- राज्यसभा की 26 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं जिनमें 24 नियमित और दो उपचुनाव की सीटें शामिल हैं.
- अशोक गहलोत का नाम चर्चा में है पर वे राजस्थान की राजनीति छोड़ दिल्ली जाना चाहेंगे या नहीं यह अनिश्चित है.
- दिग्विजय सिंह के कार्यकाल समाप्त होने से सीट खाली हो रही है और कमलनाथ सहित अन्य नाम चर्चा में हैं.
राज्यसभा की 26 सीटों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं, जिनमें 24 नियमित सीटें हैं, जबकि दो सीटों पर उपचुनाव होंगे. उपचुनाव वाली एक सीट महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट तमिलनाडु से है. कांग्रेस के लिए यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि फिलहाल उसके पास चार सीटें हैं, जो बढ़कर पांच या छह हो सकती हैं. हालांकि, इससे भी अधिक दिलचस्प यह है कि राज्यसभा टिकट की दौड़ में कौन-कौन से नेता शामिल हैं.
सबसे पहले बात राजस्थान की करें, तो यहां कांग्रेस एक सीट जीत सकती है. इस सीट के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम काफी चर्चा में है. हालांकि, समस्या यह है कि गहलोत वर्तमान में विधायक हैं और बड़ा सवाल यह है कि क्या वे राजस्थान की राजनीति छोड़कर दिल्ली जाना चाहेंगे. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व राजस्थान की जिम्मेदारी सचिन पायलट को सौंपना चाहता है और अशोक गहलोत को दिल्ली में सम्मानजनक भूमिका देना चाहता है. लेकिन इसके लिए गहलोत को राजी करना होगा, क्योंकि वे पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष पद स्वीकार करने से इनकार कर चुके हैं और कई बार कह चुके हैं कि वे राजस्थान की सेवा करना चाहते हैं.
पवन खेड़ा का नाम भी चर्चा में
राजस्थान से एक तेज-तर्रार कांग्रेस प्रवक्ता का नाम भी चर्चा में है, जो हाल ही में असम के मुख्यमंत्री से टकराव के कारण सुर्खियों में रहे थे. चूंकि पवन खेड़ा राजस्थान से ही आते हैं, इसलिए उन पर बाहरी होने का आरोप भी नहीं लगेगा. हालांकि हर बार चुनाव से पहले उनके नाम की चर्चा होती रही है, लेकिन इस बार क्या होता है, यह देखना होगा.
दिग्विजय सिंह अभी भी दौर में
मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस एक सीट जीतने की स्थिति में है, जो दिग्विजय सिंह के कार्यकाल समाप्त होने से खाली हो रही है. दिग्विजय सिंह ने तीसरा कार्यकाल लेने से इनकार किया है. लेकिन पार्टी के कुछ जानकार उन्हें अभी भी दौड़ में मान रहे हैं. अन्य संभावित नामों में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ शामिल हैं, जिनके कद और अनुभव को देखते हुए उनके नाम पर आपत्ति की संभावना कम है. इसके अलावा मीनाक्षी नटराजन और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नाम भी चर्चा में हैं.
मल्लिकार्जुन खरगे का नाम लगभग तय
कर्नाटक में कांग्रेस तीन सीटें जीत सकती है. इनमें एक सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का नाम लगभग तय माना जा रहा है. वहीं, दूसरी सीट पर डी.के. शिवकुमार अपने भाई डी.के. सुरेश को भेजना चाहते हैं, जो पहले लोकसभा सांसद रह चुके हैं. लेकिन पिछला चुनाव हार गए थे. तीसरी सीट पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपने किसी समर्थक को भेजना चाहेंगे. कर्नाटक में यह चुनाव मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अंदरूनी राजनीतिक खींचतान से भी जुड़ा हुआ है. कांग्रेस नेतृत्व डी.के. शिवकुमार को संतुष्ट रखने के लिए उन्हें एक सीट देना चाहता है, क्योंकि अभी तक मुख्यमंत्री बदलने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
झारखंड में भी दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं. कांग्रेस की कोशिश है कि वह वहां की गठबंधन सरकार में साझेदार होने के चलते हेमंत सोरेन से बातचीत कर कम से कम एक सीट पर अपना उम्मीदवार उतार सके.
तमिलनाडु की सीट पर उम्मीदवार का कार्यकाल केवल दो साल
अब उन दो सीटों की बात करें जहां उपचुनाव होने हैं. तमिलनाडु की सीट पर चुने गए उम्मीदवार का कार्यकाल केवल दो साल का होगा. देखना होगा कि इस सीट पर अभिनेता विजय अपनी पार्टी से उम्मीदवार उतारते हैं या कांग्रेस अथवा सहयोगी दलों को यह सीट मिलती है. इसी तरह महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर भी उपचुनाव होगा, जिसका कार्यकाल भी दो साल का ही रहेगा. बताया जा रहा है कि इन 26 सीटों के लिए आवश्यकता पड़ने पर 18 जून को मतदान कराया जा सकता है.
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