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नीचे कर रहे खेती, ऊपर बना रहे बिजली; अन्नदाता से ऊर्जा दाता बने किसान कमा रहे लाखों रुपये

राजस्थान शौर्य ऊर्जा में देश में सबसे आगे है. 42 गीगावाट का सौर्य ऊर्जा का उत्पादन यहां से होता है और राजस्थान का 125 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है.

नीचे कर रहे खेती, ऊपर बना रहे बिजली; अन्नदाता से ऊर्जा दाता बने किसान कमा रहे लाखों रुपये
अन्नदाता से ऊर्जादाता बन गए मरू प्रदेश के किसान

58 साल के कजोड़ मल का खेत उनके गांव बस्सी के कुन्दनपुरा में इन दिनों आकर्षण का केंद्र बन गया है. आसपास के किसान वहां आकर हैरान हो जाते हैं. बेमौसम में मक्का बोया है, जो अब तैयार होकर सोलर पैनल के नीचे लहरा रहा है. साथ ही 11 फीट ऊंचाई पर सौर ऊर्जा के उत्पादन के लिए लगे पैनल्स के नीचे मिर्ची के पौधे भी तैयार हो रहे हैं. कजोड़ मल की कहानी राजस्थान के उन तीन लाख से ज़्यादा किसानों की कहानी है, जिन्होंने पीएम कुसुम योजना (PM-KUSUM Yojana) के तहत इस मरू प्रदेश में एक नए भविष्य का निर्माण किया है. यहां सदियों से सूरज तपिश की पहचान रहा है, लेकिन अब वही सूरज किसानों की खुशहाली की नई कहानी लिख रहा है. 

हजारों किसान बना रहे बिजली

राजस्थान में खेत अब सिर्फ अन्न नहीं उगा रहे, बल्कि बिजली भी पैदा कर रहे हैं. पीएम-कुसुम योजना के तहत कृषि के साथ सोलर उत्पादन जैसे नवाचारों ने हजारों किसानों को 'अन्नदाता' से आगे बढ़ाकर 'ऊर्जादाता' बना दिया है. कजोड़ मल ने अपने ज़मीन के तीन बीघा हिस्से में 600 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया है. कजोड़ मल कहते हैं, "इससे हमारी बिजली की समस्या का हल हो गया है. हम सरकार को तो बिजली बेच ही रहे हैं. साथ ही हमने एक ट्रांसफार्मर लगाकर अपने लिए भी इन्ही पैनल्स से बिजली इस्तेमाल करते हैं और हमने नवाचार करके 11 फीट ऊंचाई पर पैनल लगाए हैं, जिससे हम इसके नीचे खेती भी कर रहे है."

पैनल्स के नीचे बोया मक्का- मिर्ची

किसान कजोल मल ने बताया कि सोलर पैनल्स के नीचे मैंने मक्का बोया और मौसम के पहले मक्का तैयार हो गया है. पैनल के नीचे नमी भी रहती है, जिससे मक्का और मिर्ची दोनों तैयार हो रहे है तो इसमें फयदा ही फयदा है. अब सोलर को दी गई उसकी ज़मीन का दोगुना उपयोग हो रहा है. कजोड़ मल के तीन बीघा ज़मीन में खेती के साथ-साथ 600 किलोवाट का बिजली का उत्पादन भी हो रहा है. 

पैनल्स के नीचे मक्के-मिर्च की खेती

पैनल्स के नीचे मक्के-मिर्च की खेती

एक निजी संस्था ICRIER की मदद से कजोड़ मल ने 11 फीट ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाए हैं. इसे एग्रीवोल्टाइक्स (Agrivoltaics) कहा जाता है. इसमें सोलर पैनलों को ज़मीन से पर्याप्त ऊंचाई पर लगाया जाता है. ताकि नीचे खेती हो सके और उसी जमीन से बिजली का उत्पादन भी हो सके. 

आमतौर पर जहां सोलर प्लांट लगते हैं, वहां खेती बंद हो जाती है, लेकिन यहां तस्वीर बिल्कुल अलग है. ऊंचाई पर लगाए गए सोलर पैनलों के नीचे मक्का, मिर्च और दूसरी फसलें लहलहा रही हैं. यानी एक ही जमीन पर दोहरी कमाई. ICRIER के प्रो. अशोक गुलाटी बताते हैं कि ये संस्था कृषि के क्षेत्र में नवाचार करती आई है. 

उनका कहना है, "कुन्दनपुरा में हमने जो पॉयलट किया है वो एक सोच को साकार करने का प्रयास है कि किस तरह से किसान के आय बढ़ सकती है. जहां एक एकड़ में वो 40 हजार रुपये कमाता था, कल वहां से 4 लाख मिल सकते हैं, क्योंकि खेती नीचे भी होती रहेगी और वो स्वच्छ बिजली भी पैदा करेगा. सोलर पैनल के नीचे ऐसी सब्ज़ी लगा सकते हैं, जिन्हें ठंडक और छाया की ज़रुरत है. साथ में सौर ऊर्जा भी बना रहा है और सरकार कृषि क्षेत्र में इन् किसानो से बिजली खरीद के गांव में दे रही है."

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सौर्य ऊर्जा में राजस्थान पर एक नजर

  • राजस्थान भारत का अग्रणी सोलर राज्य है.
  • सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में सौर क्षमता में तेज़ बढ़ोतरी करना है.
  • पीएम-कुसुम योजना के तहत किसान बिजली पैदा कर डिस्कॉम को बेच सकते हैं.
  • योजना के Component-A में 500 KW से 2 MW तक के प्लांट लगाए जा सकते हैं.
  • स्टिल्ट (ऊंचे) स्ट्रक्चर पर लगाए गए प्लांट के नीचे खेती भी संभव है.
  • राजस्थान में सालभर उच्च सौर विकिरण (Solar Irradiance) मिलता है.
  • पीएम-कुसुम योजना का उद्देश्य किसानों को ऊर्जा उत्पादक बनाना और कृषि आय बढ़ाना है.

राजस्थान में ऊर्जा की पूर्ति करीब 20 फीसदी रिन्यूएबल एनर्जी से हो रही है. इसमें अब पीएम कुसुम योजना के तहत लग रहे किसानों के खेतों में सोलर प्लांट एक अहम भूमिका निभा रहे हैं. इसमें 3 लाख से ज़्यादा किसान जुड़े हुए हैं. पिछले 2 साल में जैसे किसान कुसुम योजना के फायदे देखने लगे, ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसकी तरफ आकर्षित होने लगे हैं और सिर्फ 3 साल में इस योजना के तहत 37 गुना ज़्यादा बिजली का उत्पाद हुआ है. 

राजस्थान सरकार में ऊर्जा विभाग की सचिव आरती डोगरा कहती हैं, "पीएम कुसुम से उस कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन मिल रहा है जो देश की अर्थव्यवस्था की रिड की हड्डी है. आज के दौर में रूरल इकॉनमी और किसान सरकार के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण सेक्टर है, और राजस्थान में पीएम कुसुम का सबसे सफल इंप्लीमेंटेशन हुआ है."

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