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राम दरबार, अक्ल कुइंया और खंभों पर प्रतिमाएं... NDTV पर देखिए अंदर से कैसा दिखता है भोजशाला मंदिर?

धार की भोजशाला को लेकर जो विवाद था, उस पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला आ गया है. हाई कोर्ट ने भोजशाला को सरस्वती मंदिर माना है.

भोजशाला के खंभे पर बनी वाग्देवी मां की प्रतिमा की आकृति और घंटी.
  • मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार जिले की भोजशाला को सरस्वती मंदिर माना और अप्रैल 2003 के आदेश को रद्द किया
  • अदालत ने राजा भोज द्वारा 1034 में बनवाए गए भोजशाला परिसर को संस्कृत शिक्षा स्थल और मंदिर माना है
  • स्थानीय लोगों ने मंदिर की प्राचीन प्रतिमाएं और आकृतियां खंभों पर अब भी साफ देखी जा सकती हैं बताया
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धार:

मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला को हाई कोर्ट ने सरस्वती मंदिर माना है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इसे लेकर शुक्रवार को फैसला दिया था. इसके साथ ही अदालत ने अप्रैल 2003 के ASI के उस आदेश को भी रद्द कर दिया है, जिसमें हिंदुओं को मंगलवार को पूजा करने और मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी.

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने अपने फैसले में अयोध्या मामले में तय किए 10 सिद्धांतों का हवाला दिया. बेंच ने कहा कि 'ऐतिहासिक साहित्या और वास्तुकला की विशेषताएं दिखाती हैं कि संस्कृत शिक्षा के लिए भोजशाला परिसर का निर्माण राजा भोज ने साल 1034 में करवाया था, जो दूसरे समुदाय के मस्जिद निर्माण के दावे से पहले का है.'

मुस्लिम पक्ष का दावा था कि वह 1935 से यहां पर नमाज पढ़ता आ रहा है. हालांकि, NDTV ने जब यहां पहुंचकर लोगों से बात की तो उन्होंने कई बातें बताईं. लोगों ने बताया कि जब महाराज बीमार पड़ गए थे तो मुस्लिमों ने कहा कि हम आपके लिए दुआ करेंगे. तब राजा ने एक दिन के लिए नमाज पढ़ने की इजाजत दी थी.

NDTV जब यहां पहुंचा तो लोगों ने कई ऐसे सबूत दिखाए जो बताते हैं कि यह मंदिर था. यहां के खंभों पर प्रतिमाएं और आकृतियां बनी हुई हैं. लोगों का दावा है कि मध्य प्रदेश में जब दिग्विजय सिंह की सरकार थी, तब यहां खंभों और दीवारों पर चूना पुतवा कर इन्हें सपाट कर दिया गया था. लेकिन अब भी यहां के खंभों पर कई प्रतिमाएं और आकृतियां साफ नजर आती हैं. इस परिसर में एक हवन कुंड भी है.

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लोगों ने पास में बनी कमाल मौला मस्जिद के ऊपर का गुंबद भी दिखाया और दावा किया कि उसके ऊपर कलश बना हुआ है. उनका सवाल है कि मस्जिद के गुंबद पर कलश कैसे हो सकता है? उन्होंने दावा किया कि वह हनुमान मंदिर है और उसके अंदर हनुमानजी की मूर्ति भी है.

NDTV के कैमरे पर लोगों ने एक खंभे पर बनी गणेश जी की प्रतिमा भी दिखाई, जो अब खंडित हो चुकी है. लोगों ने बताया कि एक खंभे पर राम दरबार है, जहां राम-लक्ष्मण और जानकी की प्रतिमा है. भोजशाला परिसर में एक शिलालेख है, जिसे ASI ने संरक्षित करके रखा है. इस शिलालेख पर ऊपर 'ओम नमः शिवाय' लिखा है. एक खंभे पर वाग्देवी मां (सरस्वती देवी का एक रूप) की प्रतिमा बनी हुई थी, जिसे चूना लगाकर सपाट कर दिया गया, लेकिन यह अब भी नजर आती है.

खंभों पर बनी शंख की कलाकृति.

खंभों पर बनी शंख की कलाकृति.

लोगों ने दिखाया कि खंभों पर घंटियां बनी हुई हैं, शंख बने हुए हैं, प्रतिमाएं बनी हुई हैं. ये सब मस्जिद में नहीं होता. एक शख्स ने कहा, 'साक्ष्य झूठे नहीं हैं. अंधे को भी दिखाएंगे तो उसे मंदिर ही दिखेगा. यहां 84 स्तंभ हैं. इन पर आकृतियां बनी हैं.'

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इस परिसर में बना एक 'गोमुख' भी लोगों ने दिखाया. उनका दावा है कि मंदिर के गर्भगृह में मां का स्नान होता था और उसका जल होते हुए इस गोमुख से निकलकर एक कूप तक जाता था. लोगों का दावा है कि इस कूप का जल पीने से बुद्धि तेज होती है. इस कूप को 'अक्ल कुइंया' भी कहते हैं.

मंदिर परिसर में बना गोमुख.

मंदिर परिसर में बना गोमुख.

लोगों का दावा है कि इस परिसर में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई. लोगों का दावा है कि मुस्लिम यहां नमाज पढ़ने नहीं, बल्कि अपना हक जताने आते थे. उनका दावा है कि कुरान में लिखा है कि विवादित जगह पर नमाज कबूल नहीं होगी. उन्होंने कहा कि जो भी मुस्लिम यहां आता था, वह अपने घर से नमाज पढ़कर आता था या फिर दूसरी मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ता था.

यहां रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों का कहना है कि हाई कोर्ट के फैसले से उनके सालों का इंतजार खत्म हो गया. उनका कहना है कि अब बस वाग्देवी मां की प्रतिमा को भी जल्द से जल्द लंदन से लाकर मंदिर में स्थापित किया जाए.

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