT ने जांच की है और लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. इस बीच ट्रस्ट में शामिल चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफे दे दिए हैं, जिन पर अगले कुछ दिनों में फैसला होना है. इस बीच हर कोई जानना चाहता है कि आखिर राम मंदिर ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल हैं और किसे क्या जिम्मेदारी मिली है. अयोध्या के राम मंदिर के ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ था. इस 15 सदस्यीय ट्रस्ट में अध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष और सदस्य शामिल हैं. इस ट्रस्ट में वर्तमान में कुल 14 सदस्य मौजूद हैं.
पांच सदस्य पदेन हैं
राम मंदिर ट्रस्ट में एक सीट अयोध्या के राजा रहे विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद ख़ाली चल रही है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ट्रस्ट के 15 सदस्यों में से पांच सदस्य पदेन हैं. पदेन सदस्यों में एक सदस्य निर्मोही अखाड़े से, एक दलित सदस्य, एक केंद्र सरकार का अधिकारी, एक राज्य सरकार का अधिकारी और एक जिलाधिकारी अयोध्या शामिल है. निर्मोही अखाड़ा राम मंदिर मामले में पक्षकार था, ऐसे में निर्मोही अखाड़े को भी शामिल किया गया था. दो विशेष आमंत्रित सदस्य भी ट्रस्ट में रखे थे. आइए विस्तार से जानते हैं, हर सदस्य के बारे में और उनकी जिम्मेदारी के बारे में.
महंत नृत्य गोपाल दास जी
महंत नृत्य गोपाल दास जी मणिराम दास छावनी के मुखिया हैं. लंबे समय तक राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे. ऐसे में जब ट्रस्ट का गठन हुआ तो उन्हें अध्यक्ष बनाया गया. उम्र ज्यादा होने की वजह से वो बहुत सक्रिय नहीं रहे. फिलहाल वे लंबे समय से बीमार चल रहे हैं.
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चंपत राय
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री और ट्रस्ट का सबसे मज़बूत चेहरा. बिजनौर के रहने वाले चंपत राय फिजिक्स के प्रोफेसर रहे. 1980 के दशक में नौकरी छोड़ विश्व हिंदू परिषद से जुड़े. राम मंदिर आंदोलन में भी चंपत राय जुड़े रहे. विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल के बेहद करीबी थे. ट्रस्ट का गठन हुआ तो उन्हें महामंत्री बनाया गया. मंदिर की रोजमर्रा के कामकाज का हिसाब किताब चंपत राय के पास रहता था. विवाद सामने आने के बाद चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
गोविंद देव गिरी जी
महाराष्ट्र के रहने वाले गोविंद देव गिरी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं. ट्रस्ट की आमदनी और खर्चे की सारी जिम्मेदारी बतौर कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की है. फिलहाल इस विवाद के बाद अब तक गोविंद देव गिरी से ना पूछताछ हुई है और ना वो मीडिया के सामने आए हैं. हालांकि चंपत रात और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की कॉपी उनकी तरफ से ही जारी की गई है.
नृपेंद्र मिश्रा
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और पीएमओ के विश्वसनीय व्यक्ति जिन्हें ट्रस्ट का मेंबर बनाने के बाद मंदिर निर्माण का काम दिया गया. ट्रस्ट में मंदिर निर्माण समिति बनाई और नृपेंद्र मिश्रा इस निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं. उनका दायरा हमेशा मंदिर के निर्माण तक सीमित रहा. वो अक्सर दिल्ली से अयोध्या आकर निर्माण का काम कर रही कंपनी के अधिकारियों से बैठक कर सारे निर्माण के काम को देखते रहे.
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डॉ. अनिल मिश्र
पेशे से होम्योपैथी के डॉक्टर डॉ अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सक्रिय सदस्य हैं. वो होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार रहे हैं. अनिल मिश्रा संघ के अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाह भी रहे हैं. ट्रस्ट के गठन के बाद उन्हें सदस्य बनाया गया और चंपत राय की तरह ये मंदिर निर्माण और मंदिर से जुड़े कामकाज में बेहद सक्रिय रहे हैं. राम मंदिर चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद अनिल मिश्रा भी इस्तीफा दे चुके हैं.
