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This Article is From Oct 12, 2018

राफेल डील पर विवाद : नागपुर में प्लांट, नए सीईओ संपथकुमारन एसटी और 10 बड़ी बातें

बुधवार को 'मीडियापार्ट' ने दसॉल्ट एविऐशन के आंतरिक दस्तावेज के हवाले से खबर दी थी कि विमानन कंपनी 36 राफेल लड़ाकू विमानों का करार करने के लिए समझौते के तहत रिलायंस डिफेंस के साथ संयुक्त उपक्रम शुरू करने के लिए मजबूर थी.

राफेल डील पर विवाद : नागपुर में प्लांट, नए सीईओ संपथकुमारन एसटी और 10 बड़ी बातें
नागपुर में बन रहा है राफेल विमान का बनाने का प्लांट (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:  
  1. वहीं दसॉल्ट कंपनी के सीईओ एरिक ट्रेपियर ने कहा है कि रिलायंस के साथ दसॉल्ट एविएशन का संयुक्त उपक्रम राफेल लड़ाकू विमान करार के तहत करीब 10 फीसदी ऑफसेट निवेश का प्रतिनिधित्व करता है. 
  2. ट्रेपियर ने कहा कि हम करीब 100 भारतीय कंपनियों के साथ बातचीत कर रहे हैं जिनमें करीब 30 ऐसी हैं जिनके साथ हमने पहले ही साझेदारी की पुष्टि कर दी है. 
  3. मीडिया में आई कई खबरों में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मेदी ने दसाल्ट को मजबूर किया था कि वह रिलायंस को अपने साझेदार के तौर पर चुने जबकि रिलायंस के पास उड्डयन क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं था.
  4. वहीं एफपी न्यूज एजेंसी से बातचीत में दसॉल्ट की ओर से नई जानकारी दी गई है. विवादों के बाद भी इस डील को लेकर काम शुरू हो गया है. 
  5. दसॉल्ट ने रिलायंस के साथ मिलकर नागपुर में यह प्रोजक्ट लगा रही है. इसके लिए एक भारतीय सीईओ संपथकुमारन को नियुक्त कर लिया है. 
  6. पहले चरण में एक अस्थाई हैंगर (विमानों को रखने की जगह) बनाया गया है. जहां पर उत्पादन से जुड़े यंत्र रखे जाएंगे. इसको मार्च 2018 में बना लिया गया है.
  7. अप्रैल 2018 में यहां काम शुरू कर दिया गया. इस दौरान दसॉल्ट के वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय अधिकारी मौजूद थे. 
  8. दसॉल्ट ने बताया है कि इस प्रोजेक्ट के लिए कुछ मैनेजरों की भी भर्ती कर ली गई है. वहीं सीईओ संपथकुमारन के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया है कि उनको विमानन क्षेत्र में 20 सालों का अनुभव है.
  9. साल 2018 के आखिरी तक Falcon 2000 विमानों के पुर्जे इसमें बनाना शुरू कर दिया जाएगा. वहीं इस प्रोजेक्ट का दूसरा चरण जुलाई 2018 में शुरू कर लिया गया था. जिसके तहत एक स्थाई बिल्डिंग का निर्माण काम शुरू किया गया जिसको जुलाई 2019 तक पूरा कर लिया जाएगा. इसी बिल्डिंग से सारी गतिविधियां संचालित की जाएंगी.
  10. वहीं कंपनी की ओर से यह भी बताया गया है कि नागपुर इसलिए चुना गया है क्योंकि यह भारत के बीच में है और यहां पर जमीन आसानी से उपलब्ध हो गई है साथ ही एक एयरपोर्ट रनवे भी सीधे पहुंच में है.
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