- यूपी के कुंडा से विधायक राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह को आर्म्स एक्ट का नोटिस यूपी पुलिस ने भेजा है
- भानवी सिंह ने बताया कि उनके नाम के लाइसेंसी हथियार पति के कब्जे में हैं, फिर भी उन्हें नोटिस मिला है
- भानवी सिंह ने मानसिक उत्पीड़न और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की आशंका जताई है और खुद को फंसाने का आरोप लगाया है
यूपी के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह को यूपी पुलिस ने आर्म्स एक्ट का नोटिस भेजा है. इस मामले की जानकारी भावनी सिंह ने खुद एक्स पर दी है और खुद को फंसाने की साजिश का दावा भी किया है. उन्होंने नोटिस की कॉपी ही शेयर कर दी है और लिखा कि क्या इसके जरिए मुझे अब आर्म्स एक्ट में फंसाने की तैयारी है. उन्होंने लिखा कि मेरे नाम से दर्ज लाइसेंसी हथियार तो मेरे पति के कब्जे में हैं. फिर भी मुझे ही क्यों नोटिस भेजे जा रहे हैं. भानवी सिंह ने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों से मुझे मानसिक उत्पीड़न और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गंभीर आशंका है.
भानवी सिंह ने लिखा, 'लखनऊ की हजरतगंज पुलिस द्वारा कथित दो झूठी FIR दर्ज कर चार्जशीट दाखिल करने से लेकर अब प्रतापगढ़ पुलिस द्वारा ARMS ACT का नोटिस भेजे जाने तक! क्या अब मुझे ARMS ACT के झूठे मुकदमे में फँसाने की तैयारी है?' उन्होंने लिखा कि 2023 से शिकायत कर रही हूँ कि मेरे नाम के लाइसेंसी हथियार मेरे पति के कब्जे में हैं। बरामदगी के बजाय अब प्रतापगढ़ प्रशासन ने मुझे ही आर्म्स एक्ट का नोटिस भेज दिया. उन्होंने एक्स पर लिखा कि मैं एक साधारण घरेलू महिला हूं. मेरा हथियारों, गोला-बारूद या किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है.'
उन्होंने लिखा कि मेरे नाम पर लाइसेंसी हथियार वर्षों से मेरी अभिरक्षा से बाहर हैं, जिनकी बरामदगी के लिए मैं स्वयं लगातार शिकायतें कर रही हूं. फिर भी समझ नहीं आता कि नैनीताल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई बार-बार मेरे ही विरुद्ध क्यों होती दिखाई देती है? आखिर मेरी शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय मुझे ही बार-बार सफाई देने की स्थिति में क्यों खड़ा किया जा रहा है? इन परिस्थितियों से मुझे मानसिक उत्पीड़न और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गंभीर आशंका है. क्या एक साधारण घरेलू महिला को अपनी सुरक्षा और न्याय माँगने की यही कीमत चुकानी पड़ेगी? मैं केवल निष्पक्ष जाँच, न्याय और कानून के अनुसार सम्मानजनक व्यवहार चाहती हूं.
लखनऊ की हजरतगंज पुलिस द्वारा कथित दो झूठी FIR दर्ज कर चार्जशीट दाखिल करने से लेकर अब प्रतापगढ़ पुलिस द्वारा ARMS ACT का नोटिस भेजे जाने तक! क्या अब मुझे ARMS ACT के झूठे मुकदमे में फँसाने की तैयारी है? वर्ष 2024 में SHO विक्रम सिंह के कार्यकाल में हजरतगंज थाने में मेरे विरुद्ध FIR दर्ज हुई, जिसमें मेरी निर्दोष संतान को भी शामिल किया गया। मुझे FIR की जानकारी मीडियाकर्मियों से मिली। जब मैंने DCP रवीना त्यागी जी से हजरतगंज थाने में मेरे विरुद्ध दर्ज FIR के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। क्या SHO विक्रम सिंह के थाने में FIR दर्ज होने की जानकारी DCP तक नहीं पहुँचती? क्या SHO इतना स्वतंत्र है कि वरिष्ठ अधिकारियों को भी पता न चले? आखिर जवाबदेही किसकी है? मेरी शिकायत है कि मेरे नाम से ऐसे बयान दर्ज किए गए जो मैंने कभी दिए ही नहीं। IO निशा सिंह, शैलेंद्र सिंह, आलोक सिंह और मधुकर सिंह से FIR का update मांगने पर जब संतोषजनक जानकारी नहीं मिली तो? न्यायालय जाने पर चार्जशीट का पता चला और आगे जाँच का विषय सामने आया। अब प्रतापगढ़ पुलिस! SIR में मेरा और मेरी दोनों बेटियों का नाम मतदाता सूची से हटाया गया। BLO ने दबाव की बात कही। शिकायतों के बाद नाम बहाल हुए। 2023 से शिकायत कर रही हूँ कि मेरे नाम के लाइसेंसी हथियार मेरे पति के कब्जे में हैं। बरामदगी के बजाय अब प्रतापगढ़ प्रशासन ने मुझे ही ARMS ACT का नोटिस भेज दिया! मैं एक साधारण घरेलू महिला हूँ। मेरा हथियारों, गोला-बारूद या किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। मेरे नाम पर लाइसेंसी हथियार वर्षों से मेरी अभिरक्षा से बाहर हैं, जिनकी बरामदगी के लिए मैं स्वयं लगातार शिकायतें कर रही हूँ। फिर भी समझ नहीं आता कि नैनीताल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई बार-बार मेरे ही विरुद्ध क्यों होती दिखाई देती है? आखिर मेरी शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय मुझे ही बार-बार सफाई देने की स्थिति में क्यों खड़ा किया जा रहा है? इन परिस्थितियों से मुझे मानसिक उत्पीड़न और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गंभीर आशंका है। क्या एक साधारण घरेलू महिला को अपनी सुरक्षा और न्याय माँगने की यही कीमत चुकानी पड़ेगी? मैं केवल निष्पक्ष जाँच, न्याय और कानून के अनुसार सम्मानजनक व्यवहार चाहती हूँ। मेरी शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या अब मुझे Arms Act में एक और मुकदमे में फँसाने की कोशिश होगी?@Uppolice @dgpup @lkopolice @LkoCp @pratapgarhpol @CMOfficeUP @ChiefSecyUP @NCWIndia @PMOIndia @rashtrapatibhvn @HMOIndia
— Bhanvi Kumari Singh Bhadri (@BhanviKumari) October 27, 2026
आर्म्स एक्ट के अलावा कुछ और मामलों में फंसाने का आरोप
भानवी सिंह ने लिखा कि मेरी शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या अब मुझे आर्म्स एक्स में एक और मुकदमे में फँसाने की कोशिश होगी? यही नहीं भानवी सिंह ने कुछ और मामलों का जिक्र किया है और खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा कि 2024 में SHO विक्रम सिंह के कार्यकाल में हजरतगंज थाने में मेरे विरुद्ध FIR दर्ज हुई, जिसमें मेरी निर्दोष संतान को भी शामिल किया गया. मुझे FIR की जानकारी मीडिया से मिली. मैंने डीसीपी रवीना त्यागी जी से हजरतगंज थाने में मेरे विरुद्ध दर्ज FIR के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. क्या SHO विक्रम सिंह के थाने में FIR दर्ज होने की जानकारी DCP तक नहीं पहुँचती? क्या SHO इतना स्वतंत्र है कि वरिष्ठ अधिकारियों को भी पता न चले? आखिर जवाबदेही किसकी है.
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