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'...तो दलित दूर नहीं जाते', कांग्रेस को जाति आधारित क्षेत्रीय दलों के उदय का जिम्मेदार क्यों मान रहे राहुल?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दलित राजनीति को लेकर अपनी ही पार्टी की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले सही कदम उठाती तो दलित दूर नहीं जाते.

'...तो दलित दूर नहीं जाते', कांग्रेस को जाति आधारित क्षेत्रीय दलों के उदय का जिम्मेदार क्यों मान रहे राहुल?
राहुल गांधी ने दलित वोटबैंक को लेकर कांग्रेस की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है.
IANS
  • राहुल गांधी ने कांग्रेस की पुरानी नीतियों को दलित वोट बैंक के कमजोर होने का मुख्य कारण बताया
  • उन्होंने बीएसपी संस्थापक कांशीराम की दलित समाज को एकजुट करने वाली भूमिका की प्रशंसा की
  • राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी क्षेत्रीय दलों को खत्म कर दलितों के अधिकारों पर हमला कर रही है
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नई दिल्ली:

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बिना नाम लिए बहुजन समाज पार्टी समेत दलित वोट बैंक से जुड़ी पार्टियों के पनपने और मजबूत होने के लिए कांग्रेस की नीतियों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया. सोमवार को कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की अनुचित जाति विभाग की बैठक को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यदि कांग्रेस ने अस्सी-नब्बे के दशक में दलितों के लिए सही कदम उठाए होते तो ना जाति आधारित क्षेत्रीय दल बनते और ना ही दलित समाज उनकी तरफ रूख करता. बदलाव का संदेश देते हुए राहुल गांधी ने आगे कहा कि अब कांग्रेस में दलितों की मुख्य भूमिका होगी. 

बैठक में मौजूद सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में राहुल गांधी ने बीएसपी संस्थापक कांशीराम की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने दलित समाज को एकजुट किया और उनमें आत्मविश्वास पैदा करने का काम किया. 

सूत्रों के अनुसार बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी एक तरफ क्षेत्रीय दलों को खत्म कर रही है और दूसरी तरफ दलितों के अधिकार छीन रही है. दलितों पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस दलितों के हक की लड़ाई लड़ेगी, पार्टी में दलितों की मुख्य भूमिका होगी. कांग्रेस बाबा साहेब अंबेडकर के सपनों को पूरा करेगी. 

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ऐसा क्यों कह रहे हैं राहुल?

साल भर पहले राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि कांग्रेस ने ओबीसी समाज की अनदेखी की. इसके लिए उन्होंने तब माफी भी मांगी थी. अब राहुल ने दलित समाज को लेकर लगभग उसी तरह की बात कही है.

दरअसल, इसके जरिए राहुल दलित और पिछड़े समाज में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं. बीते लोकसभा चुनाव में उन्होंने संविधान की कॉपी हाथ में लेकर सभाएं कीं और दावा किया कि मोदी सरकार में संविधान खतरे में है. माना जाता है कि दलित समाज के बीच कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को इसका फायदा मिला. ओबीसी वर्ग को लेकर राहुल गांधी ने जाति जनगणना की मांग की थी. इन सब से लोकसभा में कांग्रेस की सीट दोगुनी हो गई थी. 

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यूपी चुनाव से है कनेक्शन!

यूपी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी दलित और पिछड़े वर्ग को लेकर अपनी मुहिम तेज करते नजर आ रहे हैं. 

पिछले हफ्ते उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में दलित समाज से आने वाले स्वतंत्रता सेनानी वीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण किया और बहुजन सभा को संबोधित भी किया. 

एक दिन पहले कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम लखनऊ ने मायावती के घर जाकर उनसे मिलने की असफल कोशिश की थी. 

दलितों को लेकर कांग्रेस की पहले की गलती को कबूल करना और अब पार्टी में उन्हें मुख्य भूमिका देने का राहुल का दांव कितना कामयाब होगा ये चुनावों में ही साफ हो पाएगा.

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