विज्ञापन

मेट्रो शहर बन गए बड़े पार्किंग लॉट... AAP सांसद राघव चड्ढा ने संसद में उठाई ट्रैफिक की समस्या, 'डीकंजेशन मिशन' की मांग

AAP सांसद राघव चड्ढा ने संसद में महानगरों के ट्रैफिक जाम को गंभीर आर्थिक संकट बताया और इसे सुलझाने के लिए 'नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन' बनाने की पुरजोर मांग की.

मेट्रो शहर बन गए बड़े पार्किंग लॉट... AAP सांसद राघव चड्ढा ने संसद में उठाई ट्रैफिक की समस्या, 'डीकंजेशन मिशन' की मांग
  • AAP सांसद राघव चड्ढा ने शहरों की बढ़ती ट्रैफिक समस्या पर नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन की मांग की
  • दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और चेन्नई जैसे शहरों में ट्रैफिक जाम की गंभीर स्थिति है
  • बेंगलुरु में एक व्यक्ति सालाना औसतन 168 घंटे ट्रैफिक में फंसा रहता है, जो आर्थिक नुकसान का संकेत है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

आम आदमी पार्टी  के सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को देश के बड़े महानगरों में बढ़ती ट्रैफिक समस्या पर गंभीर चिंता जताते हुए ‘नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन' बनाने की मांग की. संसद के उच्च सदन में शहरी चुनौतियों पर बोलते हुए चड्ढा ने कहा कि ट्रैफिक जाम ने मेट्रो शहरों को 'विशाल पार्किंग लॉट' में बदल दिया है, जहां लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के बजाय सड़कों पर ही घंटों फंसे रहते हैं.

देश के सभी मेट्रो शहरों में बुरा हाल

उन्होंने दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और चेन्नई जैसे शहरों के प्रमुख जाम वाले इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में रिंग रोड, आश्रम चौक, धौला कुआं और एनएच-8 दिल्ली-गुरुग्राम मार्ग पर भारी जाम की स्थिति रहती है. वहीं कोलकाता में ए.जे.सी. बोस रोड और चौरंगी रोड, बेंगलुरु में सिल्क बोर्ड जंक्शन और आउटर रिंग रोड, जबकि मुंबई में अंधेरी, बांद्रा और फोर्ट क्षेत्र लगातार जाम से जूझ रहे हैं.

चड्ढा ने कहा, 'जब आप इन जगहों पर फंसते हैं तो ऐसा लगता है कि सड़क पर नहीं, बल्कि किसी लंबी पार्किंग में खड़े हैं. लोग अब ट्रैफिक में फंसकर अपनी कार से ही वर्चुअल मीटिंग्स करने को मजबूर हो रहे हैं.'

'साल में 100-168 घंटे ट्रैफिक में फंसे रहते हैं' 

उन्होंने ट्रैफिक जाम को सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक संकट बताते हुए कहा कि बेंगलुरु में एक व्यक्ति साल में औसतन 168 घंटे ट्रैफिक में फंसा रहता है. इसके बाद पुणे में 152 घंटे, मुंबई में 126 घंटे, कोलकाता में करीब 110 घंटे, दिल्ली में लगभग 104 घंटे और चेन्नई में करीब 100 घंटे समय बर्बाद होता है. उन्होंने कहा, 'औसतन एक व्यक्ति साल में 100 से 168 घंटे ट्रैफिक में फंसा रहता है. यह सिर्फ समय नहीं, बल्कि देश की उत्पादकता का नुकसान है.'

यह भी पढ़ें: हिमंत बिस्वा सरमा के गढ़ में कांग्रेस ने उतारा युवा चेहरा, पहले ही चुनाव में मुख्यमंत्री को टक्कर देगी बिदिशा नियोग

सरकार से नई रणनीति बनाने की अपील की

चड्ढा ने चेतावनी दी कि हर साल करीब 2.5 करोड़ नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन से स्थिति और बिगड़ सकती है, क्योंकि इनमें ज्यादातर निजी वाहन हैं. उन्होंने सरकार से अपील की कि इस समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति बनाई जाए, जिसमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करना, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट लागू करना और वैज्ञानिक पार्किंग नीति तैयार करना शामिल हो. अंत में उन्होंने कहा, 'अगर हमारे शहर ट्रैफिक जाम में ही फंसे रहेंगे, तो देश की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार नहीं पकड़ पाएगी.'

यह भी पढ़ें: भगवान की चक्की धीरे चलती है, लेकिन बारीक पीसती है... SIR को लेकर भड़कीं ममता बनर्जी, EC और बीजेपी पर साधा निशाना

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com