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तत्काल टिकट में अब नहीं चलेगी होशियारी, आधार-OTP और AI निगरानी से फर्जीवाड़े पर वार

रेल मंत्रालय के अनुसार भारतीय रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग में धोखाधड़ी और साइबर हमलों को रोकने के लिए सख्त डिजिटल सुरक्षा कदम उठाए हैं. आधार सत्यापन, एंटी‑बॉट सिस्टम और 24x7 निगरानी के जरिए फर्जी बुकिंग पर कार्रवाई की जा रही है.

तत्काल टिकट में अब नहीं चलेगी होशियारी, आधार-OTP और AI निगरानी से फर्जीवाड़े पर वार
RailTel को डीप‑डार्क वेब मॉनिटरिंग और साइबर खतरों की पहचान की जिम्मेदारी दी गई
  • भारतीय रेलवे का रिजर्वेशन सिस्टम मजबूत और सुरक्षित आईटी प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसमें कई सुरक्षा उपाय लागू
  • तत्काल टिकट बुकिंग केवल आधार सत्यापित उपयोगकर्ताओं द्वारा ऑनलाइन की जा सकती है
  • एप्लिकेशन स्तर पर CAPTCHA और OTP वेरिफिकेशन जैसी तकनीकें लगाई गई हैं जो ऑटो-फिलिंग और फर्जी बुकिंग रोकती हैं
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रेल मंत्रालय के अनुसार भारतीय रेलवे का रिजर्वेशन टिकट बुकिंग सिस्टम एक मजबूत और सुरक्षित आईटी प्लेटफॉर्म है. तत्काल टिकट बुकिंग में धोखाधड़ी रोकने और सिस्टम को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए रेलवे ने कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय लागू किए हैं. इन कदमों का मकसद फर्जी बुकिंग पर लगाम लगाना और आम यात्रियों को निष्पक्ष तरीके से टिकट उपलब्ध कराना है. रेल मंत्रालय के मुताबिक, अब तत्काल टिकट सिर्फ आधार सत्यापित यूजर्स ही ऑनलाइन बुक कर सकते हैं.

आधार वेरिफिकेशन और एप्लिकेशन लेवल पर सुरक्षा इंतजाम

कुछ ट्रेनों में OTP वेरिफिकेशन भी लागू किया गया है, जिससे फर्जी बुकिंग कम होती है और आम यात्रियों को टिकट मिलने का मौका मिलता है. एप्लिकेशन लेवल पर CAPTCHA जैसे सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि ऑटो‑फिलिंग सॉफ्टवेयर और स्क्रिप्टिंग को रोका जा सके. साथ ही ब्रूट‑फोर्स और DDoS हमलों से बचाव की भी व्यवस्था की गई है. रेलवे का पूरा टिकटिंग सिस्टम हाई‑सिक्योरिटी डेटा सेंटर पर संचालित होता है। इसमें नेटवर्क फायरवॉल, इंट्रूजन प्रिवेंशन सिस्टम, वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (WAF), कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN), एंटी‑बॉट और सिक्योर DNS सेवाएं लगाई गई हैं.

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हाई‑सिक्योरिटी डेटा सेंटर और साइबर हमलों से सुरक्षा

लगभग 30 Gbps क्षमता तक के DDoS हमलों से सुरक्षा की व्यवस्था की गई है. RailTel को डीप‑डार्क वेब मॉनिटरिंग और साइबर खतरों की पहचान की जिम्मेदारी दी गई है. रेल मंत्रालय के अनुसार सिस्टम की निगरानी CERT‑In द्वारा 24 घंटे की जाती है। “Madhu‑Sanjal” सिस्टम के जरिए हैकिंग के प्रयासों पर नजर रखी जाती है, जबकि सुरक्षा टीमें लगातार लॉग मॉनिटरिंग करती हैं. सिस्टम का नियमित सुरक्षा ऑडिट भी किया जाता है और CERT‑In तथा NCIIPC इंटरनेट ट्रैफिक की लगातार निगरानी करते हैं.

लगातार निगरानी, कार्रवाई और रोके गए बॉट अटैक

रेलवे द्वारा की गई कार्रवाई के तहत वर्ष 2025 में 3.03 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी बंद की गईं। 3.99 लाख संदिग्ध बुकिंग से जुड़ी 376 शिकायतें दर्ज की गईं और 12,819 संदिग्ध ई‑मेल डोमेन ब्लॉक किए गए. पिछले छह महीनों में बड़ी संख्या में बॉट हमलों को रोका गया. दिसंबर 2025 में 14.28 अरब में से 7.25 अरब, नवंबर 2025 में 20.07 अरब में से 14.03 अरब, अक्टूबर 2025 में 24.04 अरब में से 17.00 अरब, सितंबर 2025 में 19.04 अरब में से 12.05 अरब, अगस्त 2025 में 11.04 अरब में से 5.07 अरब और जुलाई 2025 में 9.06 अरब में से 5.03 अरब बॉट रिक्वेस्ट को रोका गया.

रेल मंत्रालय का कहना है कि रेलवे फर्जी बुकिंग, एजेंटों के दुरुपयोग और साइबर हमलों पर लगातार कड़ी नजर रख रहा है, ताकि आम यात्रियों को निष्पक्ष तरीके से टिकट मिल सके.

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