सचिन पायलट को पंजाब का प्रभार संभाले हुए एक हफ्ते ही हुए है मगर इसी एक हफ्ते में उन्होंने वो कर दिखाया जो एक वक्त में लग रहा था कि नहीं हो पाएगा. सचिन पंजाब पहुंचते हैं और संगरूर में गुलजार सिंह की मौत के मामले में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं. इस प्रदर्शन में कांग्रेस के तमाम नेता पहुंचते हैं. इसमें पंच, सरपंच, आम कार्यकर्ताओं के अलावा सभी बड़े नेता मौजूद थे. फिर आई वो तस्वीर जिसका कांग्रेस आलाकमान को काफी दिनों से इंतजार होगा और जिस काम के लिए सचिन पायलट को पंजाब भेजा गया है,वो तस्वीर थी सचिन के आजू बाजू में चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग का होना.
कई लोगों ने इस तस्वीर को देखकर कहा कि यही तो पंजाब कांग्रेस को चाहिए था कि कोई ऐसा व्यक्ति यहां आए जो इन दोनों को एकजुट कर सके. प्रर्दशन के बाद जब भाषण हुआ तो चन्नी और वाडिंग ने एक दूसरे का नाम ले कर बड़ाई भी की. दोनों ने आपस में बातचीत की बाद में पता चला कि राजा वाडिंग ने चन्नी को उनके भाषण के बाद कहा कि 'तुस्सी अज कमाल ही कित्ता' जिसपर चन्नी ने कहा कि 'त्वारी मेहरबानी छोटे वीर (भाई)'.

सचिन ने अपने भाषण में कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए कहा कि नशे के खिलाफ जंग में पहली लाठी वो खाएंगे कार्यकर्ताओं की बारी बाद में आएगी. सचिन ने इस लाइन के साथ पंजाब के कांग्रेस नेताओं को भी संदेश दे दिया कि प्रदेश में लंबे संघर्ष के लिए तैयार हो जाइए. मगर सचिन ने सबसे महत्वपूर्ण बात ये कही कि 'हाईकमान सुप्रीम है और किसी को फ्री हैंड नहीं दिया जाएगा.'
इस पर पंजाब की राजनीति पर नजर रखने वाले स्वतंत्र पत्रकार जे एस सिंधु का कहना है कि 'पंजाब का सारा झगड़ा टिकट बंटवारे की आशंका को लेकर है. पंजाब में चन्नी धड़े को लगता है कि प्रधान होने के नाते टिकट बंटवारे में राजा वाडिंग की चलेगी. अध्यक्ष होने के नाते संगठन पर उनकी पकड़ है सभी जिला अध्यक्ष उन्होंने ही बनाए हैं और नाम वहीं से भेजे जाएंगे. मगर सचिन ने आलाकमान सुप्रीम की बात कह के स्थिति साफ कर दी है टिकट आलाकमान तय करेगा जिसमें उनकी भूमिका अहम होगी
सिंधु यह भी कहते हैं कि पंजाब में अब प्रधान की लड़ाई गौण हो चुकी है और अब सचिन और राहुल ही पंजाब में कांग्रेस का चेहरा होंगे. पंजाब से जो खबरें आ रही है उसके अनुसार अगले हफ्ते राहुल गांधी की यात्रा के लिए प्रोग्राम बनाया जा रहा है और एक बार राहुल गांधी ने हां कर दी तो उनकी यात्रा की शुरुआत अमृतसर से होगी और पहले चरण में करीब 30 विधानसभा सीटों से गुजरेगी. इस यात्रा में प्रियंका गांधी भी साथ होंगी इस पर कोई पक्की जानकारी नहीं आई है.
पंजाब में AAP सरकार और मंत्री हरपाल सिंह चीमा की प्रताड़ना के चलते गुलजार सिंह जी ने जान दे दी।
— Congress (@INCIndia) September 15, 2026
AAP सरकार के इसी तानाशाही रवैये के खिलाफ आज पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने चंडीगढ़ में जोरदार प्रदर्शन किया।
हम इस अन्याय के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे और गुलजार जी को न्याय दिलाकर… pic.twitter.com/vfZXSmAYWP
मगर सचिन पायलट के सामने चुनौतियां भी कम नहीं है. कांग्रेस को पिछली बार विधानसभा चुनाव में 117 में से केवल 18 सीटें ही मिली थी. दूसरे कांग्रेस ने 1 जुलाई को जितनी भी कमेटी बनाई है उसकी एक भी बैठक नहीं हुई है. ये कमिटी है कैंपेन कमिटी जिसके अध्यक्ष चन्नी हैं,चुनाव मैनेजमेंट एवं समन्वय समिति जिसके अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला हैं,कोर कमिटी जिसके प्रमुख सुखजिंदर सिंह रंधावा हैं और मैनिफेस्टो कमिटी जिसके अध्यक्ष डॉ अमर सिंह हैं.
ढाई महीने में इन समितियों ने क्या काम किया है किसी नहीं मालूम क्योंकि अभी तक पंजाब के नेता एक दूसरे के टांग खींचने में ही लगे थे. अब जा कर पार्टी पटरी पर आई है और पंजाब के कार्यकर्ताओं को सचिन पायलट से बहुत उम्मीदें हैं मगर सबसे बड़ा सवाल वही है कि सचिन पायलट ने चन्नी और राजा वाडिंग के हाथ तो मिलवा दिए लेकिन क्या उनके दिल भी मिले हैं.
कांग्रेस में ये स्थिति कई राज्यों में देखने को मिली है जिसमें हमेशा कांग्रेस को ही नुकसान हुआ है जैसे हरियाणा में हुड्डा बनाम शैलजा,छत्तीसगढ़ में बघेल बनाम सिंहदेव और राजस्थान में गहलोत बनाम पायलट. मगर लाख टके का सवाल है कि पंजाब में प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट ने शुरुआत तो बहुत अच्छी की है मगर फिनिश भी इतना ही अच्छा कर पाऐंगे?
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