राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में आरोपियों पर शिकंजा कसने के बाद एसआईटी ने अब जांच का दायरा बढ़ा दिया है. राम मंदिर के विभिन्न आयोजनों में खर्च सवा सौ करोड़ रुपये के हिसाब-किताब को एसआईटी खंगालेगी. सूत्र बता रहे हैं कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी जांच में ट्रस्ट की तरफ से किए गए खर्चों की भी जांच होगी. ट्रस्ट की तरफ से किए गए 125 करोड़ रुपयों के खर्चों का हिसाब लिया जाएगा. इसमें टेंट और शामियाने पर हुआ 36 करोड़ का खर्च शामिल है.
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से महाकुंभ आयोजन खर्च की पड़ताल
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन, महाकुंभ की व्यवस्था और ध्वजारोहण में हुए खर्चों में कथित अनियमितता को लेकर सामने आ रही आशंका की जांच हो रही है. बीते लगभग ढाई सालों में ट्रस्ट में ऑडिट रिपोर्ट, खर्चों की रसीद और अन्य हिसाब किताब की गहन पड़ताल होगी. इसमें प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन में सबसे बड़ा खर्च हुआ है. इसमें टेंट सिटी बसाने से लेकर आयोजन में हुए अन्य खर्चों की पड़ताल की जाएगी.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी एसआईटी जांच
एसआईटी की जांच में राम मंदिर ट्रस्ट के खर्चों का हिसाब भी शामिल है. बताया जा रहा है कि लगभग सवा सौ करोड़ रुपयों का खर्च बड़े आयोजनों में हुआ है. इसमें प्राण प्रतिष्ठा, महाकुंभ और ध्वजारोहण में हुए आयोजनों की लागत शामिल हैं. इसमें सबसे बड़ा खर्च प्राण प्रतिष्ठा में हुआ था, जब 113 करोड़ रुपए व्यय हुए. 22 जनवरी 2024 को हुई राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में लगभग 8000 अतिथि शामिल हुए थे.
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राम मंदिर ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट
ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, टेंट और शामियाना में करीब 36 करोड़ रुपये खर्च किए गए. अक्षत पूजन में आयोजन में लगभग 31 करोड़ रुपये का खर्चा आया. पोस्टर बैनर और प्रचार प्रसार में लगभग 21 करोड़ रुपए खर्च किए गए. इसी तरह साज सज्जा में करीब 15 करोड़ रुपये लगाए गए. खाने पीने की व्यवस्था में करीब 5 करोड़ रुपये लगे. बाकी पैसे पूजा पाठ के आयोजन, राग सेवा, साउंड सिस्टम आदि में खर्च हुए. इसी तरह प्राण प्रतिष्ठा के वार्षिकोत्सव में लगभग 83 लाख रुपए लगाए गए. महाकुंभ में भीड़ की वजह से अतिरिक्त 43 लाख रुपयों का खर्च किया गया. ध्वजारोहण के आयोजन में भी करीब 10 करोड़ रुपए का व्यय हुआ.
गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा हो चुका है. कृष्ण मोहन को ट्रस्ट महासचिव का अंतरिम प्रभार दिया गया है. जबकि 7 जून को चढ़ावा चोरी केस सामने आने के बाद से नोटों की गिनती में हेराफेरी करने के आरोपी अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, लवकुश समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
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