- इंटरनल ऑडिर में राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफरी पकड़े जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई.
- CCTV फुटेज रखने के लिए क्लाउड मेमोरी लेने का सुझाव भी गैर मुनासिब समझा गया.
- ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी सिर्फ़ साइन करने के कोषाध्यक्ष बने रहे.
Ram Mandir Donation: अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी का मामला आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. इंटरनल ऑडिर में चढ़ावे में हेराफरी पकड़े जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई. मंदिर के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित नहीं रखे गए. ट्रस्ट में शामिल करीबियों ने अपने जान-पहचान वालों को कई अहम कामों में लगा रखा था. जिनसे जुड़े गैर कानूनी काम एक-एक कर अब सामने आ रहे हैं. खर्च बचाने की दलील पर ऐसे-ऐसे कारनामें किए गए, जिसे जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा. साथ ही ट्रस्ट के कामकाज को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं.
इंटरनल ऑडिटर ने पकड़ ली थी चोरी
सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के गठन के बाद जब इंटरनल ऑडिटर से चढ़ावे का हिसाब करने को कहा गया तभी इंटरनल ऑडिटर ने गड़बड़ियों की एक रिपोर्ट ट्रस्ट को दी थी, लेकिन उस रिपोर्ट को सिरे से नजरअंदाज कर दिया गया. इसके बाद लगभग फ्रेशर को ट्रस्ट का सीए बनाकर हिसाब-किताब के काम में लगा दिया गया.
1. नामी फर्म से चढ़ावे का हिसाब कराए तो मोटा खर्च होगा
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के करीबियों ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों को एक सुझाव दिया कि चढ़ावे का हिसाब किसी नामी फर्म से कराया जाए तो जवाबदेही भी तय होगी और गड़बड़ी की आशंका नहीं रहेगी. इस सुझाव को ट्रस्ट के पदाधिकारी ने यह कह कर खारिज कर दिया कि अगर कोई फर्म हायर की जाएगी तो उसके कर्मचारियों की मोटी तनख़्वाह होगी.
उसके बार मानक के हिसाब से उन्हें मेडिकल, इन्शुरन्स से लेकर पीएफ जैसे ख़र्च देने पड़ेंगे. ऐसे में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने साफ़ कहा कि लोकल के जान-पहचान वाले लोगों को कम पैसों में रख कर काम चल जाएगा.
2. CCTV क्लाउड मेमोरी और IT कंपनी हायर करने में खर्च का बहाना
जानकारी के मुताबिक लोकल और करीबियों से सस्ते में काम चलाने के नाम पर मनमाने तरीके से ट्रस्ट के लोगों ने अपने करीबियों की एंट्री मंदिर में करा कर उन्हें चढ़ावा गिनने में लगा दिया. इसी तरह ट्रस्ट को सुझाव दिया गया कि CCTV फुटेज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए क्लाउड मेमोरी ली जाए या किसी IT कंपनी को इस काम में लगा दिया जाए लेकिन ज़्यादा पैसे ख़र्च होंगे, इस नाम पर ट्रस्ट ने इस सुझाव को भी ग़ैर मुनासिब समझा.
3. सिर्फ साइन करने भर तक सीमित रही कोषाध्यक्ष की भूमिका
सूत्र बता रहे हैं कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी सिर्फ़ साइन करने के कोषाध्यक्ष बने रहे. उन्हें किसी दस्तावेज पर साइन करने होते थे तो या तो दस्तावेज लेकर कोई उनके पास जाता था या फिर डिजिटल साइन से काम चलाया जाता था. ट्रस्ट की बैठकों को छोड़कर रोजमर्रा के आय-व्यय को लेकर कोषाध्यक्ष की तरफ से कोई खास ध्यान नहीं दिया गया. अभी भी इतने लोगों से पूछताछ हुई लेकिन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष अब तक SIT के सामने पेश नहीं हुए हैं.
VVIP के नाम पर अपने लोगों को स्पेशल दर्शन
राम मंदिर में आने वाले VVIP लोगों के साथ ट्रस्ट के क़रीबियों को लगा दिया जाता था. मनमाने तरीक़े से VVIP के नाम पर अपने लोगों को स्पेशल दर्शन पूजन कराया जाता था. यहां तक की अपने लोगों की गाड़ियां भी मंदिर परिसर के अंदर ले जाने का काम तमाम कर्मचारी किया करते थे.
इसी में कई ऐसे भी लोग थे, जो ट्रस्ट को दान के नाम पर देने वाले पैसे, सोना, चांदी या अन्य कोई कीमती सामान ट्रस्ट के इन्हीं करीबियों को दे देते थे. कच्ची रसीद के नाम पर सारा चढ़ावा लेकर उसके बारे न्यारे कर दिए जाते थे.
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