- राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी मामले के चलते चंपत राय का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है
- चंपत राय अब ट्रस्ट के महासचिव नहीं रहेंगे, पर सदस्य के रूप में नियमों के तहत बने रहेंगे
- ट्रस्ट की बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में खेद व्यक्त करते हुए इस्तीफों पर चर्चा की गई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय का ट्रस्ट से इस्तीफा मंजूर हो गया है. चढ़ावा चोरी के मामले में राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे और इस बीच उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. उनके अलावा अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दिया था. इन इस्तीफों पर फैसले के लिए ही यह बैठक बुलाई गई थी. अब चंपत राय ट्रस्ट के महासचिव के पद पर नहीं रहेंगे. हालांकि, ट्रस्ट के नियमों के अनुसार वह सदस्य बने रहेंगे, लेकिन उनके पास कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं होगी.
क्या-क्या हुआ ट्रस्ट की मीटिंग में
आज दोपहर तीन बजे महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में बैठक शुरू हुई. उन्होंने सबसे पहले इस मामले पर खेद व्यक्त किया गया. महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा, 'इस पूरे घटनाक्रम से मैं आहत हूं. ये हिंदूओं की आस्था से जुड़ा मामला है. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.'
इसके बाद कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने मीटिंग का एजेंडा रखा. स्वामी गोविंद देव गिरी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार का प्रस्ताव रखा. ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट में शामिल साधु संतों की तरफ से कहा गया कि इस कांड की वजह से बहुत ज्यादा आस्था पर सवाल खड़े हुए हैं. ट्रस्ट की बैठक में गोविंद गिरी ने कहा कि बहुत बड़ी गलती हो गई है. इससे राम भक्तों के आस्था पर ठेस पहुंची है. कुछ जगहों पर खामियां थीं, जिन्हें उस वक्त ध्यान नही दिया गया.
सूत्रों का कहना है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा एक साथ मौजूद हैं और दोनों ही बैठक में नहीं पहुंचे. बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर ट्रस्ट के सदस्यों ने नाराजगी जताई.
ट्रस्ट की बैठक में कृष्ण मोहन ने एफआईआर दर्ज कराने के पीछे की वजह बताई. उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई. कृष्ण मोहन के अनुसार, प्रथम दृष्टया मिले तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया गया. उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तत्काल एफआईआर दर्ज कराई गई.कृष्ण मोहन ने कहा कि जनता का भरोसा जीतना बहुत जरूरी है. ट्रस्ट में बदलाव करके ही भरोसा जीता जा सकता है.
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चंपत राय की जगह विश्व हिंदू परिषद के बजरंग बागड़ा को महासचिव बनाया जा सकता है. वहीं अनिल मिश्रा की जगह नीरज दौनेरिया को ट्रस्टी बनाए जाने की संभावना है.
ट्रस्ट की बैठक में एक और ट्रस्टी स्वामी परमानंद गिरी ने कहा कि धर्म की रक्षा करना हम सभी का पहला कर्तव्य है. उन्होंने कहा कि जब लोग आस्था के साथ किसी धार्मिक स्थल से जुड़ते हैं, तो छोटी-छोटी बातों का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए. स्वामी परमानंद गिरी ने कहा कि श्रद्धालुओं के विश्वास और भावनाओं की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने व्यवस्था में सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने पर जोर दिया.
महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि हमलोगों ने राम मंदिर में अपना पूरा जीवन दे दिया. स्वामी विश्वप्रशन्नतीर्थ ने कहा कि ये कलंक लगा है.
ट्रस्ट में अभी 11 नियमित सदस्य
राम मंदिर ट्रस्ट में अभी 11 नियमित सदस्य हैं. अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, वासुदेवानंद सरस्वती, विश्वप्रसन्न तीर्थ, परमानंद गिरि, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी, कृष्ण मोहन, दिनेन्द्र दास और के. परासरन शामिल हैं. चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा का निधन हो गया है. सूत्रों के मुताबिक, अभी ट्रस्ट में कोई उपाध्यक्ष नहीं है, जो अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठकों की अध्यक्षता कर सके. पदेन सदस्यों में केंद्र सरकार के सचिव प्रशांत लेखंडे, उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा शामिल हैं. गोपाल राव विशेष आमंत्रित सदस्य हैं.
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