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राहुल गांधी और चिराग पासवान एक बार फिर बने पड़ोसी, चिराग ने कहा - वो पीढ़ी अलग थी ये पीढ़ी अलग है

इन दोनों परिवारों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि दोनों घरों के बीच जो दीवार थी उसमें से आने-जाने के लिए सोनिया गांधी ने एक गेट लगवा दिया था.कहा जाता पर कई राजनैतिक मुद्दों पर जब दोनों को बात करनी होती थी तो इसी दरवाजे का उपयोग किया जाता था.

राहुल गांधी और चिराग पासवान एक बार फिर बने पड़ोसी, चिराग ने कहा - वो पीढ़ी अलग थी ये पीढ़ी अलग है
राहुल गांधी और चिराग पासवान फिर बने पड़ोसी
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  • सुनहरी बाग रोड नए सत्ता केंद्र के रूप में उभर रहा है जहां राहुल गांधी, चिराग पासवान और नितिन नबीन के घर हैं
  • रामविलास पासवान और गांधी परिवार की गहरी दोस्ती थी और उनके घरों के बीच सोनिया गांधी ने एक गेट लगवाया था
  • चिराग पासवान और राहुल गांधी अब पड़ोसी हैं और चिराग ने कहा कि यह पीढ़ी पहले से अलग है
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नई दिल्ली:

चिराग पासवान ने दिल्ली के अपने नए घर 1 सुनहरी बाग पर मकर संक्रांति के दही चूड़ा का भोज रखा जिसमें मुख्य रूप से उनके पार्टी के सांसद,विधायकों शामिल हुए.सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि चिराग पासवान ने कहा कि वो अब इसी पते पर शिफ्ट होंगे.अभी तक चिराग पासवान नार्थ एवेन्यू के फ्लैट से ही काम कर रहे थे. चिराग ने कहा कि यह फैसला उन्होंने बिहार चुनाव तक के लिए लिया था लेकिन अब उन्होंने तय किया है कि उनका नया पता 1 सुनहरी बाग ही होगा. सुनहरी बाग रोड नए सत्ता के केंद्र के रूप में उभर रहा है.राहुल गांधी और चिराग पासवान के बंगले के अलावा बीजेपी के अगले अध्यक्ष नितिन नबीन भी इसी सुनहरी बाग रोड पर रहने आने वाले हैं. और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजूजू का बंगला पहले से ही इसी रोड पर है. 

सबसे मजेदार बात ये है कि उनके घर के ठीक सामने 5 सुनहरी बाग है जहां राहुल गांधी रहते हैं इस तरह कुछ सालों के बाद राहुल और चिराग एक दूसरे के पड़ोसी बनेंगे. वर्षों तक रामविलास पासवान 12 जनपथ में रहे और 10 जनपथ गांधी परिवार का घर रहा. दोनों बरसों तक एक दूसरे के पड़ोसी रहे. इन दोनों परिवारों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि दोनों घरों के बीच जो दीवार थी उसमें से आने-जाने के लिए सोनिया गांधी ने एक गेट लगवा दिया था.कहा जाता पर कई राजनैतिक मुद्दों पर जब दोनों को बात करनी होती थी तो इसी दरवाजे का उपयोग किया जाता था.

दोनों नेताओं की इसी तरह की गुफ्तगू का मैं भी गवाह रहा हूं.वाक़या कुछ ऐसा है कि यूपीए की पहली सरकार बननी थी और हम सब रिपोर्टर साये की तरह 10 जनपथ के आसपास का चक्कर लगाया करते थे और इसी बहाने 12 जनपथ का भी चक्कर लगाते रहते थे कमोबेश रोज क्योंकि दस जनपथ के अंदर एंट्री तो होती नहीं थी और पासवान जी के यहां कोई रोकटोक नहीं था.

बात उस दिन की है जब सोनिया गांधी मनमोहन सिंह को लेकर राष्ट्रपति भवन जाती है मगर उनके निकलने के पहले सुरक्षाकर्मियों ने हमें भगा दिया कि रोड पर खड़ा नहीं रह सकते वीआईपी रूट लगा हुआ है,सोनिया गांधी उन वक्त एसपीजी प्रोटेक्टी थीं.

मैं भाग कर 12 जनपथ पहंच गया वहां पासवान साहब मिल गए.उन्होंने हमारे अंगिका भाषा में पूछा कि क्या हाल है यहां कैसे. मैंने उनको बताया कि सोनिया जी और मनमोहन सिंह जी साथ गए हैं ,सुरक्षाकर्मियों ने भगा दिया है.पासवान जी मुस्कुराए और कहा राष्ट्रपति भवन भागिए वही प्रधानमंत्री बनने वाले हैं.मैंने ये खबर अपने ऑफिस में राजदीप सरदेसाई को बताई और फिर जो हुआ वो इतिहास है.

दरअसल, सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति भवन जाने के पहले रामविलास पासवान से मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने के संबंध में सलाह मशविरा की थी.यही नहीं 2011 में जब चिराग पासवान की फिल्म मिले ना मिले हम जब आई थी तो गांधी परिवार के लिए पासवान जी ने महादेव रोड के आडिटोरियम में प्रीमियर रखा था.रामविलास पासवान अंतिम समय तक 12 जनपथ में ही रहे मगर उनके निधन के बाद चिराग पासवान को 12 जनपथ खाली करना पड़ा और वो नार्थ एवेन्यू  के फ्लैट में चले गए.मगर एक बार फिर चिराग पासवान और राहुल गांधी का घर आमने सामने है और एक बार फिर पड़ोसी हो गए हैं.जब चिराग पासवान से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इतना ही कहा कि वो पीढ़ी अलग थी ये पीढ़ी अलग है.

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