- लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय को रिमांड पर लिया लिया गया
- 40 घंटे की पूछताछ में सच आएगा सामने!
- गुरुवार रात 10 बजे तक पूछताछ करेगी टीम
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अविनाश शुक्ला को चोरी के रैकेट का मुख्य आरोपी माना है. 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में SIT ने अविनाश शुक्ला को पहला आरोपी बताया और उसे इस बड़ी साजिश की मुख्य कड़ी बताया. SIT के अनुसार, अविनाश के जरिए भक्तों के चढ़ावे का गबन किया गया था. जांच टीम ने कहा कि अविनाश से जुड़े सबूतों की कड़ी की वजह से ही वे पांच अन्य आरोपियों की पहचान कर पाए और मंदिर के दान-गिनती सिस्टम के अंदर ऑपरेशन का पूरा घटनाक्रम समझ पाए.
अविनाश शुक्ला उन छह लोगों में से पहला व्यक्ति है, जिसकी शुरुआती तौर पर संलिप्तता सीसीटीवी फुटेज, रिकवरी रिकॉर्ड, बैंक खाते की जांच और गवाहों के बयानों से साबित हुई है. SIT के अनुसार, बाकी आरोपियों के खिलाफ मामला तब तैयार किया गया, जब टीम ने उनसे जुड़े सबूतों की जांच की, जिससे वे जांच का मुख्य केंद्र बन गए.
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तीन आरोपियों को रिमांड पर लिया गया
तीन आरोपियों लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय को रिमांड पर लिया है. उधर, आरोपी अनुकल्प मिश्रा के चाचा को भ पुलिस पूछताछ के लिए ले गई है. इनायतनगर के एक सर्राफा कारोबारी को भी हिरासत में लिया गया है. इसके साथ ही बिल्डिंग मटेरियल कारोबारियों से भी पूछताछ की गई है.
आरोपियों को जेल से ले गई पुलिस
पुलिस ने बुधवार की सुबह करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा को जेल से ले गई. राम मंदिर चढ़ावा चोरी के तीनों आरोपियों से पुलिस की टीम की 40 घंटे की पूछताछ करेगी.पुलिस इन तीनों आरोपियों से गुरुवार रात 10 बजे तक पूछताछ करेगी. जानकारी के मुताबिक, पुलिस को आरोपियों के पिछले बयानों के आधार पर कुछ अहम सुराग मिले हैं.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की कथित चोरी और गबन से जुड़ा है. एसआईटी जांच के बाद आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने दान की गिनती के दौरान रकम का गबन किया. पुलिस का दावा है कि कुछ आरोपियों ने चोरी के पैसों से संपत्तियां भी खरीदीं, जिनकी जांच जारी है. अब पुलिस रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ को इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में अहम माना जा रहा है.
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