- ब्यावर भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे राजस्थान का एक अहम हाईवे प्रोजेक्ट है.
- 277 किलोमीटर की यह परियोजना राजस्थान को कई बड़े शहरों से जोड़ेगी.
- इस प्रोजेक्ट के लिए राजस्थान में 6 जिलों के 210 गांवों की जमीन अधिग्रहित होगी.
राजस्थान में बनने वाला 277 किलोमीटर का ब्यावर भरतपुर एक्सप्रेसवे एक बड़ी परियोजना है. इस परियोजना से राजस्थान की एमपी से होते हुए महाराष्ट्र तक मेगा कनेक्टिविटी होगी. वहीं दूसरी तरफ यह दिल्ली एनसीआर तक सुपरफास्ट रफ्तार देगा. पहले यह परियोजना 342 किलोमीटर की थी. लेकिन नए अलाइनमेंट के बाद यह परियोजना 277 किलोमीटर की हो गई है. राजस्थान के 6 जिलों के 210 गांवों की जमीन इस हाईवे के लिए अधिग्रहित की जाएगी, जिस पर काम शुरू हो चुका है. इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि यह भरतपुर शहर की भोपाल और इंदौर तक कनेक्टिविटी बढ़ा देगा.
राजस्थान के 6 जिलों से निकलेगा यह हाईवे
- जयपुर
- टोंक
- दौसा
- सवाई माधोपुर
- करौली
- भरतपुर
ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पश्चिमी राजस्थान को महत्वपूर्ण हिस्सों से सीधे जोड़ेगा. सबसे ज्यादा फायदा फागी, चाकसू, निवाई, लालसोट, बोली और बामनवास जैसी छोटी तहसीलों में आने वाले सुदूर ग्रामीण इलाकों को होगा. इसके साथ-साथ यह एक्सप्रेसवे अजमेर और भीलवाड़ा के पास से गुलाबपुरा, केकड़ी, तोडाराईसिंह और उनियारा के कनेक्टिविटी नेटवर्क को भी मजबूती से जोड़ देगा.
भरतपुर से भोपाल 5 घंटे में होगा सफर
वैसे तो यह एक्सप्रेसवे ब्यावर-भरतपुर के बीच बनेगा. लेकिन हाईवे का एक ऐसा कॉरिडोर बनने वाला है. जो राजस्थान को यूपी से गुजरते हुए एमपी तक जोड़ देगा. क्योंकि एक एक्सप्रेसवे देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क यानी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से इंटरचेंज के माध्यम से जुड़ जाएगा. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का लगभग 373 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान और 244 किलोमीटर का हिस्सा मध्य प्रदेश के रतलाम, मंदसौर जिलों से गुजरता है. नए इंटरचेंज के जरिए भरतपुर से चलने वाली गाड़ियां सीधे कोटा और झालावाड़ के रास्ते इंदौर-भोपाल या ग्वालियर-भोपाल रूट एंट्री कर सकेगी.
ऐसे में अगर आप भरतपुर से भोपाल जाते हैं तो अभी आपको 537 से 550 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जिसमें 8 से 9 घंटे का समय लग जाता है. लेकिन ब्यावर-भरतपुर हाईवे बनने के बाद यह दूरी 480 किलोमीटर तक रह जाएगी, जिसे तय करने में केवल 4 से 5 घंटे का ही समय लगेगा. क्योंकि इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहेगी.
राजस्थान एमपी की मेगा कनेक्टिविटी
राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच यह हाईवे मेगा कनेक्टिविटी देगा. क्योंकि ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे राजस्थान के टोंक और उनियारा से निकलता है, जबकि उनियारा और टोंक से नेशनल हाईवे सीधे कोटा और झालावाड़ की तरफ जाता हैं. जो आगे मध्य प्रदेश में एंट्री करते हुए राजगढ़, ब्यावरा और भोपाल को सीधा जोड़ देता है. ऐस में भोपाल या इंदौर से राजस्थान के अजमेर या जोधपुर जाने वाले वाहनों को सवाई माधोपुर, टोंक और केकड़ी होते हुए ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे के रूप में हाईस्पीड कॉरिडोर मिल जाएगा.
6 जिलों के 210 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित
राजस्थान की इस मेगा परियोजना के लिए 6 जिलों के 210 गांवों की 2600 से 3175 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित होगी. जयपुर के पास टोंक और दौसा जिलों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है. राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम ने आगे की प्रक्रिया पर्यावरण विभाग से भी मंजूरी मांगी है. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण पर काम तेजी से शुरू हो सकता है.
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