स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती
जगतगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ट्रस्ट के सदस्य हैं. बद्रिकाश्रम शंकराचार्य के पद को लेकर इनका विवाद शंकराचार्य स्वरूपानंद जी से रहा है. इनका मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. हालांकि ट्रस्ट के गठन के समय इनको सदस्य बनाया गया. ये ट्रस्ट की बैठकों में आते रहे हैं लेकिन रोजमर्रा के कामकाज में कभी दखल नहीं दिखाई दी.
युगपुरुष परमानंद जी महाराज
युगपुरुष परमानंद जी ट्रस्ट के सदस्य हैं. अखंड आश्रम हरिद्वार के ये मुखिया हैं. इन्होंने वेदांत पर 150 से ज्यादा किताबें लिखी हैं. ये भी ट्रस्ट की बैठकों तक सीमित रहे हैं. मंदिर से जुड़े रूटीन कामकाज में सीधी भूमिका कभी नहीं दिखी.
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स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी
कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के 33वें पीठाधीश्वर जगतगुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी हैं. ये राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य हैं. इनकी भूमिका भी सिर्फ बैठकों तक सीमित रही है.
के पाराशरण
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के पाराशरण ट्रस्ट के सदस्य हैं. इन्होंने अयोध्या के राम जन्मभूमि मामले में लगभग 9 साल मंदिर पक्ष की सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की. इंदिरा गांधी और राजीव गांधी सरकार में अटॉर्नी जनरल रहे. पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित हैं. के पाराशरण भी ट्रस्ट की बैठकों तक ही सीमित रहे. ये दिल्ली में रहते हैं.
रिक्त
राजा अयोध्या के निधन के बाद उनका पद अभी खाली है
कृष्ण मोहन
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट में एक दलित सदस्य को रखने की बात कही थी. ट्रस्ट के गठन के वक्त दलित सदस्य के तौर पर बिहार के बीजेपी नेता कामेश्वर चौपाल को ट्रस्ट का सदस्य बनाया था. उनके निधन के बाद बतौर दलित सदस्य कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया. कृष्ण मोहन की तहरीर पर ही अयोध्या पुलिस ने राम जन्मभूमि चंदा/चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज की है.
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दिनेंद्र दास जी
दिनेंद्र दास निर्मोही अखाड़े के अयोध्या बैठक के प्रमुख हैं. राम मंदिर मामले में निर्मोही अखाड़ा भी हिंदू पक्ष की तरफ से वादी रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में सदस्य के तौर पर शामिल रखने को कहा था. दिनेंद्र दास ने मंदिर के फैसले से पहले विश्व हिंदू परिषद पर चंदे के पैसों का हेरफेर करने का आरोप लगाया था. ऐसे में विहिप से संबंध ठीक ना होने से वो सदस्य तो हैं लेकिन उनकी मौजूदगी मजबूत कभी नहीं रही.
संजय प्रसाद
अपर मुख्य सचिव स्तर के आईएएस अफसर, जो वर्तमान में यूपी के एसीएस होने हैं. यूपी सरकार की तरफ से ट्रस्ट में पदेन सदस्य हैं. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के एक अधिकारी को ट्रस्ट में पदेन सदस्य के तौर पर रखने का निर्देश दिया था.
प्रशांत लोखंडे
सीनियर आईएएस ऑफिसर जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर ट्रस्ट के सदस्य हैं.
शशांक त्रिपाठी
शशांक त्रिपाठी आईएएस ऑफिसर हैं और वर्तमान में जिलाधिकारी अयोध्या हैं. राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पदेन सदस्य के तौर पर ट्रस्ट का हिस्सा हैं.
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के विशेष आमंत्रित सदस्य
गोपाल राव-विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय मंत्री गोपाल राव कर्नाटक के रहने वाले हैं. इनका नाम गोपाल नागरकटे हैं. विहिप से जुड़ने के बाद इन्होंने अपना नाम गोपाल राव रख लिया. ये राम मंदिर ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य हैं. मंदिर प्रबंधन का जिम्मा विहिप ने इन्हीं को दे रखा है. ये अयोध्या में विहिप के कारसेवकपुरम और तीर्थक्षेत्रपुरम में रहते हैं.
दिनेश जी-दिनेश जी विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक हैं और उन्हें भी इस ट्रस्ट में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.
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